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‘सर्व शिक्षा अभियान महाघोटाला योजना’
Updated Sun, 06 Mar 2016 11:18 PM IST
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प्रेस से बात करते शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर आए शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने सर्व शिक्षा अभियान पर तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान शिक्षा विभाग की महाघोटाला योजना है। कहा कि इसमें ट्रेनिंग के नाम पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक व बेसिक शिक्षा अधिकारी मोटी रकम देकर नियुक्ति पा रहे हैं। उनसे कुछ भी उम्मीद रखना बेमानी है।
हालात तो यह हैं कि वह अब सरकार की भी नहीं सुन रहे। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की भी जरूरत है।
एक समारोह में आए शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने वित्तविहीन शिक्षक संघ के जिलाध्याक्ष पवन शर्मा के आवास पर प्रेस से बात की। उन्होंने कहा कि नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए
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व्यवस्था में परिवर्तन होना चाहिए। कहा कि डीआईओएस हो या बीएसए सब सेटिंग गेटिंग से पद पा रहे हैं। सिस्टम में भी भ्रष्टाचार फैल रहा है। यही वजह है कि अधिकारी सरकार के फरमान को भी तवज्जो नहीं देते। शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। उन्होंने प्रदेश के 240433 वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय के लिए सरकार के बजट देने के निर्णय की सराहना की।
कहा, शिक्षक नेता शिक्षा पर भी ध्यान दें। डीआईओएस कार्यालय में समय बर्बाद न करें। सर्व शिक्षा अभियान को महाघोटाला योजना बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें ट्रेनिंग एवं अन्य मदों पर कोरी आंकड़ेबाजी हो रही है। यह शिक्षा विभाग में महा घोटाला वाली योजना साबित हो रही है। कहा कि शिक्षक अपनी समस्याओं को उठाते हैं, उसी तरह से शिक्षा की गुणवत्ता और
शिक्षा में सुधार के लिए भी सरकार से मांग करेंगे। 86.4 फीसदी बच्चे वित्तविहीन स्कूल में शिक्षा ले रहे है जबकि 13.6 फीसदी सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्रपति व राज्यपाल से पुरस्कृत किए जाने में चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। इस मौके पर यज्ञदत्त त्रिपाठी, पवन शर्मा, सुनील पाठक सरावन, दीपक धर्मा, शरद पाठक आदि मौजूद रहे।
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हालात तो यह हैं कि वह अब सरकार की भी नहीं सुन रहे। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की भी जरूरत है।
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एक समारोह में आए शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने वित्तविहीन शिक्षक संघ के जिलाध्याक्ष पवन शर्मा के आवास पर प्रेस से बात की। उन्होंने कहा कि नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए
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व्यवस्था में परिवर्तन होना चाहिए। कहा कि डीआईओएस हो या बीएसए सब सेटिंग गेटिंग से पद पा रहे हैं। सिस्टम में भी भ्रष्टाचार फैल रहा है। यही वजह है कि अधिकारी सरकार के फरमान को भी तवज्जो नहीं देते। शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। उन्होंने प्रदेश के 240433 वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय के लिए सरकार के बजट देने के निर्णय की सराहना की।
कहा, शिक्षक नेता शिक्षा पर भी ध्यान दें। डीआईओएस कार्यालय में समय बर्बाद न करें। सर्व शिक्षा अभियान को महाघोटाला योजना बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें ट्रेनिंग एवं अन्य मदों पर कोरी आंकड़ेबाजी हो रही है। यह शिक्षा विभाग में महा घोटाला वाली योजना साबित हो रही है। कहा कि शिक्षक अपनी समस्याओं को उठाते हैं, उसी तरह से शिक्षा की गुणवत्ता और
शिक्षा में सुधार के लिए भी सरकार से मांग करेंगे। 86.4 फीसदी बच्चे वित्तविहीन स्कूल में शिक्षा ले रहे है जबकि 13.6 फीसदी सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्रपति व राज्यपाल से पुरस्कृत किए जाने में चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। इस मौके पर यज्ञदत्त त्रिपाठी, पवन शर्मा, सुनील पाठक सरावन, दीपक धर्मा, शरद पाठक आदि मौजूद रहे।