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...तिरंगे में लिपटा मेरा है लाल आया
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 04 Mar 2016 09:49 PM IST
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उद्घाटन
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आज का युवा धार्मिक गीत-भजनों को भूलकर विदेशी पॉप संगीत सुनने में मस्त है। हालांकि धार्मिक भजन-कीर्तन से अच्छी प्रेरणा मिलती हैं। यह बात गांव रसूलाबाद में आयोजित जवाबी कीर्तन का फीता काटकर उद्घाटन करते हुए ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सत्यवीर यादव ने कही।
उन्होंने कहा कि अब लोग धार्मिक कार्यक्रमों में रुचि नहीं लेते हैं। कानपुर से आए गायक भूपेंद्र निडर ने गणेश वंदना करते हुए गाया ‘ये बाबाजी अब कैसे हैं बाबा जी, कलियुग में बाबाओं ने करी घपले बाजी।’ इस पर नारायण रंगीला वीके शर्मा ने जवाब दिया ‘होटलों में ऐसे करते ज्ञान के प्रदाता, फिल्मी गीतों पर नाच रहीं राधे माता’ और गाया ‘एक नारी व्रत धारण करिए, त्रेता के राजाराम की तरह, वर्ना काला मुंह हो जाए आशाराम की तरह।’
इसके बाद भूपेंद्र निडर ने गाया हैं ‘लक्ष्मण बड़े खतरनाक रे उनने कितनों के काटे कान नाक-रेÓ का जवाब नारायण रंगीला ने दिया Òवो वन में रहती थी दुखी, लखन के पास आयी अयोमुखी लक्ष्मण ने नाक कान काटे दर्दनाक रे’ और अंत में नारायण रंगीला ने गाया ‘तिरंगे में लिपटा मेरा लाल है आया, जिस कांधे पर मैने खिलाया आज उसी कांधे पर उसका जनाजा उठाया।’ अंत में निर्णायक कमेटी ने दोनों जवाबी कीर्तन कलाकारों को बराबर पुरस्कार देकर सम्मानित किया। अध्यक्षता डा. लक्ष्मीनारायण और संचालन प्रदीप कुमार ने किया।
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उन्होंने कहा कि अब लोग धार्मिक कार्यक्रमों में रुचि नहीं लेते हैं। कानपुर से आए गायक भूपेंद्र निडर ने गणेश वंदना करते हुए गाया ‘ये बाबाजी अब कैसे हैं बाबा जी, कलियुग में बाबाओं ने करी घपले बाजी।’ इस पर नारायण रंगीला वीके शर्मा ने जवाब दिया ‘होटलों में ऐसे करते ज्ञान के प्रदाता, फिल्मी गीतों पर नाच रहीं राधे माता’ और गाया ‘एक नारी व्रत धारण करिए, त्रेता के राजाराम की तरह, वर्ना काला मुंह हो जाए आशाराम की तरह।’
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इसके बाद भूपेंद्र निडर ने गाया हैं ‘लक्ष्मण बड़े खतरनाक रे उनने कितनों के काटे कान नाक-रेÓ का जवाब नारायण रंगीला ने दिया Òवो वन में रहती थी दुखी, लखन के पास आयी अयोमुखी लक्ष्मण ने नाक कान काटे दर्दनाक रे’ और अंत में नारायण रंगीला ने गाया ‘तिरंगे में लिपटा मेरा लाल है आया, जिस कांधे पर मैने खिलाया आज उसी कांधे पर उसका जनाजा उठाया।’ अंत में निर्णायक कमेटी ने दोनों जवाबी कीर्तन कलाकारों को बराबर पुरस्कार देकर सम्मानित किया। अध्यक्षता डा. लक्ष्मीनारायण और संचालन प्रदीप कुमार ने किया।
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