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लगता है पढ़ने और लिखने को अभी बहुत कुछ रह गया है : प्रो. इरफान हबीब 12 अगस्त को 90 वर्ष के हुए प्रसिद्ध इतिहासकार, अमर उजाला के साथ यादें साझा की
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अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस और प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब 12 अगस्त को 90 वर्ष की हो रहे हैं।
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इस लंबी जीवन यात्रा में उन्होंने इतिहास के लेखक के रूप में और इतिहास के शिक्षक के रूप में सफलतापूर्वक अपनी भूमिका अदा की है। इरफान हबीब अपने तार्किक ऐतिहासिक ज्ञान के लिए जाने जाते हैं। साथ ही हिंदुत्व और मुस्लिम कट्टरपंथ के खिलाफ अपने मजबूत विचारों के लिए भी वह मशहूर हैं।
इस अवसर पर अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा कि ऐसा लगता है कि अभी भी पढ़ने के लिए और लिखने के लिए बहुत कुछ रह गया है।
अब तक के पूरे जीवन सफर मैं जब मुड़कर देखता हूं तो अपनी ही की हुई गलतियां भी मालूम हो जाती हैं।
लेकिन यह सब जिंदगी के साथ चलता रहता है। प्रोफ़ेसर इरफान हबीब कहते हैं कि उनके जन्मदिन पर उनके प्रशंसक छात्र और परिचित जो शुभकामनाएं दे रहे हैं, उसके लिए वह उनका आभार व्यक्त करते हैं। लोगों से उन्हें बहुत स्नेह है मिला है।
प्रोफेसर इरफान हुई का जन्म 1931 में गुजरात के वडोदरा में हुआ था। उनके पिता प्रोफ़ेसर हबीब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इतिहास के ही प्रोफेसर थे। प्रोफेसर इरफान हबीब की उच्च शिक्षा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हुई है।
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सन 2005 में उनको भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया। प्रोफेसर इरफान हबीब रॉयल हिस्ट्री सोसाइटी ब्रिटेन सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वे सिविल लाइन की बदरबाग कॉलोनी में रहते हैं और महामारी के दौरान अपना पूरा समय घर पर ही अध्ययन में बिता रहे हैं।
प्रोफेसर इरफान हबीब के जन्मदिन पर ऑनलाइन कार्यक्रम आज
अलीगढ़। प्रोफेसर इरफान हबीब के जन्मदिन पर सहमत सोशल साइंटिस्ट और तूलिका बुक्स की ओर से इन डिफेंस ऑफ हिस्ट्री नाम से एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर, अमिया कुमार बागची, आदित्य मुखर्जी, प्रभात पटनायक के साथ-साथ सीताराम येचुरी और प्रोफेसर शीरीन मूसवी शामिल होंगी।
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