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सीएसजेएम विश्वविद्यालय के 23 हजार छात्रों की रुक जाएगी डिग्री, फिर देनी होगी परीक्षा
Mon, 26 Aug 2019 04:41 PM IST
शिखा पांडेय
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 26 Aug 2019 04:41 PM IST
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सीएसजेएमयू
- फोटो : गूगल
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कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) और संबद्ध महाविद्यालयों से स्नातक की परीक्षा पास करने के बावजूद करीब 23 हजार से अधिक छात्र फिलहाल फेल माने गए हैं। इन छात्रों की डिग्री रोक दी जाएगी।
इन छात्रों ने अपने-अपने विषयों की परीक्षा तो उत्तीर्ण कर ली है लेकिन अनिवार्य क्वालीफाइंग विषय पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा में फंस गए। ज्यादातर छात्र इसमें अनुपस्थित रहे जबकि कुछ छात्रों के अंक 33 प्रतिशत से भी कम हैं। अब इन छात्रों को पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा फिर देनी होगी और कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे।
रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा में शामिल होना और न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाने अनिवार्य हैं। ज्यादातर छात्र इस पर ध्यान नहीं देते हैं, इसलिए या तो फेल हो जाते हैं या फिर परीक्षा ही नहीं देते हैं। नियम के मुताबिक बिना पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा पास किए किसी को डिग्री-मार्कशीट नहीं दी जाएगी। विवि प्रशासन जल्द शेड्यूल तैयार करके फिर इस परीक्षा का आयोजन करेगा ताकि इन छात्रों को मौका मिल सके।
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तीनों संकायों के छात्रों के लिए अनिवार्य
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पर्यावरण विज्ञान विषय को परिसर और संबद्ध 1100 से अधिक महाविद्यालयों में कला, विज्ञान, कॉमर्स संकायों के छात्रों के लिए अनिवार्य किया है। सभी छात्रों को स्नातक के तीन वर्ष की पढ़ाई के दौरान पर्यावरण विज्ञान विषय की परीक्षा देने के साथ उसे पास करना जरूरी होता है। इस विषय में 33 फीसदी से अधिक अंक लाने के बाद ही अभ्यर्थी को पास की डिग्री दी जाती है। हालांकि इसके अंक मार्कशीट में नहीं जोड़े जाते हैं।
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इन छात्रों ने अपने-अपने विषयों की परीक्षा तो उत्तीर्ण कर ली है लेकिन अनिवार्य क्वालीफाइंग विषय पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा में फंस गए। ज्यादातर छात्र इसमें अनुपस्थित रहे जबकि कुछ छात्रों के अंक 33 प्रतिशत से भी कम हैं। अब इन छात्रों को पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा फिर देनी होगी और कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे।
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रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा में शामिल होना और न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाने अनिवार्य हैं। ज्यादातर छात्र इस पर ध्यान नहीं देते हैं, इसलिए या तो फेल हो जाते हैं या फिर परीक्षा ही नहीं देते हैं। नियम के मुताबिक बिना पर्यावरण विज्ञान की परीक्षा पास किए किसी को डिग्री-मार्कशीट नहीं दी जाएगी। विवि प्रशासन जल्द शेड्यूल तैयार करके फिर इस परीक्षा का आयोजन करेगा ताकि इन छात्रों को मौका मिल सके।
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तीनों संकायों के छात्रों के लिए अनिवार्य
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पर्यावरण विज्ञान विषय को परिसर और संबद्ध 1100 से अधिक महाविद्यालयों में कला, विज्ञान, कॉमर्स संकायों के छात्रों के लिए अनिवार्य किया है। सभी छात्रों को स्नातक के तीन वर्ष की पढ़ाई के दौरान पर्यावरण विज्ञान विषय की परीक्षा देने के साथ उसे पास करना जरूरी होता है। इस विषय में 33 फीसदी से अधिक अंक लाने के बाद ही अभ्यर्थी को पास की डिग्री दी जाती है। हालांकि इसके अंक मार्कशीट में नहीं जोड़े जाते हैं।