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डरा रहा है भूस्खलन और कटाव

Sun, 18 Aug 2013 05:36 AM IST
Chamoli
Chamoli Updated Sun, 18 Aug 2013 05:36 AM IST
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इस बार आपदा से करीब हर गांव कम या ज्यादा प्रभावित है। कुछ गांवों की स्थिति तो यह है कि नीचे से नदी कटाव कर रही है, और ऊपर से पहाड़ी से भूस्खलन डरा रहा है। ऐसे गांवों में जौला, खंदरा, स्वाड़ी, चाह गडोलिया, गवाणा, बमौथ, सेम जैसे कई गांव हैं। इन गांवों में लोग ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। कई स्कूल भी खतरे की जद में हैं। जहां बच्चों को भेजने से भी ग्रामीण डर रहे हैं। कुछ गांव तो ऐसे भी हैं, जहां पहले भी तबाहियां हुई और वह उनसे लड़कर फिर खड़े हुए हैं।


अब जौला गांव पर मंडराया खतरा
गांव के ऊपर हो रहा है भूस्खलन, लोग दहशत में
वर्ष 1936 में भी बाढ़ मचा चुकी है गांव में तबाही
कर्णप्रयाग। पिंडर नदी के कटाव और पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन से जौला गांव खतरे की जद में आ गया है। कई मकानों पर दरारें पड़ चुकी हैं। फसल सहित खेत टूट रहे हैं। स्थिति यह है कि हल्की बारिश में भी ग्रामीण रात जागकर काट रहे हैं।
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तहसील मुख्यालय से 14 किमी दूर जौला गांव में वर्ष 1936 में बाढ़ तबाही मचा चुकी है और अब गांव के ऊपर हो रहा भूस्खलन गांव में कभी भी इतिहास दोहरा सकता है। गांव के नीचे पिंडर नदी के बहाव से स्थिति भयावह बनी है। प्रद्युम्मन सिंह गड़िया बताते हैं कि जौला, बुडजौला समतल था। लाल पुल के नीचे सिंचित खेत थे, जहां सामूहिक रूप से रोपाई होती थी, लेकिन बाढ़ के बाद से सब तबाह हो गया है। गांव के ही दर्शन सिंह, चंद्रमणि उनियाल, गजेंद्र सिंह आदि का कहना है कि गांव में वर्तमान में 120 से अधिक परिवार निवास करते हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश से स्थिति और भी भयावह होती जा रही है।
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झील से बना खतरा
जौला और खंदरा के बीच करीब 50 मीटर क्षेत्र में बनी झील तबाही को न्योता दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि झील के फटने से गांव में व्यापक तबाही हो सकती है। इधर, पटवारी सहित तीन सदस्यीय प्रशासनिक टीम ने भी झील का निरीक्षण कर तहसील प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी है।

गांव को वर्ष 2010 में विस्थापन की सूची में शामिल किया जा चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पाई है। भू-धंसाव से प्रतिदिन गांव के मकान, गोशालाएं धंस रही हैं। खेत संकरे होते जा रहे हैं, जो कभी भी जमींदोज हो सकते हैं।
- कमला देवी, प्रधान जौला

जौला गांव के निरीक्षण के लिए पटवारी को भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर भू-गर्भीय टीम को भी गांव भेजा जाएगा।
- वी. षणमुगम, आपदा आयुक्त थराली



जूनियर हाईस्कूल का भवन चढ़ा मलबे की भेंट
स्वाड़ी में भी बढ़ती जा रही है दरार
नई टिहरी। जाखणीधार ब्लाक के ग्राम चाह गडोलिया और स्वाड़ी में भारी बारिश से काफी क्षति हुई है। शुक्रवार की शाम गडोलिया कन्या जूनियर हाईस्कूल के पीछे बादल फटने से स्कूल के टिनशेड के दो कमरे बह गए, जबकि दूसरे भवन में दरारें आ गई है जिससे स्कूल भवन को खतरा पैदा हो गया। मलबा आने से गांव के कई आवासीय भवनों को खतरा बना हुआ है। ग्राम स्वाड़ी में भी जमीन धंस रही है, जिससे कई आवासीय भवनों में दरारें पड़ गई हैं। गांव के पदम सिंह कुमाईं ने बताया कि गांव के नीचे 2012 में भारी भूधंसाव हुआ था जो इस बारिश में बढ़ता जा रहा है। अब गांव के बीच में भी बड़ी दरार पड़ गई है जिससे ग्रामीण खासे भयभीत हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पहले प्रशासन ने भूगर्भीय सर्वे कराने का आश्वासन दिया था लेकिन आज तक सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए। जिससे ग्रामीणों में भारी रोष बना हुआ है।

भूस्खलन से खुरशाली गांव को खतरा
कीर्तिनगर। दो दिन से रूक-रूक कर हो रही बारिश से डागर क्षेत्र के ग्राम पंचायत गवांणा भूस्खलन की चपेट में है। खुरशाली तोक के करीब आधा दर्जन मकान, 200 नाली कृषि भूमि अब तक भूस्खलन की भेंट चढ़ चुकी है। खुरशाली गांव के ऊपर 500 मीटर लंबी दरार पड़ने से ग्रामीण दहशत में हैं। लगातार बारिश होती रही तो दो हजार नाली कृषि भूमि, आधा दर्जन गांवों को खतरा हो सकता है।

मौंणा के नीचे हो रहा भूस्खलन
कर्णप्रयाग। लगातार हो रही बारिश से पिंडरघाटी सहित अन्य गांवों, कस्बों में स्थिति आपदा के दो माह बाद भी भयावह बनी हुई है। 15 अगस्त की रात्रि पोखरी विकासखंड के बमौथ गांव में राम प्रसाद पुरोहित का दो कमरों का भवन ढह गया। इधर नगर क्षेत्र के तहसील कॉलोनी में पूरन सिंह राज के मकान के ऊपर रास्ते से भूस्खलन हो रहा है। क्षेत्र पंचायत सदस्य फते सिंह पहाड़ी ने बताया कि मौंणा गांव के नीचे भूस्खलन हो रहा है, जिससे ग्रामीण जागकर रात गुजार रहे हैं। मौंणा गांव से लेकर सिलोड़ी तक करीब दो किमी क्षेत्र में आई दरार के चलते ग्रामीणों ने अपनी गोशालाएं छोड़ दी हैं।


चारों और आपदा से घिरा सेम गांव
ऊपर भूस्खलन तो नीचे नदी में कटाव
दोनों और गदेरे बन रहे आफत का कारण
बारिश शुरू होते ही घर छोड़ देते हैं ग्रामीण
उत्तरकाशी। भूस्खलन तथा जलकुर नदी में हो रहे कटाव से सेम गांव पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीण हल्की सी बारिश में अपने घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं।
गांव के ऊपर की पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है और नीचे उफनती जलकुर नदी कटाव कर रही है। दोनों और बह रहे गदेरों से भी कटाव हो रहा है।रामचंद्र चमोली बताते हैं कि गांव में हाल ही में बना एक घर भूस्खलन की भेंट चढ़ गया। सामाजिक कार्यकर्ता द्वारिका सेमवाल और पूर्व प्रधान बुद्धि सिंह पंवार ने बताया कि ग्रामीण 1993 से पुनर्वास की मांग कर रहे है। प्रशासन ने सर्वेक्षण भी करवाया था लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।


कोट...
भूस्खलन कीजद में आए तहसील के सभी गांवों का भू-वैज्ञानिकों से सर्वे करवाया जा रहा है। ठांडी ग्राम पंचायत के सेम गांव में भी भूस्खलन की सूचना पर क्षेत्रीय पटवारी को मौके पर भेज दिया गया है। प्रभावित ग्रामीणाें को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। सेल गांव का वर्ष 2010 में सर्वे करवाकर रिपोर्ट शासन को भेज दी थी।
एसके.बरनवाल, एसडीएम डुंडा।
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