{"_id":"6113d4998ebc3e7b9a3b80ae","slug":"aligarh1628689561","type":"story","status":"publish","title_hn":"दरबार हॉल में हुए कांग्रेस के कार्यक्रम, रेलवे स्टेशन से यूनियन जैक भी उतारा \n\nअलीगढ़ की इमारतें भी रही हैं राष्ट्रीय आंदोलन की खामोश गवाह, इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब डाल रहे हैं रोशनी","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
दरबार हॉल में हुए कांग्रेस के कार्यक्रम, रेलवे स्टेशन से यूनियन जैक भी उतारा अलीगढ़ की इमारतें भी रही हैं राष्ट्रीय आंदोलन की खामोश गवाह, इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब डाल रहे हैं रोशनी
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अलीगढ़। अलीगढ़ की इमारतें भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की खामोश गवाह रही हैं । इसमें घंटाघर क्लॉक टावर, गवर्नमेंट प्रेस, नुमाइश मैदान का दरबार हॉल, रेलवे स्टेशन जैसी इमारत में शामिल हैं।
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नुमाइश मैदान के दरबार हॉल में तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 8 दिन अपने साथियों के साथ प्रवास भी किया था।
इसी तरह भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अतरौली की कुछ स्वतंत्रता सेनानियों ने रेलवे स्टेशन पर यूनियन जैक की जगह तिरंगा झंडा फैला दिया था। जिसके बाद उन को गिरफ्तार कर लिया गया।
राष्ट्रीय आंदोलन के समय की इमारतों के विषय में बताते हुए प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं कि अलीगढ़ के प्रदर्शनी मैदान में अश्व प्रदर्शनी 1890 से लगनी शुरू हुई।
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सबसे पहले दरबार हॉल का निर्माण हुआ। इस दरबार हॉल का इस्तेमाल बाद में कांग्रेस के कार्यक्रमों के लिए भी होने लगा। बाद में समय के साथ प्रदर्शनी और प्रदर्शनी मैदान का विस्तार हुआ।
प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं कि दिल्ली से सीधी रेलवे लाइन हावड़ा के लिए शुरू की गई। जिसके बाद 1860 में यहां पर रेलवे स्टेशन के निर्माण की शुरुआत हुई। मूल इमारत अभी भी मौजूद है। स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले रेलवे का महकमा नौकरी देने का एक सबसे बड़ा महकमा था। बाद में रेलवे स्टेशन की इमारत का भी विस्तार हुआ।
घंटा घर क्लॉक टावर के विषय में प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं 1860 में यहां पर न्यायिक व्यवस्था की शुरुआत हुई। बाद में मूल इमारत बनी और मूल इमारत बनने के साथ ही सामने की तरफ क्लॉक टावर का निर्माण किया गया। उस समय आम लोगों के पास घड़िया नहीं हुआ करती थीं। इसलिए क्लॉक टावर बहुत महत्वपूर्ण स्थान हुआ करता था।
प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं जहां तक गवर्नमेंट प्रेस का सवाल है तो इसकी बिल्डिंग 1940 के आसपास बनी। तब तक तकनीक मैं भी बहुत बदलाव आ चुका था। लेकिन अंग्रेज यह नहीं समझ सके थे कि वह इस गवर्नमेंट प्रेस का बहुत लंबे समय तक अपने लिए इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। क्योंकि 1947 में देश को स्वतंत्रता मिल गई। उस समय मेरी उम्र 16 वर्ष थी।
ऑनलाइन सामूहिक राष्ट्रगान कार्यक्रम आयोजित
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत आनलाइन राष्ट्रगान को सामूहिक तौर पर गाने के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डा. अरशद हुसैन ने बतया कि इस कार्यक्रम के बाद देशभक्ति गीतों पर आधारित प्रतियोगिता हुई, जिसमें कार्यक्रम अधिकारियों और स्वयंसेवी छात्रों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया और एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा की।
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