{"_id":"6a0a4067231862a9ba08c309","slug":"the-doors-of-rudranath-temple-will-open-for-devotees-on-18th-may-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gopeshwar: बम-बम भाेले जयघोष...श्रद्धालुओं के लिए खुले रुद्रनाथ मंदिर के द्वार, दोपहर में ही होंगे दर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gopeshwar: बम-बम भाेले जयघोष...श्रद्धालुओं के लिए खुले रुद्रनाथ मंदिर के द्वार, दोपहर में ही होंगे दर्शन
Mon, 18 May 2026 01:58 PM IST
दुष्यंत शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 18 May 2026 01:58 PM IST
सार
आज डोली रुद्रनाथ मंदिर में पहुंची और विधि-विधान के साथ दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए।
विज्ञापन
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बम-बम भाेले के जयघोष से रुद्रनाथ मंदिर परिसर गूंज उठा। आज सोमवार को विधि-विधान के साथ रुद्रनाथ मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। रविवार को चतुर्थ केदार रुद्रनाथ की चल विग्रह डाेली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर से मध्य हिमालय क्षेत्र के लिए रवाना हुई थी।
विज्ञापन
डाेली भक्तों के साथ रात्रि प्रवास के लिए पनार बुग्याल पहुंची। सोमवार को डोली रुद्रनाथ मंदिर में पहुंची और विधि-विधान के साथ दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए.
विज्ञापन
इस वर्ष रुद्रनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना का जिम्मा पुजारी हरीश भट्ट संभाल रहे हैं। रविवार को कपाट खुलने की प्रक्रिया के तहत तड़के से ही गोपीनाथ और रुद्रनाथ भगवान की विशेष पूजा हुई। पूजा के बाद भगवान रुद्रनाथ की देव डोली का फूलों से शृंगार किया गया।
विज्ञापन
मद्महेश्वर के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू
द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रविवार को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को गर्भगृह से सभा मंडप में विराजमान किया गया। इस दौरान स्थानीय हक-हकूकधारी ग्रामीणों ने भगवान को नए अनाज का भोग (छाबड़ी) अर्पित किया। रविवार सुबह साढ़े आठ बजे रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को गर्भगृह से बाहर लाया गया। इस दौरान मंदिर के वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी, नवीन मैठाणी और केदार लिंग ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया और ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारी शिवलिंग और वागेश लिंग ने विधि-विधान से भोग मूर्तियों को सभा मंडप में विराजमान कराया।
इसके बाद रावल भीमाशंकर लिंग ने मद्महेश्वर धाम के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग को छह माह की पूजा का संकल्प कराते हुए दान सहित धार्मिक प्रक्रियाओं का निर्वहन कराया। जिसके बाद सभा मंडप में पंच गोंडारियों की मौजूदगी में पुजारी शिवशंकर लिंग ने भगवान को भोग अर्पित कर आरती संपन्न कराई। वहीं ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में उदयपुर, मस्तोली, ब्राह्मणखोली और डंगवाड़ी की महिलाओं ने नए अनाज से तैयार छाबड़ी भगवान को अर्पित की।
ये भी पढ़ें...Dehradun: मानकों के विपरीत संचालित 79 और होमस्टे के पंजीकरण निरस्त, अनियमितताओं पर अब तक 96 पर कार्रवाई
भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियां सोमवार 18 मई को भी सभा मंडप में विराजमान रहेंगी। वहीं 19 मई को सुबह सात बजे भगवान मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली धाम के लिए प्रस्थान करेगी तथा रात्रि प्रवास के लिए रांसी स्थित राकेश्वरी मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद 20 मई को डोली गौंडार पहुंचेगी और 21 मई को गौंडार गांव से प्रस्थान कर मद्महेश्वर धाम पहुंचेगी, जहां उसी दिन सुबह 11:30 बजे ग्रीष्मकाल के लिए मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।