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सराफा व्यापारियों की हड़ताल से कारीगरों के चूल्हे ठंडे

Tue, 15 Mar 2016 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
अमर उजाला ब्यूरो इटावा Updated Tue, 15 Mar 2016 12:39 AM IST
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Bullion traders cold stove artisans strike
प्रदर्शन करते सराफा व्यवसाई - फोटो : अमर उजाला
एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के विरोध में सराफा कारोबारियों की हड़ताल के दस दिन से ज्यादा हो गए हैं। तकरीबन जिले भर की सराफा दुकानों पर ताले झूल रहे हैं। पर अभी तक सराफा व्यापारियों की मांग पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। इसके चलते हड़ताल अभी खत्म होने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। इस हड़ताल से सराफा व्यापार को तो तगड़ा झटका लगा है, साथ ही इस कारोबार से जुड़े रोज कमाने खाने वाले कारीगरों व अन्य लोगों के घरों के चूल्हे ठंडे होने लगे हैं। इनके सामने परिवार का पेट पालने की समस्या खड़ी हो गई है। हाल यहां तक पहुंच गए हैं कि सराफा दुकानों पर काम करने वाले कारीगर आदि उधार लेकर दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त कर रहे हैं।
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हड़ताल में सेठ के साथ होना मजबूरी है, नहीं तो जीवन भर का धंधा हाथ से जा सकता है। यहीं कारण है कि कारीगर सुबह हड़ताल में शामिल होकर नारेबाजी कर रहे हैं और इसके बाद कोई दूसरा काम कर गृहस्थी चलाने के लिए चार पैसे जुटा रहे हैं। कुछ तो मंडी में थोक में आलू खरीदकर फुटकर बेचकर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
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कोलकाता से दस साल पहले शहर में आकर सोने-चांदी के जेवर पर उजाला पालिस का काम करने वाले अकबर अली बताते हैं कि दस दिन से कामकाज न मिलने से जेब खाली हो चुकी है। संकट के समय के लिए की गई बचत के रुपये भी खर्च हो चुके हैं। अगर जल्द हड़ताल न खत्म हुई तो दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ जाएंगे।
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बारह वर्षों से शहर में सराफा व्यवसाय से जुड़कर अंगूठी बनाने का कार्य करने वाले कारीगर अजीत का कहना है कि वह प्रति दिन 300 से 400 रुपये कमा लेते थे। दस दिन से चल रही हड़ताल से जेब में एक पैसा भी नहीं आया। ऐसे में उन्होंने अपने सेठ से कुछ रुपये उधार लिए हैं, उसी से किसी तरह घर का खर्च चला रहे हैं। जल्द हड़ताल न खुली तो उन पर कर्ज चढ़ता ही जाएगा।


महाराष्ट्र से बचपन में ही शहर आकर रोजनदारी पर सोने चांदी का गलाई का कार्य करने वाले कारीगर आलोक का कहना है कि लंबी हड़ताल से परिवार का पेट भरने की समस्या खड़ी हो गई है। जमा पूंजी खर्च होने के बाद अब इधर-उधर से लेकर काम चल रहा है। अगर एक दो दिन में हड़ताल समाप्त नहीं हुई तो वह वापस महाराष्ट्र चले जाएंगे।



सरकार को जल्द ही इस मामले पर फैसला लेना चाहिए। सराफा व्यवसाय से जुड़कर सोने चांदी की खरीद कर छोटे व्यापारियों को फुटकर माल देकर घर चलाने वाले हरिओम ने बताया कि हड़ताल के चलते कई दिनाें से धंधा ठप होने से जेब पूरी तरह से खाली हो चुकी है। ऐसे में अब वह मंडी में थोक में आलू खरीदकर फुटकर बिक्री कर परिवार का पेट पाल रहे हैं।
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