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मुख्यमंत्री के गढ़ में नहीं चला प्रधानमंत्री का जादू
चंद्रपाल सिंह सेंगर,फर्रुखाबाद
Updated Sun, 06 Mar 2016 11:56 PM IST
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चुनाव जीतने के बाद प्रमाण पत्र देते जिलाधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार को एमएलसी चुनाव की मतगणना में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू पूरी तरह बेअसर नजर आया। फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज और औरैया के मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी को पूरी तरह से नकार दिया। मतदाताओं ने पुष्पराज जैन को भारी मतों से विजयी बनाया।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया और इटावा से करीबी रिश्ता रहा है। यह चारों जिले सपा के मजबूत खंभे समझे जाते हैं। इन चारों स्तंभों को ढहाने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रदेश के दिग्गज नेताओं ने यहां आकर अपने प्रत्याशी अशोक चक को जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिए। तमाम प्रयास किए गए। साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाई गई।
केंद्र सरकार से पहल करके चुनाव के समय यहां अद्धसैनिक बल भी लगाया गया और मतदान केंद्रों पर पुलिस की भारी-भरकम व्यवस्था की गई। इसके बाद भी अखिलेश के गढ़ में नरेंद्र मोदी का जादू नहीं चल सका। नतीजतन भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार चक को 268 मत ही मिल सके। सपा ने चुनाव जीतने के लिए जो चक्रव्यूह रचना की थी। उसमें वह कामयाब भी हो गई और सपा प्रत्याशी पुष्पराज जैन को चारों जिलों से 3783 वोट मिले।
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इस तरह सपा प्रत्याशी ने 3515 मतों से भाजपा प्रत्याशी को पराजित कर शानदार जीत दर्ज कराई। भाजपा सांसद मुकेश राजपूत अपने प्रत्याशी की हार को पहले ही भांप चुके थे। इस वजह से वह दिल्ली से वोट डालने नहीं आए। समाजवादी पार्टी भी इस चुनाव में अंतर्कलह से जूझती रही। इसके बाद भी मतदाताओं ने मुख्यमंत्री से चले आ रहे करीबी रिश्तों को नजरंदाज नहीं किया।
जहां चारों जिलों में भाजपा को करारी हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं फर्रुखाबाद जिले के सभी ब्लाकों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी की शानदार जीत हुई। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव का कहना है कि यह चारों जिले सपा के मजबूत स्तंभ के रूप में आज से नहीं, बल्कि बहुत समय से जाने जाते हैं। यही वजह है कि फर्रुखाबाद जिले की सभी विधानसभा सीटों पर सपा का कब्जा है।
भाजपा के जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह अपने प्रत्याशी की हार को सत्तापक्ष पर चुनाव में निष्पक्षता न बरतने का आरोप लगाकर कहते हैं कि यह चुनाव सत्तापक्ष के होते हैं। इससे सांसद या विधायक के चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ता।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया और इटावा से करीबी रिश्ता रहा है। यह चारों जिले सपा के मजबूत खंभे समझे जाते हैं। इन चारों स्तंभों को ढहाने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रदेश के दिग्गज नेताओं ने यहां आकर अपने प्रत्याशी अशोक चक को जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिए। तमाम प्रयास किए गए। साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाई गई।
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केंद्र सरकार से पहल करके चुनाव के समय यहां अद्धसैनिक बल भी लगाया गया और मतदान केंद्रों पर पुलिस की भारी-भरकम व्यवस्था की गई। इसके बाद भी अखिलेश के गढ़ में नरेंद्र मोदी का जादू नहीं चल सका। नतीजतन भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार चक को 268 मत ही मिल सके। सपा ने चुनाव जीतने के लिए जो चक्रव्यूह रचना की थी। उसमें वह कामयाब भी हो गई और सपा प्रत्याशी पुष्पराज जैन को चारों जिलों से 3783 वोट मिले।
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इस तरह सपा प्रत्याशी ने 3515 मतों से भाजपा प्रत्याशी को पराजित कर शानदार जीत दर्ज कराई। भाजपा सांसद मुकेश राजपूत अपने प्रत्याशी की हार को पहले ही भांप चुके थे। इस वजह से वह दिल्ली से वोट डालने नहीं आए। समाजवादी पार्टी भी इस चुनाव में अंतर्कलह से जूझती रही। इसके बाद भी मतदाताओं ने मुख्यमंत्री से चले आ रहे करीबी रिश्तों को नजरंदाज नहीं किया।
जहां चारों जिलों में भाजपा को करारी हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं फर्रुखाबाद जिले के सभी ब्लाकों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी की शानदार जीत हुई। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव का कहना है कि यह चारों जिले सपा के मजबूत स्तंभ के रूप में आज से नहीं, बल्कि बहुत समय से जाने जाते हैं। यही वजह है कि फर्रुखाबाद जिले की सभी विधानसभा सीटों पर सपा का कब्जा है।
भाजपा के जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह अपने प्रत्याशी की हार को सत्तापक्ष पर चुनाव में निष्पक्षता न बरतने का आरोप लगाकर कहते हैं कि यह चुनाव सत्तापक्ष के होते हैं। इससे सांसद या विधायक के चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ता।