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जांच शिविर में, दवा एक किलोमीटर दूर
Chamoli
Updated Mon, 17 Feb 2014 05:30 AM IST
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कर्णप्रयाग। बदरीनाथ हाईवे स्थित ट्रामा सेंटर में विकलांग शिविर लगाया गया लेकिन यहां अव्यवस्थाएं ही हावी रही। यहां विकलांगों को सही जानकारी देने वाला भी नहीं था। विकलांगों को परीक्षण के बाद दवाइयां तो लिखी लेकिन दवा लेने के लिए एक किमी दूर सीएचसी भेजा गया। ऐसे में उन्हें आने-जाने में कई दिक्कतें झेलनी पड़ी तो कई विकलांग बिना किराया लिए ही लौट गए।
ट्रामा सेंटर में शनिवार सुबह 11 बजे शिविर लगाया गया। समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग ने सतलुज जल विद्युत निगम देवसारी परियोजना की ओर से विकलांगों के लिए यहां लंच के साथ उनके आने-जाने के लिए किराए की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन अव्यवस्था कुछ ज्यादा थी। एक पांव से विकलांग कांचुला के अशोक कुमार ने बताया कि चिकित्सकों ने जांच कर दवा लिखी और यहां से एक किमी दूर सीएचसी से लेने के कहा। इतनी दूर जाने में दिक्कत झेलनी पड़ी। यही हालात धल के बलवंत सिंह के साथ भी हुई। पौने दो बजे विकलांगों के लिए खाना शुरू किया गया लेकिन तब तक दुर्गम क्षेत्रों के कई विकलांग जा चुके थे। देर से शुरू हुई प्रक्रिया में कई विकलांग और उनके परिजन बिना किराया लिए घर निकल गए। सीएमओ डा. अजीत गैरोला ने कहा कि दवा शिविर में मंगाई गई लेकिन शिविर खत्म होने तक दवा यहां नहीं पहुंच पाई।
22 को विकलांगता सर्टिफिकेट दिए
कर्णप्रयाग। विकलांग शिविर में 296 लोगों का पंजीकरण किया गया, जिसमें 35 विकलांगों को परिचय पत्र और 22 लोगों की जांच कर विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। सतलुज जलविद्युत निगम ने विकलांगों को उपकरण भी बांटे।
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समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से लगाए गए शिविर में 350 से अधिक लोग पहुंचे। सीएमओ डा. अजीत गैरोला ने लोगों से गरीब और बीमारों की मदद करने की अपील भी की। जिला समाज कल्याण अधिकारी पीबी सिंह ने विकलांगों को विभाग की योजनाओं के बारे में बताया। जॉलीग्रांट देहरादून से आए चिकित्सक डा. रवि गुप्ता, डा. नीति गुप्ता और डा. रोहित गुप्ता की टीम ने विकलांगों का परीक्षण किया। इस मौके पर सतलुज जल विद्युत निगम के वरिष्ठ प्रबंधक आशुतोष बहुगुणा, सीएचसी के चिकित्सक डा. प्रकाश भट्ट, डा. विनय कुड़ियाल, सहायक समाज कल्याण अधिकारी मोहन सिंह भंडारी, फार्मासिस्ट प्रकाश ममगाईं, भुवन नौटियाल भी मौजूद थे।
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ट्रामा सेंटर में शनिवार सुबह 11 बजे शिविर लगाया गया। समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग ने सतलुज जल विद्युत निगम देवसारी परियोजना की ओर से विकलांगों के लिए यहां लंच के साथ उनके आने-जाने के लिए किराए की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन अव्यवस्था कुछ ज्यादा थी। एक पांव से विकलांग कांचुला के अशोक कुमार ने बताया कि चिकित्सकों ने जांच कर दवा लिखी और यहां से एक किमी दूर सीएचसी से लेने के कहा। इतनी दूर जाने में दिक्कत झेलनी पड़ी। यही हालात धल के बलवंत सिंह के साथ भी हुई। पौने दो बजे विकलांगों के लिए खाना शुरू किया गया लेकिन तब तक दुर्गम क्षेत्रों के कई विकलांग जा चुके थे। देर से शुरू हुई प्रक्रिया में कई विकलांग और उनके परिजन बिना किराया लिए घर निकल गए। सीएमओ डा. अजीत गैरोला ने कहा कि दवा शिविर में मंगाई गई लेकिन शिविर खत्म होने तक दवा यहां नहीं पहुंच पाई।
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22 को विकलांगता सर्टिफिकेट दिए
कर्णप्रयाग। विकलांग शिविर में 296 लोगों का पंजीकरण किया गया, जिसमें 35 विकलांगों को परिचय पत्र और 22 लोगों की जांच कर विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। सतलुज जलविद्युत निगम ने विकलांगों को उपकरण भी बांटे।
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समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से लगाए गए शिविर में 350 से अधिक लोग पहुंचे। सीएमओ डा. अजीत गैरोला ने लोगों से गरीब और बीमारों की मदद करने की अपील भी की। जिला समाज कल्याण अधिकारी पीबी सिंह ने विकलांगों को विभाग की योजनाओं के बारे में बताया। जॉलीग्रांट देहरादून से आए चिकित्सक डा. रवि गुप्ता, डा. नीति गुप्ता और डा. रोहित गुप्ता की टीम ने विकलांगों का परीक्षण किया। इस मौके पर सतलुज जल विद्युत निगम के वरिष्ठ प्रबंधक आशुतोष बहुगुणा, सीएचसी के चिकित्सक डा. प्रकाश भट्ट, डा. विनय कुड़ियाल, सहायक समाज कल्याण अधिकारी मोहन सिंह भंडारी, फार्मासिस्ट प्रकाश ममगाईं, भुवन नौटियाल भी मौजूद थे।