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पटरी पर लौटी मत्स्य विभाग की हैचरी
ब्यूरो/अमर उजाला गोपेश्वर
Updated Fri, 25 Mar 2016 10:16 PM IST
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हैचरी
- फोटो : amarujala
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आपदा के बाद से अस्त-व्यस्त हुई चमोली मत्स्य विभाग की हैचरी अब पटरी पर लौटने लगी है। इस वर्ष हैचरी में ट्राउट मछली के करीब तीस हजार बीजों का उत्पादन किया गया है। मत्स्य विभाग ने मत्स्य पालकों की मांग पर हिमाचल प्रदेश से भी ट्राउट के एक लाख बीज मंगाए हैं, जिनका इन दिनों बैरांगना स्थित हैचरी फार्म में सफाई कार्य चल रहा है।
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वर्ष 2013 की आपदा में चमोली और उत्तरकाशी जिले की हेचरी में मलबा भर गया था। उत्तरकाशी की हैचरी अभी भी ठप है, जबकि चमोली के बैरांगना स्थित हैचरी में मत्स्य पालन कार्य शुरू हो गया है। यहां प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक ट्राउट मछलियों के बीज उत्पादित किए जाते थे, लेकिन मछलियों के टैंकों में मलबा भर जाने से हजारों मछलियां मर गई थीं।
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वर्ष 2014 में यहां ट्राउट के पंद्रह हजार अंडे ही तैयार हो पाए। निरंतर टैंकों की सफाई के बाद इस वर्ष मत्स्य विभाग को तीस हजार अंडे मिले हैं। ये अंडे जिले के जोशीमठ, बैरांगना और मंडल घाटी के काश्तकारों को बांटे जाएंगे।
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हिमाचल प्रदेश से मंगाए ट्राउट के एक लाख बीजों को रुद्रप्रयाग, टिहरी, चंपावत और बागेश्वर जिलों को भेजा जाएगा। ट्राउट मछली का भार करीब एक किलोग्राम होता है, जो एक बार में 15 से दो हजार अंडे दे देती है। चमोली मत्स्य विभाग के इंस्पेक्टर संजय का कहना है कि हैचरी के रख-रखाव पर पूरा ध्यान दिया गया। इस वर्ष यहां ट्राउट के करीब तीस हजार अंडे मिले हैं।