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16 साल के यश ने 22 दिन में लिख डाला उपन्यास, नाम है 'सेलिब्रेशन इन ट्रिब्यूलेशन'
आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 03 Jul 2018 10:11 AM IST
सार
- 12वीं के छात्र यश तिवारी के उपन्यास ‘ए सेलिब्रेशन इन ट्रिब्यूलेशन’ की चार दिन में बिकीं 50 प्रतियां
- दुर्लभ बीमारी से मौत की ओर बढ़ रही एक युवती की कहानी पर आधारित है यह नॉवेल
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12वीं के छात्र यश तिवारी के उपन्यास ‘ए सेलिब्रेशन इन ट्रिब्यूलेशन’ की चार दिन में बिकीं 50 प्रतियां
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विस्तार
क्रूजफेल्ट जैकब डिसीज। मांसपेशियों से संबंधित ऐसी गंभीर बीमारी, जिसमें छह से आठ महीने में पीड़ित की मौत हो जाती है। इस गंभीर बीमारी ने 16 साल के कानपुर के यश तिवारी को ऐसा झकझोरा कि उन्होंने ए सेलिब्रेशन इन ट्रिब्यूलेशन (कष्ट में उत्सव) नाम का उपन्यास ही लिख डाला। इस उपन्यास के माध्यम से यश ने मैसेज दिया है कि जितनी भी जिंदगी है, उसे उल्लास के साथ जियो। यश ने यह उपन्यास गर्मी की छुट्टियों का सदुपयोग करते हुए महज 22 दिन में लिख डाला। 29 जून को बाजार में आए उपन्यास की 50 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। देश भर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी मिल रही हैं।
कानपुर के हर्ष नगर निवासी और यूनाइटेड पब्लिक स्कूल के छात्र यश की निरंतर कुछ नया करने-खोजने की आदत ने महज 16 वर्ष की उम्र में उपन्यासकारों की सूची में शामिल करा दिया है। गर्मियों की छुट्टी के दौरान जिज्ञासावश उन्होंने इंटरनेट पर ऐसी बीमारियों के बारे में जानकारी जुटाई, जिनका इलाज अभी तक दुनिया भर में उपलब्ध नहीं है। इसी दौरान उन्हें क्रूजफेल्ट जैकब डिसीज (सीजेडी) के बारे में पता चला। मांसपेशियों से संबंधित इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। बीमारी के लक्षण के दिखने से छह से आठ माह में व्यक्ति की मौत हो जाती है। सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत लोग ही डेढ़ से दो वर्ष तक जीवित रहते हैं। इस बीमारी ने ही यश को उपन्यास लिखने की प्रेरणा दी।
यश ने बताया कि इस बीमारी ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया कि जिस व्यक्ति को यह पता हो कि उसकी मौत कुछ ही दिनों में हो जानी है, तो उस पर या उसके परिजनों पर क्या बीतती होगी। यह उपन्यास ऐसे ही लोगों को बची जिंदगी हंसीखुशी के साथ बिताने की राह दिखाता है। यश ने स्क्रिप्ट लिखने के बाद कोलकाता के पब्लिशिंग हाउस से संपर्क किया तो वे फौरन इसे प्रकाशित करने पर राजी हो गए। करीब एक महीने में नॉवेल बाजार में आ गया।
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कानपुर के हर्ष नगर निवासी और यूनाइटेड पब्लिक स्कूल के छात्र यश की निरंतर कुछ नया करने-खोजने की आदत ने महज 16 वर्ष की उम्र में उपन्यासकारों की सूची में शामिल करा दिया है। गर्मियों की छुट्टी के दौरान जिज्ञासावश उन्होंने इंटरनेट पर ऐसी बीमारियों के बारे में जानकारी जुटाई, जिनका इलाज अभी तक दुनिया भर में उपलब्ध नहीं है। इसी दौरान उन्हें क्रूजफेल्ट जैकब डिसीज (सीजेडी) के बारे में पता चला। मांसपेशियों से संबंधित इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। बीमारी के लक्षण के दिखने से छह से आठ माह में व्यक्ति की मौत हो जाती है। सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत लोग ही डेढ़ से दो वर्ष तक जीवित रहते हैं। इस बीमारी ने ही यश को उपन्यास लिखने की प्रेरणा दी।
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यश ने बताया कि इस बीमारी ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया कि जिस व्यक्ति को यह पता हो कि उसकी मौत कुछ ही दिनों में हो जानी है, तो उस पर या उसके परिजनों पर क्या बीतती होगी। यह उपन्यास ऐसे ही लोगों को बची जिंदगी हंसीखुशी के साथ बिताने की राह दिखाता है। यश ने स्क्रिप्ट लिखने के बाद कोलकाता के पब्लिशिंग हाउस से संपर्क किया तो वे फौरन इसे प्रकाशित करने पर राजी हो गए। करीब एक महीने में नॉवेल बाजार में आ गया।
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यश का प्रोफाइल
दुर्लभ बीमारी से मौत की ओर बढ़ रही एक युवती की कहानी पर आधारित है यह नॉवेल
नाम : यश तिवारी
पिता : सुनील तिवारी, व्यवसायी
मां : प्रियदर्शिनी तिवारी, गृहिणी
यश इससे पूर्व दो अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में रिसर्च पेपर प्रस्तुत कर चुके हैं। यश जनसंचार के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं। यश पेंसिल स्केच बनाने में भी निपुण हैं। इस किताब का कवर पेज उन्होंने खुद डिजाइन किया है।
पिता : सुनील तिवारी, व्यवसायी
मां : प्रियदर्शिनी तिवारी, गृहिणी
यश इससे पूर्व दो अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में रिसर्च पेपर प्रस्तुत कर चुके हैं। यश जनसंचार के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं। यश पेंसिल स्केच बनाने में भी निपुण हैं। इस किताब का कवर पेज उन्होंने खुद डिजाइन किया है।
मुश्किलों में भी ‘आनंद’
यश तिवारी का नॉवेल
यश की किताब पाठकों को राजेश खन्ना स्टारर फिल्म आनंद की याद दिलाती है। किताब की मुख्य पात्र 14 वर्षीय इल्मा जैदी नामक लड़की है। बेहद खुशमिजाज और जिंदादिल इल्मा को संगीत से बेहद लगाव है। 15वें जन्मदिन पर अचानक इल्मा को इस बीमारी का पता चलता है। इसके बाद पूरे जैदी परिवार की जिंदगी बदल जाती है। इल्मा और जैदी परिवार की जिजीविषा को यश ने बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है। यश ने लाइलाज बीमारी से लड़ने में परिवार के सदस्यों और जानकारों के सकारात्मक सहयोग के महत्व को वर्णित किया है। 24बाई7 पब्लिशिंग कोलकाता से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित इस किताब का मूल्य 180 रुपये है।
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