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संगम पर खिला वसंत , पुण्य की डुबकी लगाने के लिए उमड़ा आस्था का जनसैलाब

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 05 Feb 2022 04:09 PM IST
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संगम पर खिला वसंत, पुण्य की डुबकी के लिए उमड़ा आस्था का जन सैलाब
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क्रासर दोपहर तक संगम समेत गंगा के नौ घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, दोपहर 12 बज तक सात लाख लोगों के स्नान का मेला प्रशासन ने किया दावा अमर उजाला ब्यूरो प्रयागराज। वसंत पंचमी पर शनिवार को संगम पर आस्था की लहरें हर तन-मन को अभिसिंचित करती रहीं। भक्ति के प्रवाह में बहने के लिए लोग उसी तरह अतुर दिखे,  जैसे नदियां समुद्र में मिलने के लिए कल कल निनाद करते हुए बढ़ रही हों। संगम तट पर माघ मेला के चौथे स्नान पर्व वसंत पंचमी पर आस्था का जन सैलाब इसी तरह उमड़ पड़ा। मेला प्रशासन ने दिन के 12 बजे तक सात लाख लोगों के संगम स्नान का दावा किया। संगम पर विलुप्त मां सरस्वती के अवतरण पर श्रद्धा के अनंत भावों के साथ देश के कोने-कोने से निकले लाखों श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। आधी रात से ही स्नान आरंभ हो गया। संगम समेत गंगा के नौ घाटों पर कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच डुबकी लगने लगी। गंगा, यमुना के साथ ज्ञान की गहरी जड़ों के रूप में विलुप्त सरस्वती की अनुभूति पाकर हर कोई धन्य होता रहा। भीड़ को देखते हुए शाम को ही वाहनों का प्रवेश संगम क्षेत्र में रोक दिया गया। लाल मार्ग, काली मार्ग और त्रिवेणी मार्ग पर पौ फटने तक कहीं तिल रखने भर की जगह नहीं बची। स्नान- ध्यान के साथ रेती पर मां वाग्देवी की आराधना,आरती और दीपदान भी होता रहा। वहीं, संतों और कल्पवासियों के शिविरों में भी कहीं यज्ञ, अखंड पाठ तो कहीं संगीतमय कथाएं और कीर्तन किए जाते रहे। त्रिवेणी मार्ग पर भजनानंदी संतों की टोलियां जहां झांझ-मजीरे के साथ झूमती रहीं, वहीं शिविरों से समूहों में निकलतीं महिलाएं मां गंगा के गीत गाते हुए संगम की ओर बढ़ती रहीं। संगम के अलावा अन्य स्नान घाटों पर महिलाएं डुबकी लगाने के साथ हल्दी-चंदन के टीके लगाकर कामनाओं के दीप जलाती रहीं। उसी में शंख और घंटियों की भी गूंज मचती रही और जयकारे भी लगाए जाते रहे। स्नान के बाद पुरोहितों से तिलक-त्रिपुंड लगवाने के भी कतारें लगती रहीं। उसी भीड़ में लोग बिछड़ते और मिलते भी रहे। संगम के अलावा काली मार्ग के पूर्वी तट के अलावा राम घाट और दशाश्वमेध घाट पर भी स्नानार्थियों का रेला दिन भर उमड़ता रहा।
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