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कोटेदारों ने डीएसओ को बताईं दिक्कतें
ब्यूरो अमर उजाला, बलिया
Updated Sat, 05 Mar 2016 09:57 PM IST
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कोटेदारों का सम्मेलन
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खाद्य सुरक्षा में व्याप्त गड़बड़ियाें पर टाउन हाल बापू भवन के सभागार में कोटेदारों की कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि जिलापूर्ति अधिकारी अनिल यादव ने कोटेदारों की विभिन्न समस्याओं को सुना और निराकरण के उपाय बताए। कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बने राशन कार्डों में आई गड़बड़ियाें को सुधारने के लिए कार्यवाही तेज कर दी गई है।
जिले कोटेदार संघ के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलापूर्ति अधिकारी अनिल यादव ने कहा कि कोटेदारों ने अपनी विभिन्न मांगों से अवगत कराया है। इसमें खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनाए गए राशन कार्डों की कमियों को बताया गया। उन्होंने एक-एक बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की। कहा कि राशन कार्ड की वैकल्पिक व्यवस्था बना ली गई है।
कमियों को सुधारने के लिए विभाग ने तकनीकी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार कर ली है। कहा कि गलत कार्डों को सुधारने के लिए नए कार्ड का प्रारूप तैयार किया गया है, जो विधिवत प्रति हस्ताक्षरित रहेगा। उस पर ही कोटेदारों को राशन का वितरण करना है। इस दौरान कोटेदारों ने अपनी समस्या सुनाते हुए कहा कि उनके द्वारा एक रुपये प्रति किलो की दर से खर्च का लिया जाता है। इस पर अक्सर अधिकारियों की जांच एवं कार्रवाई का दंड भुगतना पड़ता है।
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जबकि मार्केटिंग से ही कम मात्रा में राशन मिलता है। कहा कि इसकी शिकायत जिलाधिकारी से लेकर प्रदेश के आला अफसरों से भी करने के बाद कोई सुनवाई नहीं होती। कोटेदार संघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा कि कोटेदारों को हमेशा प्रशासन की मार झेलनी पड़ती है। जबकि कोई भी कोटेदार कोटे की दूकान एक बिजनेस के तौर पर करता है। इसमें हर जगह कोटेदारों का ही शोषण होता है। खाद्य सुरक्षा बिल में पल्लेदारी, भाड़ा एवं उचित दर के विक्रेताओं के लाभांश को कहीं नहीं दर्शाया गया। इसे स्पष्ट किया जाए।
कहा कि मार्केटिंग विभाग के अधिकारी कई बार एक-दो महीने का राशन लैप्स कर देते हैं। इसके लिए रीट भी दायर किया गया था। इसमें जिलाधिकारी तथा जिला पूर्ति अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि अपनी देखरेख में लैप्स राशन का वितरण कराया जाए। फिर भी विपणन महकमे के अफसरों ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी। जिलाध्यक्ष आनंद सिंह ने कहा कि पहले स्पष्ट किया जाए कि किसको राशन देना है और किसे नहीं। इस मौके पर महासचिव उदय भान पांडेय, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय, लल्लन राय, ओमप्रकाश पांडेय सहित सैकड़ों कोटेदार संघ के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।
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जिले कोटेदार संघ के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलापूर्ति अधिकारी अनिल यादव ने कहा कि कोटेदारों ने अपनी विभिन्न मांगों से अवगत कराया है। इसमें खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनाए गए राशन कार्डों की कमियों को बताया गया। उन्होंने एक-एक बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की। कहा कि राशन कार्ड की वैकल्पिक व्यवस्था बना ली गई है।
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कमियों को सुधारने के लिए विभाग ने तकनीकी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार कर ली है। कहा कि गलत कार्डों को सुधारने के लिए नए कार्ड का प्रारूप तैयार किया गया है, जो विधिवत प्रति हस्ताक्षरित रहेगा। उस पर ही कोटेदारों को राशन का वितरण करना है। इस दौरान कोटेदारों ने अपनी समस्या सुनाते हुए कहा कि उनके द्वारा एक रुपये प्रति किलो की दर से खर्च का लिया जाता है। इस पर अक्सर अधिकारियों की जांच एवं कार्रवाई का दंड भुगतना पड़ता है।
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जबकि मार्केटिंग से ही कम मात्रा में राशन मिलता है। कहा कि इसकी शिकायत जिलाधिकारी से लेकर प्रदेश के आला अफसरों से भी करने के बाद कोई सुनवाई नहीं होती। कोटेदार संघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा कि कोटेदारों को हमेशा प्रशासन की मार झेलनी पड़ती है। जबकि कोई भी कोटेदार कोटे की दूकान एक बिजनेस के तौर पर करता है। इसमें हर जगह कोटेदारों का ही शोषण होता है। खाद्य सुरक्षा बिल में पल्लेदारी, भाड़ा एवं उचित दर के विक्रेताओं के लाभांश को कहीं नहीं दर्शाया गया। इसे स्पष्ट किया जाए।
कहा कि मार्केटिंग विभाग के अधिकारी कई बार एक-दो महीने का राशन लैप्स कर देते हैं। इसके लिए रीट भी दायर किया गया था। इसमें जिलाधिकारी तथा जिला पूर्ति अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि अपनी देखरेख में लैप्स राशन का वितरण कराया जाए। फिर भी विपणन महकमे के अफसरों ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी। जिलाध्यक्ष आनंद सिंह ने कहा कि पहले स्पष्ट किया जाए कि किसको राशन देना है और किसे नहीं। इस मौके पर महासचिव उदय भान पांडेय, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय, लल्लन राय, ओमप्रकाश पांडेय सहित सैकड़ों कोटेदार संघ के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।