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‘सरकार को किसानों की नहीं बल्कि अडानी-अंबानी की चिंता’
अमर उजाला ब्यूरो/संभल।
Updated Mon, 25 Dec 2017 05:24 AM IST
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संभ्ाल में मंच से जनता का अभिवादन करते हन्ना हजारे
- फोटो : अमर उजाला
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समाजसेवी अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कालाधन वापस नहीं आने और लोकपाल कानून लागू नहीं होने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। यह भी कहा कि सरकार को किसानों की नहीं अडानी और अंबानी की चिंता है।
किसान पंचायत के दौरान अन्ना हजारे ने कहा कि इस सरकार को किसान की चिंता नहीं है। सरकार उद्योगपतियों की चिंता ज्यादा करती है। अडानी-अंबानी की चिंता ज्यादा करती है। मैंने सरकार को तीन साल तक सरकार को मौका दिया। मैं विरोध में नहीं बोला और तीन साल बीत गए।
सरकार बनने से पहले आश्वासन दिया था कि हम सत्ता में आने के बाद 30 दिन में विदेश का काला धन वापस लाएंगे और हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये जमा करेंगे। तो लोग खुश हुए। जमकर वोट दिए और सरकार बन गई पर और अब तो तीन साल हो गए। 15 लाख रुपये छोड़ो, 15 रुपये भी जमा नहीं हुए।
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मैं तो फकीर हूं. मेरे क्या किसी के खाते में रुपये नहीं आए। इसके अलावा मोदी ने कहा था कि हम सत्ता में आते हैं तो प्रभावी लोकपाल को लागू करेंगे। जो लोकपाल भ्रष्टाचार को कम करेगा लेकिन मोदी सरकार ने धारा 44 में संशोधन करके लोकपाल को कमजोर कर दिया है।
अब लोकसेवक अपनी संपत्ति को प्रत्येक वर्ष घोषित करने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने लोकपाल को कमजोर करने वाला विधेयक अपने विशेषाधिकार से पारित करा दिया। यह विधेयक 27 जुलाई 2016 को लोकसभा, 28 जुलाई को राज्यसभा से पास करा दिया और वो भी बिना चर्चा के।
29 जुलाई को राष्ट्रपति के साइन हो गए। तीन दिन में कानून लागू हो गया। वहीं असली लोकपाल अब तक प्रभावी न हुआ। अन्ना हजारे ने वित्तीय नियमों और कानूनों में संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि अब कारपोरेट जगत अपने मुनाफे का कितना भी धन राजनीतिक दलों को दान कर सकते हैं और उन्हें उस राजनीतिक दल का नाम बताने की मजबूरी भी नहीं है। नरेंद्र मोदी सरकार कारपोरेट जगत के साथ मिलकर लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर रही है।
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किसान पंचायत के दौरान अन्ना हजारे ने कहा कि इस सरकार को किसान की चिंता नहीं है। सरकार उद्योगपतियों की चिंता ज्यादा करती है। अडानी-अंबानी की चिंता ज्यादा करती है। मैंने सरकार को तीन साल तक सरकार को मौका दिया। मैं विरोध में नहीं बोला और तीन साल बीत गए।
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सरकार बनने से पहले आश्वासन दिया था कि हम सत्ता में आने के बाद 30 दिन में विदेश का काला धन वापस लाएंगे और हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये जमा करेंगे। तो लोग खुश हुए। जमकर वोट दिए और सरकार बन गई पर और अब तो तीन साल हो गए। 15 लाख रुपये छोड़ो, 15 रुपये भी जमा नहीं हुए।
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मैं तो फकीर हूं. मेरे क्या किसी के खाते में रुपये नहीं आए। इसके अलावा मोदी ने कहा था कि हम सत्ता में आते हैं तो प्रभावी लोकपाल को लागू करेंगे। जो लोकपाल भ्रष्टाचार को कम करेगा लेकिन मोदी सरकार ने धारा 44 में संशोधन करके लोकपाल को कमजोर कर दिया है।
अब लोकसेवक अपनी संपत्ति को प्रत्येक वर्ष घोषित करने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने लोकपाल को कमजोर करने वाला विधेयक अपने विशेषाधिकार से पारित करा दिया। यह विधेयक 27 जुलाई 2016 को लोकसभा, 28 जुलाई को राज्यसभा से पास करा दिया और वो भी बिना चर्चा के।
29 जुलाई को राष्ट्रपति के साइन हो गए। तीन दिन में कानून लागू हो गया। वहीं असली लोकपाल अब तक प्रभावी न हुआ। अन्ना हजारे ने वित्तीय नियमों और कानूनों में संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि अब कारपोरेट जगत अपने मुनाफे का कितना भी धन राजनीतिक दलों को दान कर सकते हैं और उन्हें उस राजनीतिक दल का नाम बताने की मजबूरी भी नहीं है। नरेंद्र मोदी सरकार कारपोरेट जगत के साथ मिलकर लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर रही है।
मेरी विनती 23 मार्च को रहना दिल्ली, जेल भी जाना
संभल में अन्ना हजारे को सुनने पहुंची जनता
- फोटो : अमर उजाला
अन्ना हजारे ने कहा कि देश भर के किसानों और नौजवानों एक हो जाओ। मेरी विनती है 23 मार्च को दिल्ली पहुंचने की है। वहां पहुंच कर जेल भरो क्योंकि जेल में रहना आसान है। सबेरे नाश्ता और दो टाइम का खाना मिलता है। इसलिए किसानों के लिए और देश के लिए जेल जाने से पीछे मत हटना।
अन्ना ने जब किसानों और नौजवानों से जेल जाने और आंदोलन में भागीदारी का आह्वान कियातो लोगों ने हाथ उठाकर उनका समर्थन किया। जनलोकपाल के लिए दिल्ली के रामलसील मैदान में छिड़ी पहली जंग के वक्त देश में क्रांति का माहौल बन गया था।
हर तरफ ऐसा लग रहा था कि अन्ना के आंदोलन से एक प्रभावी जनलोकपाल आएगा और भ्रष्टाचार थम जाए पर ऐसा नहीं हो सका? जब यह सवाल रविवार को अन्ना हजारे के सामने उठाया गया तो उन्होंने कहा कि उस आंदोलन से पहले वह देश भर का दौरा नहीं कर पाए थे। सीधे दिल्ली में आए थे और आंदोलन शुरू हो गया।
आंदोलन को लेकर सरकार पर दबाव बना और हमें आश्वासन मिला पर तत्कालीन सरकार ने धोखा किया। इसके बाद कोई बड़ा आंदोलन नहीं हो सका? आखिर क्यों? इस पर अन्ना बोले- तू बड़ा कि मैं बड़ा। यह बात शुरू हो गई थी। आंदोलन कैसे आगे बढ़ता। लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है। देश भर से लोग एक बार खड़े हो रहे हैं? नौ राज्यों का मैंने दौरा किया और आंदोलन के लिए लोग उत्साहित हैं।