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Chamoli News: लावारिस कुत्तों और बंदरों की दहशत
Mon, 19 Oct 2026 07:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Mon, 19 Oct 2026 07:08 PM IST
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इस साल 3551 को लगे रेबीज के टीके
आक्रामक बंदर और लंगूर लोगों के लिए बने मुसीबत
गोपेश्वर। चमोली जिले में लावारिस कुत्तों, बंदरों और लंगूरों की दहशत बनी है। इनके आक्रामक व्यवहार से लोग परेशान हैं। बंदरों के हमले के डर से लोगों को आम रास्तों पर आवाजाही करने में भी परेशानी हो रही है। वहीं लावारिस कुत्तों के काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसका अंदाजा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। विभाग के अनुसार इस वर्ष अक्तूबर तक जिले में 3551 लोगों को रेबीज के टीके लगाए जा चुके हैं जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या 3050 थी। इनमें अधिकांश मामले कुत्ते व बंदरों के काटे के हैं।
बंदर अब लोगों से डरने के बजाय उन पर हमला करने के लिए दौड़ रहे हैं। घरों में घुसकर खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। लंगूरों का व्यवहार भी आक्रामक होता जा रहा है। इससे आम लोगों में भय बना हुआ है। वर्ष 2023-24 में चमोली में 2716 रेबिज के टीके लगे, जबकि 24-25 में यह संख्या बढ़कर 2620 हो गई थी।
अधिवक्ता सत्यप्रकाश सती का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए उन्हें बाड़ों में रखा जाना चाहिए। पूरे जनपद में बंदरों का आतंक है। इसके साथ ही लावारिस कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने के लिए भी प्रभावी योजना बनाई जानी चाहिए। मदन मोहन डिमरी का कहना है कि बंदरों के साथ लंगूर भी आक्रामक हो रहे हैं।
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रेबिज के टीकों की खपत बढ़ रही है। बंदर और कुत्तों के काटने के केस अधिक आ रहे हैं। जिला अस्पतालों में हर दिन ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। वन्यजीवों के काटे व्यक्तियों को बेहद एहतियात बरतनी चाहिए।
डॉ. राजीव पाल, सीएमओ, चमोली
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आक्रामक बंदर और लंगूर लोगों के लिए बने मुसीबत
गोपेश्वर। चमोली जिले में लावारिस कुत्तों, बंदरों और लंगूरों की दहशत बनी है। इनके आक्रामक व्यवहार से लोग परेशान हैं। बंदरों के हमले के डर से लोगों को आम रास्तों पर आवाजाही करने में भी परेशानी हो रही है। वहीं लावारिस कुत्तों के काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसका अंदाजा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। विभाग के अनुसार इस वर्ष अक्तूबर तक जिले में 3551 लोगों को रेबीज के टीके लगाए जा चुके हैं जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या 3050 थी। इनमें अधिकांश मामले कुत्ते व बंदरों के काटे के हैं।
बंदर अब लोगों से डरने के बजाय उन पर हमला करने के लिए दौड़ रहे हैं। घरों में घुसकर खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। लंगूरों का व्यवहार भी आक्रामक होता जा रहा है। इससे आम लोगों में भय बना हुआ है। वर्ष 2023-24 में चमोली में 2716 रेबिज के टीके लगे, जबकि 24-25 में यह संख्या बढ़कर 2620 हो गई थी।
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अधिवक्ता सत्यप्रकाश सती का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए उन्हें बाड़ों में रखा जाना चाहिए। पूरे जनपद में बंदरों का आतंक है। इसके साथ ही लावारिस कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने के लिए भी प्रभावी योजना बनाई जानी चाहिए। मदन मोहन डिमरी का कहना है कि बंदरों के साथ लंगूर भी आक्रामक हो रहे हैं।
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रेबिज के टीकों की खपत बढ़ रही है। बंदर और कुत्तों के काटने के केस अधिक आ रहे हैं। जिला अस्पतालों में हर दिन ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। वन्यजीवों के काटे व्यक्तियों को बेहद एहतियात बरतनी चाहिए।
डॉ. राजीव पाल, सीएमओ, चमोली