फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   Sanskriti university Offering DLAD, B.Ed, BLAD and D.Ed Courses

संस्कृति यूनिवर्सिटी से पूरा करें शिक्षक बनने का सपना, जानें कौन सा कोर्स है आपके लिए बेहतर

Thu, 26 Jul 2018 04:39 PM IST
Advertorial
Advertorial Updated Thu, 26 Jul 2018 04:39 PM IST
विज्ञापन
Sanskriti university Offering DLAD, B.Ed, BLAD and D.Ed Courses
संस्कृति यूनिवर्सिटी

भारत में नौकरियों की कमी नहीं है। आईटी सेक्टर से लेकर टेलिकॉम सेक्टर तक सैकड़ों सेक्टर ऐसे हैं, जहां रोजगार की अपार संभावनाएं हैं और युवा पीढ़ी इन क्षेत्रों में करियर बना भी रही है। रोजगार के इन अनेक साधनों की भीड़ में कुछ प्रोफेशन ऐसे भी हैं, जिनमें पैसा भले ही अन्य प्रोफेशन की तुलना में कम है, लेकिन सम्मान और आत्मसंतुष्टि कहीं ज्यादा है। ऐसे ही प्रोफेशन में एक है, टीचिंग। शिक्षक समाज में हमेशा सम्माननीय रहा है। शिक्षक ही अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर समाज में रोशनी को फैलाता है। यह प्रोफेशन प्राचीन काल से है और इसका महत्व अनंत काल तक बना रहेगा। भारत युवाओं का देश है, यहां बेरोजगारी से भी ज्यादा बड़ी समस्या है युवाओं में स्किल का न होना। अनस्किल्ड युवाओं की बड़ी संख्या हमारे देश में है, ऐसे में शिक्षकों की हमें बड़ी संख्या में जरूरत है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में करीब 5 लाख शिक्षकों की कमी है। यह आंकड़ा देखकर कोई भी आसानी से समझ सकता है कि इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं कितनी ज्यादा हैं। मथुरा से संचालित संस्कृति यूनिवर्सिटी में भी युवाओं की सुविधा के लिए डीएलएड (बीटीसी), बीएड, बीएड स्पेशल, बीएलएड और डीएड स्पेशल के कोर्स कराए जाते हैं। जो छात्र- छात्राएं 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 या बीए, बीएससी, बीकाम परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं वे इन कोर्सों को पूरा कर शिक्षक बनने

विज्ञापन

का सपना साकार कर सकते हैं। 

बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
अध्यापन के क्षेत्र में आने के लिए युवाओं के बीच यह कोर्स काफी लोकप्रिय है। पहले यह कोर्स एक साल का था, जिसे साल 2015 से बढ़ाकर दो साल का कर दिया गया है। इस कोर्स को करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम देना होता है। परीक्षा देने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है। इस कोर्स को करने के बाद युवा प्राइमरी, अपर प्राइमरी और हाईस्कूल स्तर तक पढ़ाने के लिए पात्र हो जाते हैं
विज्ञापन

डीएलएड (बीटीसी) जो युवा प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में अध्यापन करना चाहते हैं उनके लिए डीएलएड (बीटीसी) सबसे बेहतरीन कोर्सों में से एक है। यह दो साल का कोर्स है। इस कोर्स को करने के लिए छात्र-छात्राओं की प्रवेश प्रक्रिया मेरिट लिस्ट के आधार पर और कट ऑफ मार्क्स पर होती है यानी कि 10वीं, 12वीं और स्नातक के प्रतिशत को आधार मानकर ही डीएलएड करने के लिए कॉलेज मिलता है। इसके लिए छात्र-छात्राओं को काउंसलिंग प्रक्रिया से भी गुजरना होता है। इस कोर्स को करने के बाद युवा प्राइमरी और अपर प्राइमरी लेवल के
विज्ञापन
विज्ञापन

टीचर बनने के योग्य हो जाते हैं।

बीएलएड (बैचलर ऑफ एलीमेंट्री एजुकेशन)
बीएलएड (बैचलर ऑफ एलीमेंट्री एजुकेशन) चार साल का कोर्स है। इसमें प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं का 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। इस कोर्स का उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को तैयार करना है। छात्र-छात्राएं संस्कृति यूनिवर्सिटी से भी इस कोर्स को कर सकते हैं। डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) यह दो वर्षीय कोर्स प्राइमरी शिक्षक बनने के लिए कराया जाता है। इस कोर्स को करने के लिए छात्र-छात्राओं का 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। छात्र-छात्राएं संस्कृति यूनिवर्सिटी से भी इस कोर्स को कर सकते हैं।

डीएड स्पेशल और बीएड स्पेशल विशेष आवश्यकता वाले मंदबुद्धि या फिर मामूली रूप से विकलांग, दृष्टिहीन आदि समस्याओं से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों के साथ नहीं पढ़ पाते। साथ ही ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग से प्रशिक्षित टीचर शिक्षा विभाग में नहीं हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सरकारी स्कूलों में ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजूकेशन टीचर रखने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय के निर्देश पर केन्द्र के स्कूलों में तो स्पेशल एजुकेशन टीचर्स की तैनाती हो चुकी है मगर विभिन्न राज्यों के सरकारी स्कूलों में डीएड स्पेशल और बीएड स्पेशल शिक्षकों का बेहद अभाव है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मंशा है कि सिर्फ शासकीय ही नहीं अशासकीय क्षेत्र के स्कूलों में भी डीएड स्पेशल और बीएड स्पेशल शिक्षक होने चाहिए।

मंत्रालय के निर्देश के बाद प्रत्येक सरकारी स्कूल में एक-एक स्पेशल एजुकेशन टीचर रखे जाने की उम्मीद बढ़ गई है। जो युवा डीएड स्पेशल और बीएड स्पेशल कोर्स कर लेंगे उन्हें रोजगार भी आसानी से मिल सकेगा। डीएड स्पेशल कोर्स करने के लिए जहां छात्र-छात्राओं का 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है, वहीं बीएड स्पेशल कोर्स के लिए स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। संस्कृति यूनिवर्सिटी से भी डीएड स्पेशल और बीएड स्पेशल कोर्स किए जा सकते हैं।


शिक्षण क्षेत्र में करियर
आर्थिक उदारीकरण के बाद से शासकीय तथा निजी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की मांग लगातार बढ़ रही है। देश के दूर-दराज इलाकों में भी अब स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज खुल रही हैं तथा इसमें बड़े स्तर पर पूंजी निवेश किया जा रहा है। इन स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाने के लिए योग्य, प्रशिक्षित और पेशेवर शिक्षकों की मांग भी बढ़ती जा रही है। शिक्षक बनने के इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर कई कोर्स मौजूद हैं इनमें से कोई एक कोर्स कर शिक्षक बना जा सकता है। इस क्षेत्र में शासकीय और अशासकीय दोनों ही सेक्टर्स में जॉब के लिए असीमित ऑप्शंस हैं। सरकारी संस्थानों के अलावा युवा निजी स्कूलों से लेकर कोचिंग संस्थानों में भी जॉब कर सकते हैं। यही नहीं, वह खुद का भी कोचिंग इंस्टीट्यूट खोल सकते हैं।

- Advertorial

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed