{"_id":"62670699e19f500e16149df7","slug":"jhansi1650919065","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति सीखेंगे बीयू और रूस के छात्र","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति सीखेंगे बीयू और रूस के छात्र
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। भारत और रूस एक-दूसरे के बहुत अच्छे मित्र हैं। अब दोनों देशों की भाषा और संस्कृति सीखने के लिए बुंदेलखंड से पहले हुई है। इसके लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और सेंट पीटर्सबर्ग एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन के बीच एक करार हुआ है। दोनों संस्थानों के छात्र एक-दूसरे के देशों का भ्रमण करेंगे। रूस के विद्यार्थियों को भारतीय जीवन दर्शन को भी सीखने का मौका मिलेगा।
विज्ञापन
रूस समेत कई देशों में विदेशी भाषा और संस्कृति सीखने के लिए स्नातक स्तर पर छह क्रेडिट मिलते हैं। इसी के तहत रूस की सेंट पीटर्सबर्ग एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन ने बीयू के साथ मिलकर अपने यहां के छात्रों को हिंदी सिखाने के लिए एमओयू साइन कर लिया है।
विभाग के सह आचार्य डॉ. मुन्ना तिवारी ने बताया कि फरवरी 2020 में रूस के छात्र विशेष अनुमति लेकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय आए थे। यहां 21 दिन की कार्यशाला हुई। उन्हें भारतीय खानपान, भारतीय जीवन दर्शन और हिंदी भाषा के बारे में जानकारी दी गई। कई छात्रों ने
विज्ञापन
हिंदी बोलना भी शुरू कर दिया था। इस बार एसोसिएशन ने अनुबंध करके इसी साल नवंबर या दिसंबर में कार्यशाला कराने का फैसला लिया है। बीयू के छात्र भी रूस जाकर वहां की भाषा और संस्कृति सीख सकेंगे। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास होगा कि यहां के बच्चे भी अंतरराष्ट्रीय भाषा सीखें और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ें। इससे न सिर्फ बुंदेलखंड क्षेत्र के विद्यार्थी रूस की संस्कृति और सभ्यता से परिचित होंगे, बल्कि बुंदेली संस्कृति को भी एक वैश्विक आयाम मिलेगा। कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि भाषा के विकास और उसकी
समृद्धि के लिए यह सहमति हुई है। उन्होंने रहा कि भाषाई आदान-प्रदान सांस्कृतिक विकास के
लिए बहुत जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन