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Prayagraj : धर्म संसद बनी राम मंदिर आंदोलन के लिए वरदान, रामजन्मभूमि आंदोलन का केंद्र रही है संगमनगरी

Sat, 13 Jan 2024 11:51 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 13 Jan 2024 11:51 AM IST
सार

कांचिकामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की अध्यक्षता में हुई इस धर्मसंसद में रामशिला पूजन का निर्णय लिया गया था। तब इस धर्म संसद में मार्गदर्शन के लिए देवरहा बाबा भी शामिल हुए थे। इस धर्मसंसद में लिए गए निर्णय के अनुपालन में 200 से अधिक रथ निकाले गए।

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Dharm Sansad became a boon for Ram Mandir movement In Prayagraj
अयोध्या राम मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संगमनगरी राम जन्मभूमि आंदोलन का केंद्र रही है। चाहे जन्मभूमि पर लगा ताला खुलवाने का मुद्दा रहा हो या फिर मंदिर निर्माण के लिए रामशिलाओं के पूजन का या फिर जन्मभूमि की मुक्ति के लिए राष्ट्रव्यापी कारसेवा की लड़ाई का, यह सभी अहम निर्णय संगमनगरी में ही लिए गए। इसमें एक फरवरी 1989 को महाकुंभ में संगम की रेती पर हुई विहिप की तृतीय धर्म संसद सबसे अहम और निर्णायक रही है। इसी धर्म संसद में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चलाने का निर्णय लिया गया।

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इसका केंद्र बना विहिप का कीडगंज स्थित भार्गव जी की कोठी में बना केंद्रीय कार्यालय। तब विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री रहे अशोक सिंघल अपने करीबी ठाकुर गुरजन सिंह के साथ इस आंदोलन को धार देने में जुटे थे। अशोक सिंघल के घर में भी रामभक्तों की रणनीतिक बैठकें हुआ करती थीं। सिंघल के सहयोगी रहे विहिप के पूर्व प्रांत प्रचार प्रमुख राजीव मिश्र बताते हैं कि तब केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल ने मंथन किया कि इस आंदोलन को सिर्फ यूपी तक सीमित रखकर रामजन्मभूमि को मुक्त कराने में सफलता हासिल नहीं की जा सकती। इस पर तृतीय धर्म संसद का आह्वान कुंभ मेले में किया गया।

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पूरे देश में निकाली गई थीं यात्राएं

कांचिकामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की अध्यक्षता में हुई इस धर्मसंसद में रामशिला पूजन का निर्णय लिया गया था। तब इस धर्म संसद में मार्गदर्शन के लिए देवरहा बाबा भी शामिल हुए थे। इस धर्मसंसद में लिए गए निर्णय के अनुपालन में 200 से अधिक रथ निकाले गए। इन रथों पर श्रीराम, सीता और हनुमान के विग्रहों को विराजमान कराकर पूरे देश में रथयात्राएं निकाली गईं।

विहिप के काशी प्रांत कार्यालय केसर भवन के प्रमुख सुनील सिंह बताते हैं कि देवरहा बाबा की उपस्थिति में स्वीकार किए गए अयोध्या में श्रीराम मंदिर के मॉडल डिजाइन की लाखों तस्वीरें आम जनता के बीच वितरित और प्रचारित की गईं। इसके अलावा 2.75 लाख से अधिक गांवों में श्रीराम शिला पूजन कर उन्हें अयोध्या भेजा गया। शिलान्यास 9-10 नवंबर 1989 को निर्धारित स्थान, तिथि और समय पर ही उत्साह और उमंग के साथ किया गया।

विहिप के कार्यालय प्रमुख सुनील सिंह के मुताबिक 1989 के महाकुंभ में आने वाले संतों-भक्तों को धर्म संसद की प्रत्येक कार्यवाही से परिचित कराने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 1500 से अधिक लाउडस्पीकर लगाए गए थे, ताकि महाकुंभ में आए लाखों साधु-संत जहां भी ठहरे हों, धर्म संसद की पूरी जानकारी सीधे प्राप्त कर सकें।

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