Mini Hypersonic Missile: आवाज से 6 गुना तेज! चीन की 'मिनी मिसाइल' के आगे फेल हो जाएंगे सारे डिफेंस सिस्टम?
Mini Hypersonic Missile:
चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा घातक हथियार तैयार किया है जो आकार में तो बेहद छोटा है, लेकिन इसकी मारक क्षमता किसी भी रडार और डिफेंस सिस्टम को फेल करने के लिए काफी है। 'हाइपरसोनिक' तकनीक से लैस ये नन्ही मिसाइलें आधुनिक युद्ध के नियमों को पूरी तरह बदलने वाली हैं।

विस्तार
आधुनिक युद्ध अब केवल टैंकों और फाइटर जेट्स तक सीमित नहीं रह गया है। तकनीक की रफ्तार के साथ हथियारों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। इसी कड़ी में चीन के वैज्ञानिक एक ऐसे हथियार पर काम कर रहे हैं, जो देखने में मामूली लग सकता है, लेकिन इसके असर से हवाई युद्ध की पूरी रणनीति बदल सकती है। चीनी इंजीनियरों ने एक ऐसा हथियार तैयार किया है जो बेहद छोटा है, लेकिन हाइपरसॉनिक स्पीड से दुश्मन के विमानों को तबाह कर सकता है। इस हथियार की इसी खासियत ने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। शुरुआती जानकारियों से संकेत मिलते हैं कि यह तकनीक मौजूदा हवाई रक्षा प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
क्या है यह नई हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, चीन के वैज्ञानिक और इंजीनियर अल्ट्रा-मिनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल विकसित कर रहे हैं। इन मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें पारंपरिक बड़े लॉन्चर की जरूरत नहीं होती। इन्हें केवल 80 मिमी की एंटी-एयरक्राफ्ट गन से दागा जा सकता है, जो आमतौर पर गोलाबारी के लिए इस्तेमाल होती है। फायर होने के बाद यह मिसाइल मैक 6 की रफ्तार तक पहुंच सकती है, यानी ध्वनि की गति से लगभग छह गुना तेज। इतनी तेज स्पीड के कारण यह पारंपरिक एंटी-एयरक्राफ्ट शेल्स से कहीं ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है।
कहां और किसे निशाना बना सकती है यह मिसाइल?
जानकारी के मुताबिक, यह मिसाइल करीब 32,800 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे फाइटर जेट्स या ड्रोन को 20 किलोमीटर से ज्यादा दूरी से निशाना बना सकती है। इसका मतलब है कि दुश्मन के हवाई प्लेटफॉर्म सुरक्षित दूरी मानकर जिस दायरे में उड़ान भरते हैं, वहां भी यह हथियार प्रभावी साबित हो सकता है।
दुश्मन को प्रतिक्रिया का मौका ही नहीं मिलता
इस मिसाइल की रफ्तार और छोटा आकार इसे और भी खतरनाक बना देता है। किसी दुश्मन विमान को यह मिसाइल तब तक दिखाई ही नहीं देती, जब तक वह महज 3 किलोमीटर की दूरी पर न पहुंच जाए। इस स्थिति में पायलट के पास प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ सेकंड का समय मिलता है। इतनी कम दूरी पर भी मिसाइल की रफ्तार लगभग मैक 3.6 बनी रहती है, जिससे किसी भी तरह के काउंटरमेजर या बचाव प्रणाली के कारगर होने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
99 फीसदी मारक क्षमता का दावा
कंप्यूटर सिमुलेशन के आधार पर यह दावा किया गया है कि अगर लक्ष्य अचानक लगभग 90 डिग्री का तेज मोड़ भी ले ले, तब भी यह हाइपरसोनिक मिसाइल अपनी दिशा बदलकर लक्ष्य को भेद सकती है। इसी वजह से इसकी किल प्रॉबेबिलिटी यानी लक्ष्य को नष्ट करने की संभावना करीब 99 फीसदी बताई जा रही है। स्पीड और सटीकता के इसी मेल से इसे आधुनिक युद्ध के लिए एक बेहद प्रभावी हथियार माना जा रहा है।
युद्ध के नियम कैसे बदल सकता है ये छोटा मिसाइल?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह तकनीक सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। एक सामान्य एंटी-एयरक्राफ्ट गन हर सेकंड एक फायर कर सकती है। अगर इन गनों में पारंपरिक मध्यम और छोटी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलों की जगह ये हाइपरसोनिक सिस्टम लगाए जाते हैं, तो हवाई युद्ध का पूरा समीकरण बदल सकता है। इन मिसाइलों की अपेक्षाकृत कम लागत और बड़े पैमाने पर उपलब्धता भी इन्हें भविष्य की लड़ाइयों के लिए आकर्षक विकल्प बनाती है।
क्यों बढ़ी वैश्विक चिंता?
कब, कैसे और किस स्तर पर इन मिसाइलों को तैनात किया जाएगा, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि अगर यह तकनीक व्यापक रूप से इस्तेमाल में आई, तो मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को नए सिरे से सोचने की जरूरत पड़ेगी। यही कारण है कि चीन की यह पहल अब केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा बहस का विषय बनती जा रही है।
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