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एआईटीएच: दिव्यांग छात्रों को ट्रेनिंग में मिला 3.60 लाख का पैकेज, पढ़िए इनके बुलंद हौसलों की कहानी

Fri, 05 Jul 2019 01:49 PM IST
शिखा पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 05 Jul 2019 01:49 PM IST
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students of Dr. Ambedkar Institute of Technology for Handicapped got 3.60 lakhs Package
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
देखना है हौसला मेरा और नापना है मेरी उड़ान को तो जाओ और ऊंचा कर दो आसमान को...। यह पंक्तियां कानपुर स्थित आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैंडीकैप्ड के छात्रों पर सटीक बैठती हैं। प्लेसमेंट ड्राइव में सफल होने वाले चार छात्रों ने साबित कर दिया कि सफलता परिस्थितियों की मोहताज नहीं। फोटोशॉप की बड़ी कंपनी एडॉब ने चार छात्रों को 3.60 लाख के पैकेज पर छह महीने की ट्रेनिंग पर नियुक्त किया है।
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इसके बाद जब छात्रा स्थाई होंगे तो उनको 10 लाख रुपये का पैकेज मिलेगा। कंप्यूटर साइंस की डिप्लोमा ब्रांच की गीतिका बाजपेई, पिंकी पटेल का चयन किया है। बीटेक कंप्यूटर साइंस के छात्र अनुभव राजपूत और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र अभिषेक साहू को जॉब ऑफर की गई है। प्लेसमेंट ऑफिसर अनिल अग्रवाल ने बताया कि निदेशक प्रो. रचना अस्थाना के निर्देशन पर इस बार संस्थान में पहली बार एडॉब कंपनी आई है।
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सपना सच हुआ
बचपन में बुखार आने पर लगे गलत इंजेक्शन ने अनुभव राजपूत का एक पैर खराब कर दिया था, अनुभव कहते हैं कि तब कभी नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी कंपनी में चयन हो जाएगा। अनुभव के पिता श्याम सिंह प्राइवेट कर्मी और मां ऊषा होम मेकर हैं। पनकी रतनपुर निवासी अनुभव कहते हैं कि इस नौकरी से अब दिक्कतें दूर हो जाएंगी। एडॉब में चयन होने की खुशी को बयां नहीं किया जा सकता। 

पैर खराब, हौसला बुलंद
दामोदर नगर निवासी गीतिका बाजपेयी के दोनों पैर खराब हैं, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा। एलएन बाजपेयी और कृष्णा बाजपेयी की बेटी गीतिका कहती हैं कि एडॉब आईआईटी पासआउट बच्चों का ही चयन करती हैं। उसमें मेरा चयन होना गर्व की अनुभूति दे रहा है। गीतिका कहती हैं कि हौसला नहीं हारा, पैर खराब हैं, लेकिन व्हीलचेयर का सहारा नहीं लिया। स्कूटी चलाती हूं। मेहनत से कभी जी नहीं चुराया।
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