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पैदल नहीं वाहन से चीन सीमा क्षेत्र में पहुंचेंगे सेना और आईटीबीपी जवान
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गोपेश्वर। नया साल भारतीय सैनिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आ रहा है। इस साल चमोली से लगी चीन सीमा क्षेत्र की चौकियां सड़क मार्ग से जुड़ जाएंगी। अत्यधिक बर्फबारी होने से हालांकि इन दिनों सड़क का निर्माण कार्य रुका हुआ है, लेकिन बीआरओ के अधिकारियों ने वर्ष 2019 में ही चीन सीमा क्षेत्र में सुमना और रत्ताकोना तक सड़क मार्ग का कार्य पूर्ण कर देने का दावा किया है।
चमोली जिला धार्मिक के साथ ही सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। जिले की नीती और माणा घाटी चीन सीमा को जोड़ती हैं। नीती घाटी में भारत और चीन के बीच बाड़ाहोती क्षेत्र 80 वर्ग किलोमीटर में फैला चारागाह है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपना दावा करते हैं। यही वजह है कि चीन बार-बार यहां सीमा उल्लंघन करता है। अब सरकार सीमा क्षेत्र को सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दे रही है। यहां जोशीमठ से मलारी (62 किमी) तक सड़क बेहतर स्थिति में है, लेकिन यहां से आगे चट्टानी भाग होने से बीआरओ के मजदूर रोबोट और जेसीबी मशीन की मदद से सड़क निर्माण कार्य में जुटे हैं। बर्फबारी होने से पहले नवंबर माह तक यहां गिर्थी से सुमना (सात किमी) तक सड़क निर्माण कार्य प्रगति पर था। बर्फबारी होने के कारण मजदूर अब निचले क्षेत्रों में आ गए हैं। अब फरवरी माह से दोबारा सड़क का निर्माण कार्य शुरू होगा।
25 किमी पैदल पगडंडी नापते हैं भारतीय जवान
चमोली जिला विषम भौगोलिक परिस्थितियों से घिरा हुआ है। यहां नीती और माणा घाटी मार्ग में ऊंची-ऊंची चट्टानें हैं। भारतीय सेना और आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) के जवान नीती घाटी में चीन सीमा क्षेत्र में स्थित गिर्थी से रिमखिम चौकी तक करीब 25 किलोमीटर तक पैदल पगडंडी नापकर चीन सीमा क्षेत्र में पहुंचते हैं। जवानों के लिए रसद और जरूरी सामग्री घोड़े-खच्चरों की मदद से सप्लाई होती है। शीतकाल में हेलीकॉप्टर के जरिए जवानों के लिए राशन की आपूर्ति होती है।
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कोट-----------
चीन सीमा क्षेत्र में सुमना और रत्ताकोना तक वर्ष 2019 में ही सड़क निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा। यहां डामरीकरण कार्य भी इसी वर्ष पूर्ण कर सेना के वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी जाएगी। इसके बाद सेना की रिमखिम चौकी तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य है, जो बाड़ाहोती के समीप स्थित है। सेना के जवानों को सीमा क्षेत्र तक पहुंचने में कहीं भी पैदल आवाजाही नहीं करनी पड़ेगी।
-एसएस मक्कर, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ, चमोली
चमोली जिला धार्मिक के साथ ही सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। जिले की नीती और माणा घाटी चीन सीमा को जोड़ती हैं। नीती घाटी में भारत और चीन के बीच बाड़ाहोती क्षेत्र 80 वर्ग किलोमीटर में फैला चारागाह है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपना दावा करते हैं। यही वजह है कि चीन बार-बार यहां सीमा उल्लंघन करता है। अब सरकार सीमा क्षेत्र को सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दे रही है। यहां जोशीमठ से मलारी (62 किमी) तक सड़क बेहतर स्थिति में है, लेकिन यहां से आगे चट्टानी भाग होने से बीआरओ के मजदूर रोबोट और जेसीबी मशीन की मदद से सड़क निर्माण कार्य में जुटे हैं। बर्फबारी होने से पहले नवंबर माह तक यहां गिर्थी से सुमना (सात किमी) तक सड़क निर्माण कार्य प्रगति पर था। बर्फबारी होने के कारण मजदूर अब निचले क्षेत्रों में आ गए हैं। अब फरवरी माह से दोबारा सड़क का निर्माण कार्य शुरू होगा।
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25 किमी पैदल पगडंडी नापते हैं भारतीय जवान
चमोली जिला विषम भौगोलिक परिस्थितियों से घिरा हुआ है। यहां नीती और माणा घाटी मार्ग में ऊंची-ऊंची चट्टानें हैं। भारतीय सेना और आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) के जवान नीती घाटी में चीन सीमा क्षेत्र में स्थित गिर्थी से रिमखिम चौकी तक करीब 25 किलोमीटर तक पैदल पगडंडी नापकर चीन सीमा क्षेत्र में पहुंचते हैं। जवानों के लिए रसद और जरूरी सामग्री घोड़े-खच्चरों की मदद से सप्लाई होती है। शीतकाल में हेलीकॉप्टर के जरिए जवानों के लिए राशन की आपूर्ति होती है।
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चीन सीमा क्षेत्र में सुमना और रत्ताकोना तक वर्ष 2019 में ही सड़क निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा। यहां डामरीकरण कार्य भी इसी वर्ष पूर्ण कर सेना के वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी जाएगी। इसके बाद सेना की रिमखिम चौकी तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य है, जो बाड़ाहोती के समीप स्थित है। सेना के जवानों को सीमा क्षेत्र तक पहुंचने में कहीं भी पैदल आवाजाही नहीं करनी पड़ेगी।
-एसएस मक्कर, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ, चमोली