कौन हैं रोशिबिना देवी?: चयन विवाद के बीच आखिरी समय में टीम में आईं; भारत को दिलाया रजत, लगाई पदकों की हैट्रिक
रोशिबिना देवी नाओरेम ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में महिलाओं के 60 किग्रा सांडा में रजत जीता। टीम में उनका चयन दिव्यांशी चौधरी की चोट के बाद आखिरी समय में हुआ था और इसे लेकर विवाद भी हुआ। इससे पहले रोशिबिना 2018 में कांस्य और 2023 में रजत जीत चुकी थीं।
विस्तार
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई मायाई लीकाई में 30 दिसंबर 2000 को जन्मीं रोशिबिना देवी नाओरेम वुशु की सांडा स्पर्धा में भारत की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। एशियन गेम्स में उनका सफर 2018 से शुरू हुआ और अब वह लगातार तीसरे एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली भारतीय महिला वुशु खिलाड़ी बन गई हैं।
आइची-नागोया एशियन गेम्स से पहले रोशिबिना का भारतीय टीम में चयन विवादों में रहा। उन्हें टीम में आखिरी समय पर दिव्यांशी चौधरी की जगह शामिल किया गया था। इसके बाद चयन और मेडिकल रिपोर्ट को लेकर सवाल उठे। हालांकि, रोशिबिना ने रिंग में उतरकर एक बार फिर अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई और महिलाओं के 60 किग्रा सांडा में रजत पदक जीता।
रोशिबिना ने 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में महिलाओं के 60 किग्रा सांडा वर्ग में हिस्सा लिया था। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में पाकिस्तान की मुबाशरा अख्तर को हराकर पदक पक्का किया था। हालांकि, सेमीफाइनल में उन्हें चीन की काई यिंगयिंग से हार मिली और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। इसके पांच साल बाद 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में रोशिबिना ने एक कदम आगे बढ़ाया। उन्होंने महिलाओं के 60 किग्रा सांडा के फाइनल में जगह बनाई, जहां चीन की वू शियाओवेई से हारकर रजत पदक जीता। हांगझोउ में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 2023 के अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- इस बार रोशिबिना का एशियन गेम्स टीम में पहुंचना आसान नहीं रहा। इसी साल 22 अगस्त को खेल मंत्रालय की ओर से जारी भारत की सात सदस्यीय वुशु टीम में महिलाओं के 60 किग्रा सांडा वर्ग के लिए दिव्यांशी चौधरी का नाम था। बाद में चोट के कारण उनकी जगह रोशिबिना को शामिल किया गया।
- वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WAI) के मुताबिक, दिव्यांशी के एमआरआई में घुटने में गंभीर आंशिक एसीएल टियर और काफी मात्रा में सूजन सामने आई थी। महासंघ ने कहा कि मेडिकल सलाह के अनुसार उन्हें पूरी तरह ठीक होने तक प्रतियोगिता और पूर्ण प्रशिक्षण से दूर रहने की सलाह दी गई थी।
- दिव्यांशी ने शुरुआत में इस फैसले का विरोध किया था। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया गया और रोशिबिना पर भी उनके और उनके परिवार के उत्पीड़न में शामिल होने का आरोप लगाया।
- दिव्यांशी ने कहा था, 'मैं सच में बहुत परेशान हो चुकी हूं। जून, जुलाई से अब सितंबर हो गया है और मुझे लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है, क्योंकि वह (रोशिबिना) एशियन गेम्स में जाना चाहती थीं।'
- उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्होंने चयन ट्रायल में रोशिबिना को हराया था और सवाल उठाया था कि चोट के बावजूद डॉक्टरों की अनुमति होने की बात कहने के बाद उन्हें टीम से क्यों हटाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी।
- वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दिव्यांशी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें हटाने का फैसला रोशिबिना को टीम में शामिल करने के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह मेडिकल आधार पर लिया गया। महासंघ के अनुसार, दिव्यांशी को जून में चीन के हुबेई में हुई 2026 एससीओ वुशु सांडा चैंपियनशिप के दौरान चोट लगी थी। करीब एक महीने घर पर रहने के बाद वह 10 अगस्त को एनआईएस पटियाला के राष्ट्रीय शिविर में लौटी थीं।
- प्रशिक्षण के दौरान दर्द की शिकायत के बाद उनकी स्थिति बिगड़ी और 23 अगस्त को पटियाला के मणिपाल अस्पताल में एमआरआई कराया गया। डब्ल्यूएआई के अनुसार, रिपोर्ट में आंशिक हाई-ग्रेड एसीएल टियर और काफी सूजन की बात सामने आई। महासंघ ने बताया कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मेडिकल अधिकारियों और एक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर ने रिपोर्ट की समीक्षा की और प्रतियोगिता से दूर रहने की सलाह दी। महासंघ के मुताबिक, सर्जरी की सलाह भी दी गई थी।
- बाद में दिव्यांशी ने इस फैसले को स्वीकार करते हुए माना कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और 2030 एशियन गेम्स में मजबूत वापसी की इच्छा जताई। हालांकि, उन्होंने रोशिबिना पर उत्पीड़न के अपने आरोप दोहराए।
स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री ने चोट के कारण खिलाड़ी के स्थान पर बदलाव की प्रक्रिया के तहत रोशिबिना को भारतीय टीम में शामिल करने की मंजूरी दी। आइची-नागोया में रोशिबिना ने सोमवार को प्री-क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश की शिका खातून को हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उन्होंने मकाऊ चीन की चू मैन सिन को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
सेमीफाइनल में जीत के साथ उन्होंने फाइनल में प्रवेश किया और लगातार तीसरे एशियन गेम्स में पदक पक्का कर लिया। फाइनल में चीन की झांग शियाओयू से 0-2 से हार के बाद उन्हें रजत पदक मिला। इस तरह रोशिबिना ने 2018 में कांस्य, 2023 में रजत और 2026 में फिर रजत पदक जीता। तीन लगातार एशियन गेम्स में पदक जीतकर उन्होंने भारतीय वुशु में अपनी जगह और मजबूत की।
रोशिबिना देवी का पदक रिकॉर्ड
| प्रतियोगिता | वर्ष/स्थान | स्पर्धा | पदक |
|---|---|---|---|
| एशियन गेम्स | 2026, आइटी-नागोया | महिलाओं की सांडा 60 किग्रा | रजत |
| एशियन गेम्स | 2022, हांगझोउ | महिलाओं की सांडा 60 किग्रा | रजत |
| एशियन गेम्स | 2018, जकार्ता | महिलाओं की सांडा 60 किग्रा | कांस्य |
| दक्षिण एशियाई खेल | 2019, काठमांडू-पोखरा | सांडा 60 किग्रा | स्वर्ण |
| विश्व जूनियर चैंपियनशिप | 2016, बर्गास | लड़कियों की 48 किग्रा | कांस्य |
एशियन गेम्स में: 3 पदक- 2 रजत और 1 कांस्य।
कुल पदक: 5 पदक- 1 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य।