मुश्किल में फेसबुक, क्रिप्टोकरंसी लिब्रा प्रोजेक्ट को PayPal, मास्टरकार्ड ने कहा- बाय-बाय

फेसुबक ने कुछ महीने पहले अपनी डिजिटल करेंगीस लिब्रा को पेश किया था। लिब्रा की घोषणा के दौरान भी काफी बवाल मचा था, क्योंकि भारत जैसे देशों में डिजिटल करेंसी पर प्रतिबंध है। वहीं अब फेसबुक के लिब्रा प्रोजेक्ट से उसके कई पार्टनर्स ने हाथ पीछे खींच लिया है।
जिन कंपनियों ने फेसबुक के लिब्रा को बाय-बाय कहा है उनमें पेपाल, स्ट्राइप, वीजा, मास्टरकार्ड और ईबे जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों का कहना है कि फेसबुक की डिजिटल करंसी लिब्रा का समर्थन तो करती हैं लेकिन उसका हिस्सा बनना नहीं चाहती हैं।
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फेसबुक के लिब्रा से क्यों दूरी बना रही हैं ये कंपनियां
दरअसलब ईबे और मास्टरकार्ड जैसी कंपनियां खुद की डिजिटल करेंसी पर काम कर रही हैं। ऐसे में ये किसी दूसरी कंपनी के प्रोजेक्ट के बजाय अपने प्रोजक्ट पर भी फोकस करना चाहती हैं। इस मामले पर मास्टरकार्ड कहना है कि वह लेन-देन में लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं वीजा ने कहा कि फेसबुक के लिब्रा के साथ उनकी साझेदारी लिब्रा के जरूरी नियमों और कानूनों पर निर्भर है। कंपनी लिब्रा के नियमों से संतुष्ट होगी तो साझेदारी होगी।
भरोसे के लायक नहीं है फेसबुक की करेंसी लिब्रा- ट्रंप
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी लिब्रा करंसी को आधारहीन और अविश्वसनीय बताया है। इसके साथ ही व्यापक क्रिप्टोकरंसी समुदाय ने भी इस पर संशय जताया है। लंदन के वित्तीय प्रौद्योगिकी या फिनटेक उद्योग के प्रभावशाली लोग वर्चुअल करंसी के भविष्य पर बातचीत करने के लिए एकत्रित हुए। 'फिनटेक वीक' में एक कार्यक्रम में पूछा गया कि जो लोग लिब्रा का इस्तेमाल करने के इच्छुक नहीं है, वे अपने हाथ उठाएं। करीब 100 विशेषज्ञों और मीडियाकर्मियों से भरे कमरे में दो तिहाई लोगों ने अपने हाथ उठाकर फेसबुक की आभासी मुद्रा पर अविश्वास जताया।
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बिटक्वाइन को चुनौती देने वाला है लिब्रा
ऐसा माना जा रहा है कि लिब्रा वैश्विक तौर पर हावी आभासी मुद्रा बिटक्वाइन को चुनौती देने वाला है। इसके 2020 की पहली छमाही में इसके आरंभ होने की संभावना है। स्मार्टफोन पर लिब्रा का इस्तेमाल करने के लिए यूजर को आभासी वॉलेट पर जाना होगा, जिसका नाम कैलिब्रा दिया जाएगा। फेसबुक ने अपनी क्रिप्टोकरंसी लिब्रा के लिए 27 कंपनियों से साझेदारी की है जिनमें पेपल, वीजा ऊबर जैसी कंपनियों के नाम हैं।
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