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सिरदर्द बनी कल्पवासियों की शिफ्टिंग
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सिरदर्द बनी कल्पवासियों की शिफ्टिंग, नए क्षेत्रों में फिर से मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की मशक्कत
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गंगा में लगातर जलस्तर बढ़ने और कटान की वजह से विस्थापित हो रही संस्थाओं की नए क्षेत्रों में शिफ्टिंग मेला प्रशासन के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। नए क्षेत्रों में फिर से सड़क, बिजली, पेयजल और प्रसाधन की मूलभूत सुविधाओं को विकसित करना पड़ रहा है। इसके साथ ही कड़ाके की ठंड में पानी की वजह से तमाम कल्पवासियों को शिविरों से बाहर सुरक्षित जगह के लिए भटकना पड़ रहा है।
पांच सेक्टरों में बसे माघ मेले में गंगा के जलस्तर से मची अफरातफरी के बीच शनिवार को दिन भर शिविरों की शिफ्टिंग और प्रवाह रोकने के लिए तटबंध बनाने की मशक्कत की जाती रही । देर शाम तक सेक्टर तीन में काली और त्रिवेणी मार्ग के दोनों पटरियों पर बसे दर्जनों शिविरों को उजाड़ना पड़ा। मौजूदा समय करीब 20 स्थानों पर कटान हो रही है और पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है।एक तरफ से मेला प्रशासन पानी निकलवा रहा है और दूसरी तरफ गंगा के जल प्रवाह में बढ़ोतरी की वजह से शिविर डूबते चले जा रहे हैं। वहीं नए क्षेत्रों में जिन शिविरों की शिफ्टिंग की जा रही है वहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है।ऐसे में वहां बिजली, पानी, सड़क, गाटा मार्ग और शौचालय के इंतजाम करने के लिए अभी मशक्कत करनी पड़ रही है । शिविरों के उजड़ने और नए स्थानों पर पर्याप्त सुविधाएं न मिलने की वजह से सैकड़ों कल्पवासी माघ मेला क्षेत्र छोड़कर अपने घरों के लिए रवाना हो गए हैं ।
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