{"_id":"5d2d5c488ebc3e6cfc5d76eb","slug":"no-engineering-college-teacher-will-get-promotion-without-the-online-course","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अब ऑनलाइन कोर्स किए बिना किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक को नहीं मिलेगा प्रमोशन","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
अब ऑनलाइन कोर्स किए बिना किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक को नहीं मिलेगा प्रमोशन
Tue, 16 Jul 2019 10:46 AM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 16 Jul 2019 10:46 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू), एकेटीयू सहित देश के सभी तकनीकी शिक्षा के विश्वविद्यालयों, संस्थानों के प्रोफेसरों को अब पढ़ाने के साथ खुद को अपडेट रखना होगा। मैसिव ऑनलाइन कोर्स (मूक) के जरिए टीचर्स ट्रेनिंग किए बगैर शिक्षकों का प्रमोशन नहीं होगा।
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) ने इसे चालू सत्र से सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य कर दिया है। नई नियुक्ति वाले प्रोफेसरों जब तक ऑनलाइन कोर्स के आठ मॉड्यूल पूरा करने का सर्टिफिकेट नहीं हासिल कर लेंगे, उनका प्रोबेशन पीरियड खत्म नहीं होगा। काउंसिल का नया गजट एचबीटीयू को भी मिल गया है। एचबीटीयू के रजिस्ट्रार प्रो. मनोज शुक्ला ने बताया कि काउंसिल के सभी आदेश को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विज्ञापन
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) ने इसे चालू सत्र से सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य कर दिया है। नई नियुक्ति वाले प्रोफेसरों जब तक ऑनलाइन कोर्स के आठ मॉड्यूल पूरा करने का सर्टिफिकेट नहीं हासिल कर लेंगे, उनका प्रोबेशन पीरियड खत्म नहीं होगा। काउंसिल का नया गजट एचबीटीयू को भी मिल गया है। एचबीटीयू के रजिस्ट्रार प्रो. मनोज शुक्ला ने बताया कि काउंसिल के सभी आदेश को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विज्ञापन
प्रमोशन के हर स्तर पर रिसर्च पब्लिकेशन जरूरी
अभी तक इंजीनियरिंग संस्थानों में केवल अनुभव के आधार पर प्रमोशन दिया जाता था। अब शिक्षकों को तभी प्रमोशन और वेतन में बढ़ोतरी दी जाएगी, जब वह खुद के कामकाज का ब्योरा देंगे। मसलन असिस्टेंट प्रोफेसर में सीनियर पे स्केल पाने के लिए चार वर्ष का अनुभव रखने वालों को दो रिसर्च पब्लिकेशन, छात्रों के फीडबैक के अनुसार कम से कम आठ से दस अंक लाने होंगे। इसी तरह प्रोफेसर के लिए न्यूनतम छह रिसर्च पेपर मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित जनरल में प्रकाशित होने की अनिवार्य है।
निदेशक, प्राचार्य बनना भी हुआ कठिन
इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों, संस्थानों में कुलपति, प्राचार्य और निदेशक बनना भी अब कठिन हो गया है। इन पदों के लिए अब वही अर्ह होंगे जिन्होंने कम से कम दो छात्रों को अपने अंडर में पीएचडी कराई हो, कम से कम आठ रिसर्च पेपर एससीआई जनरल/यूजीसी और एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त जनरल में प्रकाशित हुए हों। साथ ही कम से कम 15 साल का शिक्षण, रिसर्च इंडस्ट्री का अनुभव हो। इसमें कम से कम तीन वर्ष बतौर प्रोफेसर कार्यरत होना चाहिए।
अभी तक इंजीनियरिंग संस्थानों में केवल अनुभव के आधार पर प्रमोशन दिया जाता था। अब शिक्षकों को तभी प्रमोशन और वेतन में बढ़ोतरी दी जाएगी, जब वह खुद के कामकाज का ब्योरा देंगे। मसलन असिस्टेंट प्रोफेसर में सीनियर पे स्केल पाने के लिए चार वर्ष का अनुभव रखने वालों को दो रिसर्च पब्लिकेशन, छात्रों के फीडबैक के अनुसार कम से कम आठ से दस अंक लाने होंगे। इसी तरह प्रोफेसर के लिए न्यूनतम छह रिसर्च पेपर मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित जनरल में प्रकाशित होने की अनिवार्य है।
निदेशक, प्राचार्य बनना भी हुआ कठिन
इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों, संस्थानों में कुलपति, प्राचार्य और निदेशक बनना भी अब कठिन हो गया है। इन पदों के लिए अब वही अर्ह होंगे जिन्होंने कम से कम दो छात्रों को अपने अंडर में पीएचडी कराई हो, कम से कम आठ रिसर्च पेपर एससीआई जनरल/यूजीसी और एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त जनरल में प्रकाशित हुए हों। साथ ही कम से कम 15 साल का शिक्षण, रिसर्च इंडस्ट्री का अनुभव हो। इसमें कम से कम तीन वर्ष बतौर प्रोफेसर कार्यरत होना चाहिए।