20 साल पहले लापता हुए शख्स को WhatsApp ने परिजनों से मिलाया, पढ़िए महावीर सिंह की कहानी 

प्रदीप पांडे
बीबीसी हिन्दी, अमर उजालाप्रदीप पांडे
Tue, 08 Jan 2019 01:01 PM IST
mahavir singh Reunites With His Family After 20 Years With The Help Of whatsapp
whatsapp mahavir singh

    व्हाट्सऐप एक ओर जहां अफवाह फैलाने के लिए बदनाम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर यह लोगों के मिलाने का भी काम कर रहा है। व्हाट्सऐप की वजह से ही 20 साल पहले लापता हुआ महावीर सिंह चौहान आज अपने परिवार के पास पहुंच गए हैं। राजस्थान के एक बड़े घराने से आने वाले महावीर सिंह धातु कारोबारी थे जिसमें उन्हें भारी घाटा हुआ और फिर 1998 में वो मुंबई से लापता हो गए। घर के बड़े लोगों से अपमानित होने के डर से वो राजस्थान के झालौर जिले के झाब इलाके में अपने घरवालों को बिना कुछ बताए बेंगलुरु चले गए। वहाँ गुलाबों की खेती के लिए भारत भर में मशहूर डोडाबल्लापुर में उन्होंने ड्राइवर, फोटोग्राफर का काम किया और बाद में एक गुलाब फार्म में सुपरवाइजर के पद पर काम करने लगे।

    ड्राइविंग लाइसेंस से परिजनों के बारे में जानकारी मिली

    whatsapp mahavir singh
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    पिछले सप्ताह शनिवार की सुबह उनके सहकर्मी रवि ने उन्हें जमीन पर गिरा पड़ा देखा। उनका दायाँ हाथ और पैर काम नहीं कर रहे थे। रवि ने तत्काल महावीर सिंह के पुराने दोस्त किशोर सिंह दफ्तरी से संपर्क किया जो एक फोटोग्राफर हैं। रवि महावीर को पास के एक अस्पताल ले गए जिसने उन्हें नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेन्टल हैल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहांस) रेफर कर दिया। दफ्तरी कहते हैं, "वह पिछले कुछ हफ्तों से कमजोर हो गए थे और उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। उन्होंने पीठ दर्द की शिकायत की थी और शायद इस वजह से रात में वह गिर गए।" इस बीच किशोर सिंह दफ्तरी को महावीर के एक और दोस्त से उनका ड्राइविंग लाइसेंस मिला जिस पर उनके पिता का नाम लिखा था और साथ ही यह जानकारी भी थी कि वो जालौर के रहने वाले हैं।

    व्हाट्सऐप ग्रुप में शेयर किय मैसेज

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    किशोर ने इसके बाद एक और दोस्त से संपर्क किया जो जालौर से थे। उन्होंने कहा, "हमने राजस्थान समाज नाम के एक ग्रुप पर शनिवार शाम को मैसेज किया और दस मिनट के भीतर हमारे पास कॉल आने लगे और आख़िर में उनके बेटे प्रद्युम्न ने कॉल किया।" किशोर ने बताया कि इसके बाद रात भर महावीर के रिश्तेदारों के फोन आते रहे और रविवार को प्रद्युम्न सिंह ने निमहांस में अपने पिता के पैर छुए। उन्होंने आखिरी बार जब अपने पिता को देखा था तब वो मात्र चार साल के थे। पिता के लापता होने के समय उनका एक छोटा भाई भी था जो तब केवल एक साल का था। प्रद्युमन का कहना है कि महावीर के भाव ऐसे थे जिनके बारे में वह कह नहीं सकते। वह अपने पिता को देखकर भावुक और निःशब्द हो गए थे।

    प्रद्युम्न कहते हैं, "मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। हमने उनसे मिलने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी थी। यह बहुत बड़ी बात है हमारे लिए। उन्होंने मुझे पहचाना है।" वह कहते हैं, "इन सारे वर्षों में मैंने कभी अपनी मां से कुछ नहीं कहा। हमें पता था कि क्या हुआ था।" महावीर सिंह फिलहाल बेंगलुरु के अपोलो अस्पताल के आईसीयू में हैं जहाँ उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने अपनी पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा, "हमें संदेह है कि रीड़ की हड्डी पर दबाव पड़ने से उनके हाथ-पैर में कमजोरी आ गई है।"

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