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माघ मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती, बढ़ेगा दायरा
Sun, 27 Sep 2020 01:31 AM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2020 01:31 AM IST
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- फोटो : प्रयागराज
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संगम पर माघ मेले का क्या स्वरूप होगा, इसे लेकर प्रयागराज मेला प्राधिकरण अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। सबसे बड़ी चुनौती है लाखों की भीड़ वाले मेला के लिए गाइड लाइन तय करना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मेले की परंपरा बचाने का साधु-संतों को भरोसा दिलाने के बाद तैयारियां तो शुरू हो गई हैं, लेकिन शासन अभी मेले की रूपरेखा तय नहीं कर सका है।
मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी के समक्ष विभागवार कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के बाद अब मेला प्रशासन को शासन की गाइड लाइन का इंतजार है। अब तक की प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार इस बार कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए मेले का दायरा और विस्तृत होगा। ऊहापोह के बीच फिलहाल अंदरखाने तैयारी शुरू हो गई हैं।
कोशिश हो रही है कि संगम पर माघ मेला में हर वर्ष बसने वाली चार हजार से अधिक सामाजिक, राजनीतिक संस्थाओं को इस बार आमंत्रित न किया जाए। अलबत्ता आचार्यबाड़ा, दंडीबाड़ा के अलावा खाक चौक जैसी आध्यात्मिक संस्थाओं के साधु-संतों के अलावा कल्पवासियों के ही शिविर लगाए जाएं। इस पर मेला प्रशासन ने साधु-संतों से भी सुझाव लिया है।
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पिछली बार माघ मेला छह सेक्टर में बसाया गया था। सेक्टरवाइज बसे इस मेले में पहुंचने के लिए गंगा पर पांच पांटून पुल बनाए गए थे, लेकिन इस बार पीडब्ल्यूडी ने मेला के लिए सिर्फ तीन पांटून पुल के निर्माण का प्रस्ताव भेजा है। लेकिन, कहा जा रहा है कि संस्थाएं घटेंगी और क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा। सामाजिक दूरी का मानक पूरा करने के लिए कुंभ की तर्ज पर क्षेत्रफल विस्तार करते हुए दूर-दूर शिविर बसाए जा सकते हैं।
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मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी के समक्ष विभागवार कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के बाद अब मेला प्रशासन को शासन की गाइड लाइन का इंतजार है। अब तक की प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार इस बार कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए मेले का दायरा और विस्तृत होगा। ऊहापोह के बीच फिलहाल अंदरखाने तैयारी शुरू हो गई हैं।
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कोशिश हो रही है कि संगम पर माघ मेला में हर वर्ष बसने वाली चार हजार से अधिक सामाजिक, राजनीतिक संस्थाओं को इस बार आमंत्रित न किया जाए। अलबत्ता आचार्यबाड़ा, दंडीबाड़ा के अलावा खाक चौक जैसी आध्यात्मिक संस्थाओं के साधु-संतों के अलावा कल्पवासियों के ही शिविर लगाए जाएं। इस पर मेला प्रशासन ने साधु-संतों से भी सुझाव लिया है।
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पिछली बार माघ मेला छह सेक्टर में बसाया गया था। सेक्टरवाइज बसे इस मेले में पहुंचने के लिए गंगा पर पांच पांटून पुल बनाए गए थे, लेकिन इस बार पीडब्ल्यूडी ने मेला के लिए सिर्फ तीन पांटून पुल के निर्माण का प्रस्ताव भेजा है। लेकिन, कहा जा रहा है कि संस्थाएं घटेंगी और क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा। सामाजिक दूरी का मानक पूरा करने के लिए कुंभ की तर्ज पर क्षेत्रफल विस्तार करते हुए दूर-दूर शिविर बसाए जा सकते हैं।