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Chamoli News: नहीं मिली केवि की स्वीकृति, सवाड़ के लोगों में मायूसी
Sun, 15 Dec 2024 05:49 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sun, 15 Dec 2024 05:49 PM IST
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फोटो
देवाल। केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश में चार केंद्रीय विद्यालय द्वारहाट, नरेंद्रनगर, कोटद्वार व मदन नेगी टिहरी में खोलने की स्वीकृति मिली लेकिन सवाड़ गांव का नाम सूची में नहीं है। ऐसे में गांव के लोगों के हाथ फिर मायूसी ही आई। ग्रामीणों ने गांव में केवि खोलने के लिए अपनी 103 नाली नाप भूमि दान दी है और छह साल पहले 15 कमरे भी बना दिए हैं। मगर यहां केंद्रीय विद्यालय के संचालन की अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
अमर शहीद सैनिक मेला समिति के अध्यक्ष आलम सिंह बिष्ट व सवाड़ वार्ड के निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य आशा धपोला ने बताया कि छह साल बाद भी ग्रामीणों की इस मांग पर सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। हालांकि बीते शनिवार को मेले में पहुंचे सांसद अनिल बलूनी ने लोगों को शीघ्र सवाड़ में केवि स्वीकृति का आश्वासन दिया। मगर यह आश्वासन भी कब साकार हो पाएगा यह समय ही बताएगा। कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा व केवि संगठन से हुए पत्राचार के बाद ही ग्रामीणों ने चंदे से 15 कमरों का टिन शेड बनाया था। यहां केवि नहीं बनने से बच्चों को पढ़ाई के लिए अन्यत्र भेजना पड़ता है।
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देवाल। केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश में चार केंद्रीय विद्यालय द्वारहाट, नरेंद्रनगर, कोटद्वार व मदन नेगी टिहरी में खोलने की स्वीकृति मिली लेकिन सवाड़ गांव का नाम सूची में नहीं है। ऐसे में गांव के लोगों के हाथ फिर मायूसी ही आई। ग्रामीणों ने गांव में केवि खोलने के लिए अपनी 103 नाली नाप भूमि दान दी है और छह साल पहले 15 कमरे भी बना दिए हैं। मगर यहां केंद्रीय विद्यालय के संचालन की अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
अमर शहीद सैनिक मेला समिति के अध्यक्ष आलम सिंह बिष्ट व सवाड़ वार्ड के निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य आशा धपोला ने बताया कि छह साल बाद भी ग्रामीणों की इस मांग पर सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। हालांकि बीते शनिवार को मेले में पहुंचे सांसद अनिल बलूनी ने लोगों को शीघ्र सवाड़ में केवि स्वीकृति का आश्वासन दिया। मगर यह आश्वासन भी कब साकार हो पाएगा यह समय ही बताएगा। कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा व केवि संगठन से हुए पत्राचार के बाद ही ग्रामीणों ने चंदे से 15 कमरों का टिन शेड बनाया था। यहां केवि नहीं बनने से बच्चों को पढ़ाई के लिए अन्यत्र भेजना पड़ता है।
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