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टिड्डी दल के बाद मक्का की फसल पर 'आर्मी वर्म' के हमले का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की एडवायजरी
Thu, 11 Jun 2020 11:30 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 11 Jun 2020 11:30 PM IST
सार
मौसम को देखते हुए मक्का की फसल में आर्मी वर्म के हमले की आशंका
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कासगंज में जायद की फसल में मक्का की फसल प्रमुख फसल है। मौसम को देखते हुए कृषि विभाग ने मक्का की फसल में आर्मी वर्म के हमले की आशंका जाहिर की। विभाग के इससे बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। जिससे किसानों को नुकसान न हो।
जनपद में आर्मी वर्म (सैनिक कीट) से मक्का की फसल में नुकसान हो सकता है। इस कीट का लार्वा मक्के के छोटे पौधों के तनों में अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करते हैं इसकी पहचान पत्तियों पर लार्वा के मलमूत्र से होती है। यह पत्तियों पर भूसे के बुरादे जैसा दिखता है। किसान अपनी फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखे तो तुरंत उसका उपचार करें। अन्यथा कीट से मक्का की फसल में अधिक नुकसान हो सकता है। गर्म और नम मौसम इनके लिए काफी अनुकूल रहता है।
ऐसे करें पहचान
- मक्का की फसल में पत्तियों पर छिद्र दिखाई देते हैं
- लार्वा हल्के पीले, भूरे, हरे रंग व काले रंग के होते हैं।
- इनके किनारों पर पट्टियां होती हैं और पीठ पर पीली सी रेखा होती है।
ऐसे करें बचाव
कीट से बचाने के लिए नीम के तेल एक प्रतिशत ईसी पांच मिलीलीटर प्रति लीटर का छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त थायोमेक्थासोम 12.6 प्रतिशत और लेम्डा सायलाथ्रिन 9.5 प्रतिशत एवं क्लोरोपायरीफॉस 50 प्रतिशत तथा सायपरमेथ्रिन पांच प्रतिशत के मिश्रण का छिड़काव किया जा सकता है। प्रयास करें कि दवा बढ़वार वाले भाग (कोत) के अंदर तक पहुंच जाए।
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गर्म और आद्रता वाला मौसम आर्मी वर्म के लिए अनुकूल रहता है। किसान मक्का की फसलों को की निरंतर निगरानी रखें। यदि कीट के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उपचार करें। - सुमित चौहान, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।
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जनपद में आर्मी वर्म (सैनिक कीट) से मक्का की फसल में नुकसान हो सकता है। इस कीट का लार्वा मक्के के छोटे पौधों के तनों में अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करते हैं इसकी पहचान पत्तियों पर लार्वा के मलमूत्र से होती है। यह पत्तियों पर भूसे के बुरादे जैसा दिखता है। किसान अपनी फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखे तो तुरंत उसका उपचार करें। अन्यथा कीट से मक्का की फसल में अधिक नुकसान हो सकता है। गर्म और नम मौसम इनके लिए काफी अनुकूल रहता है।
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ऐसे करें पहचान
- मक्का की फसल में पत्तियों पर छिद्र दिखाई देते हैं
- लार्वा हल्के पीले, भूरे, हरे रंग व काले रंग के होते हैं।
- इनके किनारों पर पट्टियां होती हैं और पीठ पर पीली सी रेखा होती है।
ऐसे करें बचाव
कीट से बचाने के लिए नीम के तेल एक प्रतिशत ईसी पांच मिलीलीटर प्रति लीटर का छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त थायोमेक्थासोम 12.6 प्रतिशत और लेम्डा सायलाथ्रिन 9.5 प्रतिशत एवं क्लोरोपायरीफॉस 50 प्रतिशत तथा सायपरमेथ्रिन पांच प्रतिशत के मिश्रण का छिड़काव किया जा सकता है। प्रयास करें कि दवा बढ़वार वाले भाग (कोत) के अंदर तक पहुंच जाए।
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गर्म और आद्रता वाला मौसम आर्मी वर्म के लिए अनुकूल रहता है। किसान मक्का की फसलों को की निरंतर निगरानी रखें। यदि कीट के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उपचार करें। - सुमित चौहान, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।