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मानसून की आहट से ही परेशान होने लगे चमोली जनपद के आपदा प्रभावित

Sat, 25 Jun 2022 09:36 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jun 2022 09:36 PM IST
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The disaster of Chamoli district started getting disturbed due to the arrival of monsoon.
गर्मी से त्रस्त हर कोई मानसून का इंतजार लेकिन चमोली के 70 गांवों के करीब 500 परिवारों के लिए बारिश की बूंदों दहशत लेकर आती हैं। यह सभी परिवार आपदा प्रभावित हैं और सालों से पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें शासन से आश्वासन के अलावा आज तक कुछ नहीं मिला। कई लोग आपदा में क्षतिग्रस्त हो चुके मकानों को छोड़ चुके हैं।
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चमोली जनपद आपदा की दृष्टि से जोन फाइव में आता है। हर साल बरसात में भूस्खलन और बाढ़ के बाद पुनर्वास की सूची और लंबी हो जाती है। जनपद में पिछले दस सालों में 16 गांवों के 304 आपदा प्रभावितों को ही नए आशियाने मिल पाए हैं।
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दशोली विकास खंड की ग्राम पंचायत मठ-झड़ेता में 50 परिवार रहते हैं। वर्ष 2011 में क्षेत्र में जल विद्युत परियोजना बना रही टीएचडीसी ने गांव के निचले हिस्से में सड़क का निर्माण किया। तब से ही गांव भूस्खलन की जद में है। स्थिति यह है कि भूस्खलन घरों तक पहुंच गया है। गांव के निचले क्षेत्र के करीब 24 परिवार भूस्खलन के मुहाने पर हैं। मानसून की आहट से ही उनकी नींद उड़ जाती है। वे गांव के पुनर्वास के लिए कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। गांव के ग्राम प्रधान संजय राणा, पुष्कर सिंह, डबल सिंह, कुलदीप नेगी, प्रेम सिंह और गोपाल सिंह का कहना है कि बरसात के दौरान घरों में रात बिताने में भी डर लगता है।
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यही स्थिति जोशीमठ के रैणी गांव की भी है। बीते वर्ष 7 फरवरी को आपदा के दौरान रैणी गांव के निचले हिस्से में भूस्खलन शुरू हो गया था। कुछ मकान भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गए थे। अभी तक गांव का पुनर्वास नहीं हो पाया है।
वहीं, दशोली क्षेत्र की ग्राम पंचायत मेड़-ठेली के खनेड़ा तोक में 12 परिवार रहते थे। 2015 में बरसात के दौरान गांव के निचले क्षेत्र में भूस्खलन शुरू हुआ। बीते वर्ष स्थिति ज्यादा बिगड़ी तो 10 परिवारों ने घर छोड़कर गांव में ही सुरक्षित जगहों पर मकान बना लिए। बाकी दो परिवार अब भी खतरे के साये में रह रहे हैं। पूर्व ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि सरकार की स्पष्ट पुनर्वास नीति न होने से प्रभावितों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है।

पुनर्वास के लिए भूमि का चयन किया जा रहा है। रैणी गांव के आपदा प्रभावितों के लिए भी भूमि देखी जा रही है। अभी तक 16 गांवों के 304 परिवारों का पुनर्वास किया जा चुका है। प्राथमिकता वाले गांवों के प्रभावितों का इसी वर्ष पुनर्वास कर दिया जाएगा। शासन से भी लगातार इसकी निगरानी की जा रही है। -नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।
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