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गर्मी में सफाटा शिमला मिर्च की खेती कर महेश कमा रहे कई गुना लाभ
Mon, 04 Apr 2022 11:15 PM IST
कानपुर ब्यूरो
अमर उजाला कानपुर,
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Published by: कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Apr 2022 11:15 PM IST
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Shimla Mirch
- फोटो : अमर उजाला
ब्लाक बिधूना के रामपुर-बामपुर के किसान गर्मी के मौसम में शिमला मिर्च की खेती कर कई गुना आमदनी कर रहे हैं। फसल में अच्छी पैदावार देख आस-पास के किसान भी खेती की तकनीकी और पैदावार की गुर सीख रहे हैं। रामपुर-बामपुर के किसान महेश ने बताया कि ढाई बीघा में सफाटा प्रजाति की शिमला मिर्च बोई है। नवंबर दिसंबर में इसकी नर्सरी डाली थी। जनवरी में इसकी खेतों में बुवाई की, मार्च के द्वितीय सप्ताह से फलों का निकलना शुरू हो गया है।
दवा, खाद, पानी आदि में करीब 20 हजार रुपये की लागत आई है। एक बीघा में करीब 25 से 30 क्विंटल तक पैदावार होती है। इसके बाद शिमला मिर्च को इटावा, कानपुर व आगरा आदि जनपदों में बिक्री के लिए लेकर जाते हैं। इन दिनों बाजार में थोक में 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से शिमला मिर्च की बिक्री हो रही है। अनुमान है कि करीब ढाई से तीन लाख के बीच की बिक्री होगी।
अभी तक वह 50 हजार रुपये की शिमला मिर्च बेंच चुके हैं। महेश की देखा-देखी गांव के करीब एक दर्जन से अधिक किसान सब्जी की खेती कर रहे हैं।
साल भर करते हैं सब्जी की खेती
महेश कहते हैं कि पारंपरिक खेती में लागत निकालना भी मुश्किल होता था। किसान पाठशाला में उद्यान विभाग से सब्जी की खेती करने की जानकारी मिली। विभाग का सहयोग मिला तो धीरे-धीरे रकबा बढ़ाना शुरू कर दिया। अब वह शिमला मिर्च, मिर्च, टमाटर, खीरा आदि सब्जी की फसलें पूरे साल सीजन के हिसाब से करते हैं।
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बोले जिम्मेदार
किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक खेती करनी चाहिए। इसमें कम लागत और अच्छा मुनाफा होता है। महेश से जिले के अन्य किसानों को भी प्रेरणा लेने की जरूरत है। उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपने को समृद्ध कर सकते हैं। - धर्मेंद्र कुमार, सहायक उद्यान अधिकारी
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दवा, खाद, पानी आदि में करीब 20 हजार रुपये की लागत आई है। एक बीघा में करीब 25 से 30 क्विंटल तक पैदावार होती है। इसके बाद शिमला मिर्च को इटावा, कानपुर व आगरा आदि जनपदों में बिक्री के लिए लेकर जाते हैं। इन दिनों बाजार में थोक में 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से शिमला मिर्च की बिक्री हो रही है। अनुमान है कि करीब ढाई से तीन लाख के बीच की बिक्री होगी।
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अभी तक वह 50 हजार रुपये की शिमला मिर्च बेंच चुके हैं। महेश की देखा-देखी गांव के करीब एक दर्जन से अधिक किसान सब्जी की खेती कर रहे हैं।
साल भर करते हैं सब्जी की खेती
महेश कहते हैं कि पारंपरिक खेती में लागत निकालना भी मुश्किल होता था। किसान पाठशाला में उद्यान विभाग से सब्जी की खेती करने की जानकारी मिली। विभाग का सहयोग मिला तो धीरे-धीरे रकबा बढ़ाना शुरू कर दिया। अब वह शिमला मिर्च, मिर्च, टमाटर, खीरा आदि सब्जी की फसलें पूरे साल सीजन के हिसाब से करते हैं।
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बोले जिम्मेदार
किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक खेती करनी चाहिए। इसमें कम लागत और अच्छा मुनाफा होता है। महेश से जिले के अन्य किसानों को भी प्रेरणा लेने की जरूरत है। उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपने को समृद्ध कर सकते हैं। - धर्मेंद्र कुमार, सहायक उद्यान अधिकारी