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संसार में कोई भी वस्तु बेकार नहीं होती: वीसी
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में घरेलू निष्प्रोज्य वस्तुओं के पुन: उपयोग के उद्देश्य से ‘बेकार को आकार’ कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा कि निष्प्रोज्य वस्तुओं के पुनर्निर्माण में हमें सजीवता दिखाई देती है। इसमें कलाकार की कल्पनाशीलता का विकास होता है। संसार में कोई भी वस्तु बेकार नहीं होती। हमें उन्हें सहेजना और पुन: उपयोग करना आना चाहिए।
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प्रो. सीबी सिंह ने कहा कि कुछ दशकों पहले घरों में रद्दी को गलाकर उनसे सुंदर घरेलू उपयोग की वस्तुओं का निर्माण होता था। आज आवश्यकता इस बात की है कि घरेलू कचरा व अनुपयोगी वस्तुओं के प्रयोग के जरिए हम स्वयं के प्रयोग की वस्तुओं का निर्माण कर सकते हैं। प्रो. सुनील काबिया ने कहा कि यदि हम अपनी कलात्मक सोच का प्रयोग करें तो कबाड़ की चीजों को भी आकर्षण रूप देकर घर की सजावट में प्रयोग कर सकते हैं। प्रशिक्षक नीलम सारंगी ने कहा कि आधुनिक समय की भयानक समस्याओं में कचरा निपटान बड़ी वैश्विक समस्या है। संचालन डॉ. मो. नईम ने किया। आभार डॉ. सुनीता ने जताया। इस दौरान डॉ. अंजलि सक्सेना, डॉ. अजय कुमार गुप्ता, डॉ. बृजेश कुमार सिंह, डॉ. दिलीप कुमार, हेमंत चंद्रा, डॉ. उपेंद्र तोमर,
डॉ. कौशल त्रिपाठी मौजूद रहे।
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