फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Exclusive: Decreasing soil strength due to lack of fossil carbon, harmful for health

एक्सक्लूसिव: रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से घट रही मिट्टी की ताकत, सरकार ने भी योजना से खींचे हाथ

Thu, 05 May 2022 11:53 AM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 05 May 2022 11:53 AM IST
सार

रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से उपजाऊ मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। खेतों की जांच के लिए किसान एक से दो हजार रुपये तक खर्च कर रहे हैं लेकिन किसानों को मिट्टी का रिपोर्ट कार्ड देने से सरकार ने भी हाथ खींच लिए हैं।

विज्ञापन
Exclusive: Decreasing soil strength due to lack of fossil carbon, harmful for health
कृषि भूमि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अधिक फसल उत्पादन लेने की होड़ में रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से गंगा-यमुना दोआब की उपजाऊ मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। किसानों को मिट्टी का रिपोर्ट कार्ड देने से सरकार ने भी हाथ खींच लिए हैं। अब केवल जागरूक किसान ही निर्धारित फीस और मिट्टी के नमूने देकर लैब से जांच करा रहे हैं। क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार जनपद की मिट्टी में जीवांश कार्बन, जिंक, सल्फर, फासफोरस और आयरन की सबसे ज्यादा कमी होती जा रही है। 

विज्ञापन


दबथुआ निवासी सूरज, मसूरी निवासी प्रदीप काकराण और कलंजरी निवासी अभिमन्यु सांगवान ने अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराई तो जीवांश कार्बन 0.8 पीपीएम के मुकाबले सिर्फ 0.3 पीपीएम ही मिला। प्रयोगशाला में प्रति मिट्टी नमूना 102 रुपये जांच फीस है। अपने सभी खेतों की जांच के लिए किसान एक से दो हजार रुपये तक खर्च कर रहे हैं। लेकिन सीमांत किसान जांच नहीं करा रहे हैं। इससे उनकी मिट्टी की बीमारी का उपचार भी नहीं हो पा रहा है। 
विज्ञापन


सरकार ने खींच लिए योजना से हाथ 
केंद्र सरकार ने 2015-16 में मृदा स्वास्थ कार्ड योजना शुरू की थी। इसमें सरकार की तरफ से मिट्टी की जांच करके किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए गए थे। चार साल चलने के बाद अब यह योजना बंद पड़ी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: भ्रष्टाचार: अफसरों ने रिश्तेदारों को 10 गुना तक दिलाया मुआवजा, सरकार को पहुंचाया 25 करोड़ का नुकसान

मवाना तहसील के हालात सबसे विकट 
सरधना और मेरठ तहसील में जीवांश कार्बन का स्तर 0.8 पीपीएम के मुकाबले 0.3 पीपीएम आ रहा है। जिंक का स्तर 1.20 के मुकाबले 0.95 पीपीएम और आयरन  का स्तर 8 पीपीएम से कम व सल्फर का स्तर 15 पीपीएम से कम आ रहा है। वहीं मवाना तहसील में जीवांश कार्बन अति न्यून स्थिति 0.2 तक पहुंच गया है। फास्फोरस और पोटाश का स्तर भी कम हो गया है। 

किसान ये करें उपचार 
क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के मृदा विशेषज्ञ प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि जीवांश कार्बन की कमी दूर करने के लिए किसान गोबर की खाद, हरी खाद (सनई, ढांचा, लोबिया और मूंग) वर्मी कंपोस्ट आदि के प्रयोग के साथ ही फसल चक्र भी अपनाए। मिट्टी की जांच जरूर कराएं। जो भी तत्व कम हों उनका इस्तेमाल करें। 

यह भी पढ़ें: यूपी: बागपत में स्कूल बस की चपेट में आने से छह वर्षीय छात्र की मौत, परिजनों में मचा कोहराम

मानव सेहत पर भी बुरा असर 
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के चलते फसल में भी पोषक तत्वों की कमी हो रही है। यही कारण है कि लोगों को खाद्यान्न से पूरा पोषण नहीं मिल पा रहा है। 

किसान खुद करा रहे जांच 
अब किसान स्वयं ही मिट्टी के नमूनों की जांच करा रहे हैं। मंडल की मिट्टी में जीवांश कार्बन, जिंक, फास्फोरस और पोटाश आदि की कमी देखी जा रही है। -प्रबोध कुमार, सहायक निदेशक, क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला मेरठ

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed