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धरोहरों के संरक्षण की जरूरत
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Mon, 14 Mar 2016 10:17 PM IST
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घोरावल तहसील क्षेत्र के देवगढ में आयोजित सम्मान समारोह में कवि ओमपाल निडर को संम्मानित करते केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र।
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केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने रविवार को कहा कि सोनभद्र सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध है। यहां की धरती परंपराओं, लोक संस्कृति और अंग्रेजों और मुगलों के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की गवाह रही है।
इस धरोहर को सहेजने की जरूरत है। यह काम सबके प्रयास से हो सकता है। केंद्रीय मंत्री शिवद्वार क्षेत्र के देवगढ़ में प्रभाश्री ग्रामोदय सेवा आश्रम की ओर से महीयसी प्रभा सिंह जयंती पर आयोजित देवगढ़ महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सोनभद्र को जो पहचान मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पाई है। यहां की सांस्कृतिक विरासत दुनिया के सामने लाने की जरूरत है। इसके लिए उनसे जो बन पड़ेगा, वह करेंगे। देवगढ़ महोत्सव को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मुगलों और खासकर औरंगजेब के समय में यह इलाका बेहद महत्वपूर्ण था।
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विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक, प्रभाश्री ग्रामोदय सेवा आश्रम के संस्थापक रमाशंकर पांडेय विकल, प्रधान संयोजक डॉ. सरजीत सिंह डंग ने भी जिले के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर बात रखी। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 26 लोगों को प्रभाश्री सम्मान और सात विभूतियों को विशेष सम्मान से नवाजा गया। चार पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। साईंराम अय्यर की महिला-पुरुष दोनों की आवाज में गीतों की प्रस्तुति तथा राजेंद्र तिवारी का मूंछ नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।
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इस धरोहर को सहेजने की जरूरत है। यह काम सबके प्रयास से हो सकता है। केंद्रीय मंत्री शिवद्वार क्षेत्र के देवगढ़ में प्रभाश्री ग्रामोदय सेवा आश्रम की ओर से महीयसी प्रभा सिंह जयंती पर आयोजित देवगढ़ महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि सोनभद्र को जो पहचान मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पाई है। यहां की सांस्कृतिक विरासत दुनिया के सामने लाने की जरूरत है। इसके लिए उनसे जो बन पड़ेगा, वह करेंगे। देवगढ़ महोत्सव को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मुगलों और खासकर औरंगजेब के समय में यह इलाका बेहद महत्वपूर्ण था।
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विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक, प्रभाश्री ग्रामोदय सेवा आश्रम के संस्थापक रमाशंकर पांडेय विकल, प्रधान संयोजक डॉ. सरजीत सिंह डंग ने भी जिले के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर बात रखी। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 26 लोगों को प्रभाश्री सम्मान और सात विभूतियों को विशेष सम्मान से नवाजा गया। चार पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। साईंराम अय्यर की महिला-पुरुष दोनों की आवाज में गीतों की प्रस्तुति तथा राजेंद्र तिवारी का मूंछ नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।