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मेडिकल कॉलेज में इलाज अाैर पढ़ाई से हो रहा खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 09 Mar 2016 07:15 PM IST
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मेडिकल कॉलेज
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एमबीबीएस की 100 सीटों के मानक को पूरा करने के लिए मेडिकल कॉलेज मरीजों के इलाज और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई से खिलवाड़ कर रहा है।
मानक की पूर्ति के लिए कॉलेज के त्वचा रोग विभाग में आनन-फानन में दो संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति कर तो दी गई लेकिन वे नियमित कॉलेज नहीं आ रहे। नतीजतन एक ओर जहां बेहतर इलाज की उम्मीद से आए मरीजों को जूनियर डॉक्टरों के परामर्श से संतोष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर एमबीबीएस के छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसे लेकर कॉलेज प्राचार्य का बयान मामले को और संदेहास्पद बना रहा है।
दरअसल पिछले दिनों 50 एमबीबीएस सीटों की मान्यता खत्म होने का संकट कॉलेज प्रशासन के सामने खड़ा हुआ तो कई विभागों में शिक्षकों का मानक पूरा करने के लिए जल्दी-जल्दी नियुक्ति की गई। इसी क्रम में त्वचा रोग विभाग में डॉ. अश्वनी अग्रवाल और डॉ. गौरव मुखीजा की संविदा पर नियुक्ति की गई। दोनों ही डॉक्टरों की नियुक्ति महज कागजी साबित हो रही है। दोनों डॉक्टर नियमित कॉलेज तो नहीं ही आ रहे हैं, साथ ही कॉलेज के समय में प्राइवेट प्रेक्टिस भी कर रहे हैं जो नियम विरुद्ध है।
ऐसी भी शिकायत सामने आई है कि ये डॉक्टर जिस दिन कॉलेज में आ रहे हैं, उस दिन पिछले दिनों की छूटी हाजिरी को भी भर दे रहे हैं। इसे लेकर जब पिछले दिनों विभाग में विवाद की स्थिति बनती दिखी तो कॉलेज प्राचार्य ने विभाग का उपस्थिति रजिस्टर ही प्राचार्य कक्ष में मंगवा लिया ताकि उपस्थिति को लेकर कोई चर्चा नहीं हो सके।
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त्वचा रोग विभाग के दोनों ही असिस्टेंट प्रोफेसर छुट्टी पर हैं और छुट्टी देना मेरा प्रशासनिक अधिकार है। इसमें किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिए। जहां तक उपस्थिति रजिस्टर का मामला है तो उसे मैंने अपने अधिकार से प्राचार्य कक्ष में मंगाया है।
- प्रो. राजीव कुमार मिश्र, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मानक की पूर्ति के लिए कॉलेज के त्वचा रोग विभाग में आनन-फानन में दो संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति कर तो दी गई लेकिन वे नियमित कॉलेज नहीं आ रहे। नतीजतन एक ओर जहां बेहतर इलाज की उम्मीद से आए मरीजों को जूनियर डॉक्टरों के परामर्श से संतोष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर एमबीबीएस के छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसे लेकर कॉलेज प्राचार्य का बयान मामले को और संदेहास्पद बना रहा है।
दरअसल पिछले दिनों 50 एमबीबीएस सीटों की मान्यता खत्म होने का संकट कॉलेज प्रशासन के सामने खड़ा हुआ तो कई विभागों में शिक्षकों का मानक पूरा करने के लिए जल्दी-जल्दी नियुक्ति की गई। इसी क्रम में त्वचा रोग विभाग में डॉ. अश्वनी अग्रवाल और डॉ. गौरव मुखीजा की संविदा पर नियुक्ति की गई। दोनों ही डॉक्टरों की नियुक्ति महज कागजी साबित हो रही है। दोनों डॉक्टर नियमित कॉलेज तो नहीं ही आ रहे हैं, साथ ही कॉलेज के समय में प्राइवेट प्रेक्टिस भी कर रहे हैं जो नियम विरुद्ध है।
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ऐसी भी शिकायत सामने आई है कि ये डॉक्टर जिस दिन कॉलेज में आ रहे हैं, उस दिन पिछले दिनों की छूटी हाजिरी को भी भर दे रहे हैं। इसे लेकर जब पिछले दिनों विभाग में विवाद की स्थिति बनती दिखी तो कॉलेज प्राचार्य ने विभाग का उपस्थिति रजिस्टर ही प्राचार्य कक्ष में मंगवा लिया ताकि उपस्थिति को लेकर कोई चर्चा नहीं हो सके।
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त्वचा रोग विभाग के दोनों ही असिस्टेंट प्रोफेसर छुट्टी पर हैं और छुट्टी देना मेरा प्रशासनिक अधिकार है। इसमें किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिए। जहां तक उपस्थिति रजिस्टर का मामला है तो उसे मैंने अपने अधिकार से प्राचार्य कक्ष में मंगाया है।
- प्रो. राजीव कुमार मिश्र, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज