{"_id":"6182867159aef451202c4eb2","slug":"aligarh1635944049","type":"story","status":"publish","title_hn":"हेडिंग\nनाम बदला, मगर नहीं बदली आतिशबाजी की प्रकृति\nप्वाइंटर\nन्यायालय के आदेश पर ग्रीन पटाखों की मोहर लगाकर बिक रहे हैं आम पटाखे\nपिछले साल की तुलना में दुकानदारी में गिरावट तो दाम करीब 20 फीसदी बढ़े\nअमर उजाला ब्यूरो","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
हेडिंग नाम बदला, मगर नहीं बदली आतिशबाजी की प्रकृति प्वाइंटर न्यायालय के आदेश पर ग्रीन पटाखों की मोहर लगाकर बिक रहे हैं आम पटाखे पिछले साल की तुलना में दुकानदारी में गिरावट तो दाम करीब 20 फीसदी बढ़े अमर उजाला ब्यूरो
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अलीगढ़। पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए न्यायालय ने अलीगढ़ समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में
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दीपावली पर मात्र ग्रीन पटाखे ही बेचने के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने भी आतिशबाजी
विक्रेताओं को नसीहत दी है कि वे मात्र ग्रीन पटाखे ही बेचें। इसके अनुपालन में नुमाइश मैदान
स्थित आतिशबाजी बाजार में ग्रीन टैग लगे पटाखे ही दिखाई दे रहे हैं। लेकिन हकीकत में यह
मात्र टैग भर है। एक दुकानदार ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि आदेश देर से आया।
तब तक सभी विक्रेता आतिशबाजी आर्डर कर चुके थे। आदेश के बाद कंपनियों ने आतिशबाजी के
बंडलों पर मात्र ग्रीन टैग लगा दिया है। आतिशबाजी वही है जो पूर्व में बिकती थी।
हालांकि ग्रीन पटाखों की आड़ में आतिशबाजी के दाम में 15 से 20 फीसदी इजाफा अवश्य हुआ
है। महंगाई बढ़ने से बिक्री में भी दस से पंद्रह प्रतिशत की गिरावट आई है।
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क्या कहते हैं दुकानदार
-इस साल बिक रहे ग्रीन पटाखे पिछले साल की तुलना में 15 से 20 फीसदी तक महंगे हैं।
आतिशबाजी पर महंगाई का असर दुकानदारी पर है। बिक्री दस से पंद्रह प्रतिशत तक कम है।
विजय वार्ष्णेय, आतिशबाजी विक्रेता
-ग्रीन पटाखे इस साल ही आए हैं। कंपनियों ने इस बार प्रदूषण के चलते पहले से ही टैग लगे
ग्रीन पटाखे भेजे हैं। इनके महंगे होने के कारण लोग कम मात्रा में खरीद कर रहे हैं।
सौरभ, आतिशबाजी विक्रेता
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आतिशबाजी बाजार में मात्र ग्रीन पटाखे
अलीगढ़। आतिशबाजी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि आतिशबाजी बाजार में
मात्र ग्रीन पटाखे ही बिक रहे हैं। तीन लोग साधारण आतिशबाजी बेच रहे थे। प्रशासन ने
छापा मारकर इनके लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। उन्होंने ग्रीन पटाखों का मात्र लेबल होने के
आरोप से इंकार करते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। निर्माता कंपनियां पहले से ही सजग हैं और
उन्होंने प्रतिबंधित जिलों में मात्र ग्रीन पटाखे ही भेजे हैं।
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आतिशबाजी के दाम पहले और अब
-पैकिंग पेंसिल-पिछले साल 125 से 130 रुपये पैक, अब 150 रुपये
-राकेट-पिछले साल 50 से 450 रुपये, अब 80 से 500 रुपये
-चटाई बंडल-पिछले साल 360 रुपये, अब 400 रुपये
-फुलझड़ी-पिछले साल 20 से 175 रुपये, अब 40 से 200 रुपये
-चकरी-पिछले साल 40 से 350 रुपये, अब 50 से 400 रुपये
-अनार-पिछले साल 35 से 450 रुपये, अब 50 से 500 रुपये
-सुतली बम-पिछले साल 20 से 150 रुपये, अब 30 से 180 रुपये
-डांसिंग पिकाक-पिछले साल 180 रुपये, अब 200 रुपये
-16 राउंड बम-पिछले साल 1000 रुपये, अब 1200 रुपये
-स्काई शॉट-पिछले साल 900 रुपये, अब एक हजार रुपये