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किसान ने उन्नतशील बीजों से बदली अपनी तकदीर, कड़ी मेहनत के बाद खेत उगलने लगे अनाज

Sun, 29 Dec 2019 02:14 PM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Sun, 29 Dec 2019 02:14 PM IST
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good quality seeds helped Hamirpur farmers for better agriculture
सांकेतिक तस्वीर

पारंपरिक खेती से हटकर औंडे़रा गांव के किसान श्रीराम ने उन्नतशील बीजों का सहारा लिया। जिसके बाद उसके खेतों ने अनाज उगलना शुरू कर दिया। नए प्रयोग कर किसान ने सफलता की कहानी गढ़ी। जिसके लिए उसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्मोत्सव पर सम्मानित किया गया है।

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राठ ब्लाक के औंडे़रा गांव निवासी श्रीराम ने बताया कि उसके पास 25 बीघा भूमि है। जिस पर पारंपरिक खेती से परिवार का गुजारा नहीं हो रहा था। ऊपर से प्राकृतिक आपदाओं ने उसे तोड़कर रख दिया था। बताया कि कृषि विभाग से उसे उन्नतशील खेती की जानकारी मिली। कुछ नया करने की ललक में करीब पांच वर्ष पूर्व वह कानपुर के सीएसए कालेज गया।
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वहां से गेहूं की उन्नतशील प्रजाति का बीज लाकर अपने खेतों में बोया। बताया कि अच्छी पैदावार देख उसका हौसला बढ़ा। इस पर वह खेती में नए प्रयोग कर रहा है। बताया कि उसने पिछले साल गेहूं की 106 श्रीराम प्रजाति किस्म का बीज लाया था। बताया कि प्रति बीघा करीब 10 क्विंटल की पैदावार हुई है। वहीं प्रकाश प्रजाति का मटर एक बीघा में पांच क्विंटल तक की पैदावार हो जाती है।

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कड़ी मेहनत कर पहुंचा इस मुकाम पर
किसान के पास खुद का नलकूप नहीं है। कड़ी मेहनत के बलबूते सम्मान पाने के मुकाम तक पहुंचा है। उसने कहा प्राइवेट नलकूपों से पानी खरीदता है। धीरे धीरे आर्थिक स्थिति संभल रही है। पिछले साल ट्रैक्टर लिया है। जिससे उसकी खेती किसानी आसान हो गई है। आगे नलकूप बोर कराने का प्लान है। किसान ने कहा कि उसका पुत्र ओमप्रकाश उसके साथ खेती में हाथ बंटाता है। दूसरा पुत्र हरिश्चंद्र प्राइवेट नौकरी करता है।

खेती में नए प्रयोगों से बढ़ रहा उत्साह
श्रीराम बताते हैं कि गेहूं, चना, मटर, अरहर आदि फसलों के साथ ही वह धनियां की भी खेती करता हैं। खेतों की मेड़ पर नीबू, अमरूद, कटहल, आम जैसे फलदार पेड़ लगाकर अतिरिक्त आमदनी का साधन किए है। खेतों में सब्जी की फसल से साल भर का खर्च चल जाता था। किसान ने कहा कि खेत में बने कुएं का जलस्तर गिरने से पानी सूख गया। जिससे सब्जी के लिए पानी लेने में दिक्कत आ रही है।

भूजल संरक्षण व सिंचाई की नई तकनीक अपनाएं
हमीरपुर। भूजल संरक्षण व संवर्धन के लिए तकनीकी समन्वय समिति की बैठक जिलाधिकारी डा. ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने कलक्ट्रेट सभागार में ली। जिसमें बुंदेलखंड में भूजल संरक्षण, संवर्धन व सिंचाई की नई तकनीक को अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भूजल संरक्षण व संवर्धन के लिए सभी संबंधित विभाग वैज्ञानिक पद्धति की कार्य योजना तैयार करें। विभिन्न योजनाओं जैसे खेत तालाब योजना, लघु, मध्यम व गहरी बोरिंग योजना, चेकडैम निर्माण पर कार्यों में प्रसन्नता जताई। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रॉप मोर क्रॉप के तहत वर्षा जल संचयन, संरक्षण व संवर्धन के लिए खेत तालाब, चेकडैम तथा ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति उपयोगी बताया।

खेत तालाब योजना तथा भू जल संरक्षण से संबंधित योजनाओं का लाभ लेने के लिए कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीयन कराने के लिए किसानों से कहा। कम पानी में पैदा होने वाली दलहन, तिलहन फसलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। इस अवसर पर उप निदेशक कृषि जेएम श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई, जिला कृषि अधिकारी डा. सरस कुमार तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी उमेश उत्तम, भूमि संरक्षण अधिकारी, वन विभाग के अधिकारी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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