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NEET 2019: पिता ने प्रदेश में 400 तो बेटे ने देश में हासिल की 443वीं रैंक, पढ़िए सफलता की कहानी
Thu, 06 Jun 2019 05:03 PM IST
शिखा पांडेय
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 06 Jun 2019 05:03 PM IST
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माता-पिता और बहन के साथ मधुर कटियार
- फोटो : अमर उजाला
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नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) 2019 में कानपुर में चौथा स्थान हासिल करने वाले मधुर कटियार के पिता अवधेश कटियार भी डॉक्टर हैं। डॉ. अवधेश ने एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 1991 में यूपीसीपीएमटी की परीक्षा दी थी। तब उनकी प्रदेश में 400वीं रैंक थी। झांसी से एमबीबीएस की पढ़ाई की। अब 28 साल बाद बेटे मधुर ने पूरे देश में 443वीं रैंक हासिल कर पिता का नाम रोशन कर दिया।
मधुर की ओबीसी कैटैगिरी में 93वीं रैंक है। पिता डॉ. अवधेश अकबरपुर के जिला चिकित्सालय में फिजिशियन के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और मां नीलम कटियार गृहिणी हैं। छोटी बहन गौरी अभी 11वीं में है और साथ में मेडिकल की तैयारी भी कर रही है। बड़े पापा जीसी कटियार उप कृषि निदेशक पद पर झांसी में तैनात हैं। मधुर अपने परिवार संग यहां विनायकपुर में रहते हैं।
बचपन से ही था डॉक्टर बनने का शौक, खुद पढ़ने बैठ जाते
डॉ. अवधेश बताते हैं कि उनके बेटे का बचपन से ही डॉक्टर बनने का शौक था। इसके लिए वह हमेशा गंभीर रहा। कभी उसे पढ़ने के लिए नहीं कहना पड़ा। एकाग्र होकर हमेशा पढ़ाई पर फोकस किया। फेसबुक पर आज तक अकाउंट नहीं बनाया। मोबाइल भी सामान्य ही प्रयोग करते हैं। मधुर बताते हैं कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ गंभीर बीमारियों पर शोध भी करेंगे।
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मधुर की ओबीसी कैटैगिरी में 93वीं रैंक है। पिता डॉ. अवधेश अकबरपुर के जिला चिकित्सालय में फिजिशियन के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और मां नीलम कटियार गृहिणी हैं। छोटी बहन गौरी अभी 11वीं में है और साथ में मेडिकल की तैयारी भी कर रही है। बड़े पापा जीसी कटियार उप कृषि निदेशक पद पर झांसी में तैनात हैं। मधुर अपने परिवार संग यहां विनायकपुर में रहते हैं।
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बचपन से ही था डॉक्टर बनने का शौक, खुद पढ़ने बैठ जाते
डॉ. अवधेश बताते हैं कि उनके बेटे का बचपन से ही डॉक्टर बनने का शौक था। इसके लिए वह हमेशा गंभीर रहा। कभी उसे पढ़ने के लिए नहीं कहना पड़ा। एकाग्र होकर हमेशा पढ़ाई पर फोकस किया। फेसबुक पर आज तक अकाउंट नहीं बनाया। मोबाइल भी सामान्य ही प्रयोग करते हैं। मधुर बताते हैं कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ गंभीर बीमारियों पर शोध भी करेंगे।
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