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यूपी कैटेट: कृषि के छात्र हाशिए पर, बायो और मैथ के छात्रों का जलवा
Wed, 05 Jun 2019 03:47 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 05 Jun 2019 03:47 PM IST
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उत्तर प्रदेश कंबाइंड एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी एंट्रेंस टेस्ट (यूपीकैटेट) 2019 के परिणाम में कृषि विषय से 12वीं करने वाले छात्र हाशिए पर पहुंच गए हैं। जबकि बायोलॉजी और मैथ के छात्रों ने दबदबा कायम कर लिया है। कृषि विषय से 12वीं करने वाले करीब 90 फीसद छात्रों को कृषि विश्वविद्यालयों में दाखिला मिलने की संभावना नहीं है।
कृषि के छात्रों की स्थिति का अंदाजा उनकी कंबाइंड रैंक से लगाया जा सकता है। यूपीकैटेट स्नातक में एग्रीकल्चर वर्ग के प्रदेश टॉपर आदर्श प्रताप की कंबाइंड रैंक 494 है। मतलब आदर्श बायोलॉजी और मैथ्स ग्रुप के 493 बच्चों से पीछे हैं। इसी तरह एग्रीकल्चर के सेकेंड टॉपर सुमित पटेल की कंबाइंड रैंक 498 है। टॉप रैंकर्स में सबसे ज्यादा बायोलॉजी वर्ग के छात्र हैं।
इसके बाद मैथ के छात्रों ने अपनी जगह बनाई है। सबसे अंतिम पायदान पर कृषि के छात्र हैं। यूपीकैटेट के विशेषज्ञ और तिवारी एग्रीकल्चर एकेडमी के निदेशक संजीव तिवारी बताते हैं कि 12वीं एग्रीकल्चर विषय से पढ़ाई करने वाले इन टॉपर्स का एडमिशन भी कंबाइंड रैंक के जरिये बहुत मुश्किल से होगा। बता दें कि कंबाइंड रैंक के जरिये ही छात्रों को प्रदेश के चारों कृषि विवि में प्रवेश मिलता है।
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कृषि के छात्रों की स्थिति का अंदाजा उनकी कंबाइंड रैंक से लगाया जा सकता है। यूपीकैटेट स्नातक में एग्रीकल्चर वर्ग के प्रदेश टॉपर आदर्श प्रताप की कंबाइंड रैंक 494 है। मतलब आदर्श बायोलॉजी और मैथ्स ग्रुप के 493 बच्चों से पीछे हैं। इसी तरह एग्रीकल्चर के सेकेंड टॉपर सुमित पटेल की कंबाइंड रैंक 498 है। टॉप रैंकर्स में सबसे ज्यादा बायोलॉजी वर्ग के छात्र हैं।
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इसके बाद मैथ के छात्रों ने अपनी जगह बनाई है। सबसे अंतिम पायदान पर कृषि के छात्र हैं। यूपीकैटेट के विशेषज्ञ और तिवारी एग्रीकल्चर एकेडमी के निदेशक संजीव तिवारी बताते हैं कि 12वीं एग्रीकल्चर विषय से पढ़ाई करने वाले इन टॉपर्स का एडमिशन भी कंबाइंड रैंक के जरिये बहुत मुश्किल से होगा। बता दें कि कंबाइंड रैंक के जरिये ही छात्रों को प्रदेश के चारों कृषि विवि में प्रवेश मिलता है।
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सबसे खराब नियम यूपी में, हर वर्ग के लिए सीटें हो तय
संजीव बताते हैं कि कृषि विश्वविद्यालयों में दाखिले का सबसे खराब नियम उत्तर प्रदेश में ही है। यही कारण है कि यहां के कृषि के छात्रों का शैक्षिक स्तर दिनोंदिन खराब होता जा रहा है। संजीव के मुताबिक अन्य प्रदेशों में तीनों कैटेगरी में दाखिले के लिए सीटें निर्धारित हैं। मतलब पहले ही साफ हो जाता है कि बायोलॉजी वर्ग के कितने छात्रों को दाखिला दिया जाएगा और कितने कृषि या मैथ वर्ग के छात्रों को। जबकि यहां ऐसा कोई नियम नहीं है। सबको मिलाकर एडमिशन दिया जाता है। इसके चलते उन छात्रों की अधिकता हो जाती है जो अच्छे स्कूलों से बायोलॉजी व मैथ की पढ़ाई करते हैं जबकि गांव के किसान, गरीब के घर से निकलकर कृषि की पढ़ाई करने वाले छात्र पीछे रह जाते हैं।
परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम तक नहीं देते
यूपीकैटेट की परीक्षा देने वाले छात्र अरविंद वर्मा कहते हैं कि अन्य प्रदेशों में होने वाली प्रवेश परीक्षा से पहले छात्रों को प्रश्नपत्र के लिए पाठ्यक्रम, पेपर फार्मेट उपलब्ध कराया जाता है। परीक्षा के दिन छात्र अपनी ओएमआर शीट की कार्बन प्रति घर ले जा सकते हैं लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं होता। शिवेंद्र कहते हैं कि यूपीकैटेट की पूरी प्रक्रिया में ही धांधली होती है। यहां पारदर्शिता की बेहद कमी है। उत्तर पुस्तिका में कोई भी मूल्यांकन करने वाली एजेंसी की मिलीभगत से हेरफेर कर सकता है। छात्रों ने कहा कि इसमें पारदर्शिता आनी चाहिए।
संजीव बताते हैं कि कृषि विश्वविद्यालयों में दाखिले का सबसे खराब नियम उत्तर प्रदेश में ही है। यही कारण है कि यहां के कृषि के छात्रों का शैक्षिक स्तर दिनोंदिन खराब होता जा रहा है। संजीव के मुताबिक अन्य प्रदेशों में तीनों कैटेगरी में दाखिले के लिए सीटें निर्धारित हैं। मतलब पहले ही साफ हो जाता है कि बायोलॉजी वर्ग के कितने छात्रों को दाखिला दिया जाएगा और कितने कृषि या मैथ वर्ग के छात्रों को। जबकि यहां ऐसा कोई नियम नहीं है। सबको मिलाकर एडमिशन दिया जाता है। इसके चलते उन छात्रों की अधिकता हो जाती है जो अच्छे स्कूलों से बायोलॉजी व मैथ की पढ़ाई करते हैं जबकि गांव के किसान, गरीब के घर से निकलकर कृषि की पढ़ाई करने वाले छात्र पीछे रह जाते हैं।
परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम तक नहीं देते
यूपीकैटेट की परीक्षा देने वाले छात्र अरविंद वर्मा कहते हैं कि अन्य प्रदेशों में होने वाली प्रवेश परीक्षा से पहले छात्रों को प्रश्नपत्र के लिए पाठ्यक्रम, पेपर फार्मेट उपलब्ध कराया जाता है। परीक्षा के दिन छात्र अपनी ओएमआर शीट की कार्बन प्रति घर ले जा सकते हैं लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं होता। शिवेंद्र कहते हैं कि यूपीकैटेट की पूरी प्रक्रिया में ही धांधली होती है। यहां पारदर्शिता की बेहद कमी है। उत्तर पुस्तिका में कोई भी मूल्यांकन करने वाली एजेंसी की मिलीभगत से हेरफेर कर सकता है। छात्रों ने कहा कि इसमें पारदर्शिता आनी चाहिए।