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संस्कृति यूनिवर्सिटी में फैकल्टी डेवलपमेंट पर कार्यशाला: कुलाधिपति ने बताया कैसा हो एजुकेशन मॉडल 

Thu, 23 Aug 2018 08:56 PM IST
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Advertorial Updated Thu, 23 Aug 2018 08:56 PM IST
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Sanskriti university organized workshop on faculty development
सचिन गुप्ता

बदलते समय के साथ शिक्षा का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे में जरूरी है कि हम शिक्षा के क्षेत्र में आ रहे वैश्विक बदलावों को न केवल आत्मसात करें बल्कि युवा पीढ़ी को भी उस बदलाव से अवगत कराएं। आज की युवा पीढ़ी को परिणाम आधारित शिक्षा की जरूरत है। ऐसे में हम उन्हें तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विश्वभर में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अपनाए जा रहे श्रेष्ठ अभ्यासों के बारे में विस्तार से समझाएं। ये विचार संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने

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फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला में प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

सचिन गुप्ता ने आगे कहा कि शिक्षा हमारी अंतर्निहित शक्तियों को उभारकर ज्ञान में परिवर्तित करती है। शिक्षा ही हमें बौद्धिक रूप से सक्षम और तकनीकी रूप से कुशल बनाती है। ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों का विकास किया जाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बदलते परिदृश्य में इनोवेशन को समाहित करने के साथ, शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय मांग और आवश्यकता के अनुरूप मॉडल विकसित करना भी जरूरी है। शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के साथ-साथ उत्तम नागरिक बनाना भी शिक्षा का ही उद्देश्य होना चाहिए।
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कार्यक्रम में कुलपति डॉ. राणा सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यक्तित्व का रूपांतरण, मानव शक्तियों का परिष्कार करते हुए जीवन के उच्च आदर्शों और उन्नति की ओर ले जाती है। भारतीय संस्कृति समन्वय की पूर्णता और अखंडता की संस्कृति है। शिक्षा पद्धतियों में बदलाव करते समय हमें अपनी संस्कृति को अनदेखा नहीं करना चाहिए। लोक व्यवहार में भी सभी के मंगल और समन्वय की अभिलाषा अभिव्यक्त होनी चाहिए। कुलपति डॉ. राणा सिंह ने पिछले सप्ताह शुक्रवार को मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा दिल्ली में आयोजित कुलपतियों की बैठक में हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस बैठक में कौशलपरक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी इस दिशा में पहले से ही ठोस प्रयास कर रही है।
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संस्कृति यूनिवर्सिटी के प्रति-कुलपति डॉ. अभय कुमार ने प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा पद्धति में परिणाममूलक सुधार समय की मांग है। हमारा दायित्व है कि हम युवा पीढ़ी को जीवन मूल्यों, संस्कारों से अवगत कराने के साथ उन्हें सकारात्मक सोच का बोध कराएं ताकि वे किसी प्रतियोगिता में स्वस्थ मानसिकता के साथ हिस्सेदार बनें। कार्यकारी निदेशक पीसी छाबड़ा ने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति एवं जीवन शैली पुराने और नए मूल्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में सक्षम है।


संस्कृति यूनिवर्सिटी में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें परिणाम आधारित शिक्षा प्रणाली को लागू करना एक महत्वपूर्ण पहल है। विभागाध्यक्ष प्रबंधन डॉ. निर्मल कुंडू ने विश्वविद्यालय में विकास के नये अवसर तथा वातावरण सृजित करने में योगदान के लिए कुलाधिपति सचिन गुप्ता का आभार जताया।

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