लेक्चरर्स के हक में हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
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पॉलीटेक्निक कॉलेजों में पीरियड आधार पर तैनात लेक्चरर्स को नौकरी से निकालने पर हाईकोर्ट ने सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा संजय गुप्ता सहित दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी पाया है। कोर्ट ने राज्य के महाधिवक्ता को लेक्चरर की सेवाएं दोबारा बहाल करने के लिए संभावनाएं तलाशने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद पॉलीटेक्निक कॉलेजों में पीरियड आधार पर कार्यरत लेक्चरर्स की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। हाईकोर्ट ने हैरानी जताई है कि विभाग को लेक्चरर्स को नियमित या अनुबंध पर लाने का विचार करना चाहिए था। इन्हें नौकरी से हटाना तर्कसंगत नहीं है।
हाईकोर्ट ने दिए थे सरकार को आदेश
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पॉलीटेक्निक कॉलेजों में पीरियड आधार पर कार्यरत लेक्चरर्स और इंस्ट्रक्टर्स को अनुबंध की तर्ज पर वेतन और प्रारंभिक नियुक्ति से वेतन छह सप्ताह के भीतर देने के आदेश दिए थे। सरकार को ये आदेश भी दिए थे कि जिन प्रार्थियों ने 6 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उनकी सेवाओं को सरकार की नीति के अनुसार नियमित किया जाए। प्रार्थियों ने याचिका में आरोप लगाया था कि उन्हें भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार लेक्चरर पदों पर पीरियड आधार पर नियुक्त किया गया। उन्हें 350 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है।
उन्हीं की तर्ज पर नियुक्त किए गए लेक्चरर्स की सेवाओं को अनुबंध में तबदील कर दिया गया। अदालत ने कहा था कि सरकार की ओर से प्रार्थियों को पीरियड आधार पर लगाना और उनसे नियमित कर्मियों जैसा काम लेना कानून सम्मत नहीं है। आदेश दिए थे कि सरकार ने अनुबंध और पीरियड आधार पर लेक्चरर की नियुक्ति एक ही तरीके से की है, इसलिए प्रार्थियों को भी अनुबंध आधार पर नियुक्त किया जाए।