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Chamoli News: चार कमरों में चल रहा सीएचसी जोशीमठ
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भू-धंसाव के कारण 10 कमरें हैं बंद, सरकार-प्रशासन नहीं ले रहा सुध
मरीजों से लेकर अस्पताल स्टाफ को झेलनी पड़ रही परेशानी
भू-धंसाव प्रभावित जोशीमठ का सीएचसी चार कमरों में सिमट कर रह गया है। जर्जर हो चुके भवन से सरकार और प्रशासन ने मुंह फेर लिया है। वर्तमान में अस्पताल के 10 कमरे बंद पड़े हैं और चार कमरों में ही पूरा अस्पताल चल रहा है। हालांकि यह कमरे भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। ऐसे में मरीजों से लेकर अस्पताल स्टाफ को कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
सीमांत क्षेत्र के गांवों से लेकर जोशीमठ नगर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जिम्मा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोशीमठ पर ही है लेकिन यह अस्पताल जनवरी माह में भू-धंसाव की चपेट में आ गया था। कमरों में दरारें पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भवन के 10 कमरों को बंद कर दिया था जिसमें आकस्मिक कक्ष से लेकर वाॅर्ड और डॉक्टरों के बैठने के कमरे शामिल हैं। अस्पताल भवन में चार कमरे ऐसे हैं जो ठीक हैं जिसके चलते पूरा अस्पताल इन्हीं चार कमरों में सिमट गया है। हालांकि यहां भी हल्की दरारें हैं। हैरानी की बात है कि प्रशासन से लेकर सरकार तक इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसे में यहां भर्ती होने वाले मरीजों को वार्ड में जगह नहीं मिल पा रही है। साथ ही स्टाफ को बैठने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।
प्री फैब्रिकेटेड कमरे भी नहीं बने
बदरीनाथ यात्रा शुरू होने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां मरीजों के उपचार के लिए प्री फैब्रिकेटेड कमरे बनाने की मांग की गई थी लेकिन सरकार ने इसपर भी ध्यान नहीं दिया। फैब्रिकेटेड कमरे बन जाते तो अस्पताल में हो रही दिक्कतें कुछ कम हो जातीं लेकिन अभी इस दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है।
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मरीजों से लेकर अस्पताल स्टाफ को झेलनी पड़ रही परेशानी
भू-धंसाव प्रभावित जोशीमठ का सीएचसी चार कमरों में सिमट कर रह गया है। जर्जर हो चुके भवन से सरकार और प्रशासन ने मुंह फेर लिया है। वर्तमान में अस्पताल के 10 कमरे बंद पड़े हैं और चार कमरों में ही पूरा अस्पताल चल रहा है। हालांकि यह कमरे भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। ऐसे में मरीजों से लेकर अस्पताल स्टाफ को कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
सीमांत क्षेत्र के गांवों से लेकर जोशीमठ नगर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जिम्मा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोशीमठ पर ही है लेकिन यह अस्पताल जनवरी माह में भू-धंसाव की चपेट में आ गया था। कमरों में दरारें पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भवन के 10 कमरों को बंद कर दिया था जिसमें आकस्मिक कक्ष से लेकर वाॅर्ड और डॉक्टरों के बैठने के कमरे शामिल हैं। अस्पताल भवन में चार कमरे ऐसे हैं जो ठीक हैं जिसके चलते पूरा अस्पताल इन्हीं चार कमरों में सिमट गया है। हालांकि यहां भी हल्की दरारें हैं। हैरानी की बात है कि प्रशासन से लेकर सरकार तक इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसे में यहां भर्ती होने वाले मरीजों को वार्ड में जगह नहीं मिल पा रही है। साथ ही स्टाफ को बैठने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।
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प्री फैब्रिकेटेड कमरे भी नहीं बने
बदरीनाथ यात्रा शुरू होने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां मरीजों के उपचार के लिए प्री फैब्रिकेटेड कमरे बनाने की मांग की गई थी लेकिन सरकार ने इसपर भी ध्यान नहीं दिया। फैब्रिकेटेड कमरे बन जाते तो अस्पताल में हो रही दिक्कतें कुछ कम हो जातीं लेकिन अभी इस दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है।
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