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देवी के पश्वाओं ने भक्तों को दिया आशीर्वाद
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पोखरी के दशज्यूला क्षेत्र में मां चंडिका ने घर-घर जाकर दिए अपने भक्तों को दर्शन।
- फोटो : GOPESHWAR
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दशजूला की मां चंडिका रात्रि प्रवास के लिए कांडई चंद्रशिला पहुंचीं। यहां ग्रामीणों ने मां का स्वागत किया। इस दौरान पूरी रात गांव में जागरण का आयोजन किया गया। देवी के पश्वाओं ने अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया।
मां चंडिका इन दिनों खदेड़ पट्टी के गांवों का भ्रमण कर रही हैं। शुक्रवार रात को मां चंडिका कांडई चंद्रशिला गांव पहुंचीं। ग्रामीण माता को लेने के लिए नंदाकुंड तक गए और ढोल दमाऊं के साथ माता की डोली को गांव लेकर आए। शाम को पंडित हरि बल्लभ सती सहित अन्य पंडितों ने पूजा अर्चना की। उसके बाद रात को महिलाओं ने भजन कीर्तन किए। रात में देवी के पश्वाओं ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। शनिवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद मां चंडिका का शृंगार करने के बाद हवन किया गया। ग्रामीणों ने अर्घ लगाकर आशीर्वाद लिया और माता को रडुवा गांव के लिए विदा किया। इस दौरान गांव ध्याणियां भी गांव पहुंची थीं। रडुवा गांव के लोग माता को लेने आधे रास्ते तक आए और अपने गांव ले गए। इस दौरान दशजूला चंडिका देवरा समिति के अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट, संतोष जग्गी, नरेंद्र रावत, कालिका प्रसाद कांडपाल, सतवीर जग्गी, विक्रम राणा, तेजपाल नेगी और धर्मेंद्र नेगी आदि उपस्थित रहे।
शिव व पार्वती संवाद का मंचन सराहा
नारायणबगड़। गिरिजा भवानी मंदिर में अष्टमी पर्व पर भक्तों और मेलार्थियों की भीड़ उमड़ी। इससे पहले कालरात्रि के पर्व पर चौपता चौंरी में रात्रि को मेला कमेटी की ओर से देवी-देवताओं की गाथाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित जीवंत प्रस्तुतियों का मंचन किया गया। कालरात्रि को शिव व पार्वती संवाद और दक्ष प्रजापति के यज्ञ में सती हुई पार्वती का मंचन खूब सराहा गया। नंदा देवी कैलाश यात्रा की झांकी और नंदा तेरी जात कैलाश लिजोला सजधजी के... गीत ने संपूर्ण माहौल को भक्तिमय बना दिया। कालरात्रि में आकर्षण का केंद्र बूढ़ी माता यानी गोदड़ा माई का अपनी नौ बहनों से मिलन रहा। इस अवसर पर गिरजा भवानी राजराजेश्वरी सहित नौ देवियों ने एक दूसरे से मिलाप किया। कालरात्रि के तीसरे पहर पर काली अवतरित हुईं और दैत्यों का संहार कर भक्तों को खुशहाली का आशीर्वाद दिया। इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष अवतार सिंह, सरोप सिंह, रणजीत सिंह, कार्तिक राम, दिगपाल राम, मोहनराम, बलवीर सिंह, दिगपाल सिंह, मोहन सिंह, पृथ्वी नेगी, सुरजीत सिंह, राजेंद्र प्रसाद, लीलानंद सती, भास्करानंद सती, संदीप प्रसाद, जगदीश प्रसाद, अरुण प्रसाद, राजेश प्रसाद, रजनीश प्रसाद थे। संवाद
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मां चंडिका इन दिनों खदेड़ पट्टी के गांवों का भ्रमण कर रही हैं। शुक्रवार रात को मां चंडिका कांडई चंद्रशिला गांव पहुंचीं। ग्रामीण माता को लेने के लिए नंदाकुंड तक गए और ढोल दमाऊं के साथ माता की डोली को गांव लेकर आए। शाम को पंडित हरि बल्लभ सती सहित अन्य पंडितों ने पूजा अर्चना की। उसके बाद रात को महिलाओं ने भजन कीर्तन किए। रात में देवी के पश्वाओं ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। शनिवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद मां चंडिका का शृंगार करने के बाद हवन किया गया। ग्रामीणों ने अर्घ लगाकर आशीर्वाद लिया और माता को रडुवा गांव के लिए विदा किया। इस दौरान गांव ध्याणियां भी गांव पहुंची थीं। रडुवा गांव के लोग माता को लेने आधे रास्ते तक आए और अपने गांव ले गए। इस दौरान दशजूला चंडिका देवरा समिति के अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट, संतोष जग्गी, नरेंद्र रावत, कालिका प्रसाद कांडपाल, सतवीर जग्गी, विक्रम राणा, तेजपाल नेगी और धर्मेंद्र नेगी आदि उपस्थित रहे।
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शिव व पार्वती संवाद का मंचन सराहा
नारायणबगड़। गिरिजा भवानी मंदिर में अष्टमी पर्व पर भक्तों और मेलार्थियों की भीड़ उमड़ी। इससे पहले कालरात्रि के पर्व पर चौपता चौंरी में रात्रि को मेला कमेटी की ओर से देवी-देवताओं की गाथाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित जीवंत प्रस्तुतियों का मंचन किया गया। कालरात्रि को शिव व पार्वती संवाद और दक्ष प्रजापति के यज्ञ में सती हुई पार्वती का मंचन खूब सराहा गया। नंदा देवी कैलाश यात्रा की झांकी और नंदा तेरी जात कैलाश लिजोला सजधजी के... गीत ने संपूर्ण माहौल को भक्तिमय बना दिया। कालरात्रि में आकर्षण का केंद्र बूढ़ी माता यानी गोदड़ा माई का अपनी नौ बहनों से मिलन रहा। इस अवसर पर गिरजा भवानी राजराजेश्वरी सहित नौ देवियों ने एक दूसरे से मिलाप किया। कालरात्रि के तीसरे पहर पर काली अवतरित हुईं और दैत्यों का संहार कर भक्तों को खुशहाली का आशीर्वाद दिया। इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष अवतार सिंह, सरोप सिंह, रणजीत सिंह, कार्तिक राम, दिगपाल राम, मोहनराम, बलवीर सिंह, दिगपाल सिंह, मोहन सिंह, पृथ्वी नेगी, सुरजीत सिंह, राजेंद्र प्रसाद, लीलानंद सती, भास्करानंद सती, संदीप प्रसाद, जगदीश प्रसाद, अरुण प्रसाद, राजेश प्रसाद, रजनीश प्रसाद थे। संवाद
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