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एशियाड में क्यों गिरा भारत का प्रदर्शन?: खेल मंत्रालय ने महासंघों से मांगा जवाब, खिलाड़ियों की चोट पर उठे सवाल
Thu, 15 Oct 2026 07:03 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Thu, 15 Oct 2026 07:03 PM IST
सार
एशियन गेम्स में भारत के अपेक्षा से कम प्रदर्शन को लेकर खेल मंत्रालय ने समीक्षा बैठक की। बैठक में एथलेटिक्स और बैडमिंटन में पदकों की संख्या घटने और ज्योति याराजी, प्रवीण चित्रवेल और अविनाश साबले जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस पर चर्चा हुई।
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पीटी उषा और मनसुख मांडविया
- फोटो : PTI
विस्तार
एशियन गेम्स में भारत के उम्मीद से कम प्रदर्शन को लेकर खेल मंत्रालय ने समीक्षा बैठक की। गुरुवार को आयोजित इस बैठक में एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसे पदक दिलाने वाले खेलों में भारत के कमजोर प्रदर्शन पर चर्चा हुई। साथ ही, प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने के बावजूद एशियाड में हिस्सा लेने के लिए भेजे जाने पर भी सवाल उठाए गए।
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बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
खेल मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (आओए) की अध्यक्ष पीटी उषा, खेल सचिव हरि रंजन राव, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के सीईओ एनएस जोहल और विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (आओए) की अध्यक्ष पीटी उषा, खेल सचिव हरि रंजन राव, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के सीईओ एनएस जोहल और विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई।
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85 पदकों के साथ लौटा भारत, पिछले प्रदर्शन से पिछड़ा
भारत ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में कुल 85 पदक जीते, जिनमें 21 स्वर्ण शामिल रहे। यह प्रदर्शन पिछले एशियाई खेलों के मुकाबले कमजोर रहा। चीन के हांगझोउ में हुए पिछले संस्करण में भारत ने 106 पदक अपने नाम किए थे। बैठक में खेल महासंघों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि खिलाड़ियों की तैयारी के लिए संसाधनों और आर्थिक सहायता की कमी को अब खराब प्रदर्शन का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खेल मंत्री ने महासंघों से कहा कि उन्हें सिर्फ प्रस्तुतियां देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मैदान पर परिणाम भी दिखाने होंगे। हालांकि, बैठक में किसी एक महासंघ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई या किसी बड़े फैसले की जानकारी सामने नहीं आई।
भारत ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में कुल 85 पदक जीते, जिनमें 21 स्वर्ण शामिल रहे। यह प्रदर्शन पिछले एशियाई खेलों के मुकाबले कमजोर रहा। चीन के हांगझोउ में हुए पिछले संस्करण में भारत ने 106 पदक अपने नाम किए थे। बैठक में खेल महासंघों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि खिलाड़ियों की तैयारी के लिए संसाधनों और आर्थिक सहायता की कमी को अब खराब प्रदर्शन का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खेल मंत्री ने महासंघों से कहा कि उन्हें सिर्फ प्रस्तुतियां देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मैदान पर परिणाम भी दिखाने होंगे। हालांकि, बैठक में किसी एक महासंघ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई या किसी बड़े फैसले की जानकारी सामने नहीं आई।
ज्योति याराजी
- फोटो : ANI
ज्योति याराजी और प्रवीण चित्रवेल की चोटों पर चर्चा
एथलेटिक्स में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के दौरान प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस का मुद्दा भी उठा। बाधा दौड़ की खिलाड़ी ज्योति याराजी और ट्रिपल जंपर प्रवीण चित्रवेल की चोटों का जिक्र किया गया। इन खिलाड़ियों की चोटों की जानकारी एशियाई खेलों के दौरान सामने आने से उनकी तैयारी और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे।
बताया जाता है कि भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) के सलाहकार एडिले सुमारीवाला की प्रस्तुति के दौरान यह मुद्दा उठाया। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, खेल मंत्री ने चर्चा को किसी एक खिलाड़ी के मामले तक सीमित रखने के बजाय पूरे प्रदर्शन के विश्लेषण पर ध्यान देने को कहा।
एथलेटिक्स में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के दौरान प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस का मुद्दा भी उठा। बाधा दौड़ की खिलाड़ी ज्योति याराजी और ट्रिपल जंपर प्रवीण चित्रवेल की चोटों का जिक्र किया गया। इन खिलाड़ियों की चोटों की जानकारी एशियाई खेलों के दौरान सामने आने से उनकी तैयारी और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे।
बताया जाता है कि भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) के सलाहकार एडिले सुमारीवाला की प्रस्तुति के दौरान यह मुद्दा उठाया। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, खेल मंत्री ने चर्चा को किसी एक खिलाड़ी के मामले तक सीमित रखने के बजाय पूरे प्रदर्शन के विश्लेषण पर ध्यान देने को कहा।
अविनाश साबले
- फोटो : ANI/ SAI Media/X
अविनाश साबले की फिटनेस भी सवालों के घेरे में
भारत के स्टार धावक अविनाश साबले की फिटनेस को लेकर भी सवाल उठे। साबले ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में चौथा स्थान हासिल किया, लेकिन इसके बाद 5000 मीटर दौड़ में शुरुआत नहीं की। साबले पिछले एशियन गेम्स में 3000 मीटर स्टीपलचेज के स्वर्ण पदक विजेता थे। उन्होंने हांगझोउ में 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक भी जीता था। ऐसे में इस बार उनका अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाना भारत के लिए निराशाजनक रहा।
भारत के स्टार धावक अविनाश साबले की फिटनेस को लेकर भी सवाल उठे। साबले ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में चौथा स्थान हासिल किया, लेकिन इसके बाद 5000 मीटर दौड़ में शुरुआत नहीं की। साबले पिछले एशियन गेम्स में 3000 मीटर स्टीपलचेज के स्वर्ण पदक विजेता थे। उन्होंने हांगझोउ में 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक भी जीता था। ऐसे में इस बार उनका अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाना भारत के लिए निराशाजनक रहा।
एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक छह से घटकर एक रह गया
एथलेटिक्स में भारत का प्रदर्शन इस बार खास तौर पर कमजोर रहा। पिछले एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में छह स्वर्ण पदक जीते थे, जबकि इस बार केवल एक स्वर्ण पदक ही मिल सका। एथलेटिक्स में भारत के कुल पदकों की संख्या भी घट गई। पिछले संस्करण में मिले 29 पदकों की तुलना में इस बार भारत को 24 पदक मिले, यानी पांच पदक कम।
एथलेटिक्स में भारत का प्रदर्शन इस बार खास तौर पर कमजोर रहा। पिछले एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में छह स्वर्ण पदक जीते थे, जबकि इस बार केवल एक स्वर्ण पदक ही मिल सका। एथलेटिक्स में भारत के कुल पदकों की संख्या भी घट गई। पिछले संस्करण में मिले 29 पदकों की तुलना में इस बार भारत को 24 पदक मिले, यानी पांच पदक कम।
मीराबाई चानू
- फोटो : PTI
'हमें 10 और मीराबाई चानू तैयार करनी होंगी'
खेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मनसुख मांडविया ने महासंघों से भविष्य के लिए युवा प्रतिभाओं की मजबूत श्रृंखला तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा, 'आखिर कब तक मीराबाई चानू अकेले हमारे लिए पदक जीतती रहेंगी? हमें 10 और मीराबाई चानू तैयार करनी होंगी। हर महासंघ को इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा।' मांडविया ने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान करने, उन्हें सही प्रशिक्षण देने और ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है, जिसमें खिलाड़ी उच्चतम स्तर तक पहुंच सकें।
उन्होंने खेल मनोवैज्ञानिकों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और हाई-परफॉर्मेंस मेंटल ट्रेनरों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खिलाड़ियों को मानसिक दबाव और एकाग्रता की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने में इन विशेषज्ञों की भूमिका अहम है। खेल मंत्री ने महासंघों से अधिक प्रतियोगिताएं आयोजित करने, खिलाड़ियों की तैयारी मजबूत करने और प्रदर्शन के साथ-साथ प्रशासनिक कमियों का भी ईमानदारी से आकलन करने की अपील की।
खेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मनसुख मांडविया ने महासंघों से भविष्य के लिए युवा प्रतिभाओं की मजबूत श्रृंखला तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा, 'आखिर कब तक मीराबाई चानू अकेले हमारे लिए पदक जीतती रहेंगी? हमें 10 और मीराबाई चानू तैयार करनी होंगी। हर महासंघ को इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा।' मांडविया ने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान करने, उन्हें सही प्रशिक्षण देने और ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है, जिसमें खिलाड़ी उच्चतम स्तर तक पहुंच सकें।
उन्होंने खेल मनोवैज्ञानिकों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और हाई-परफॉर्मेंस मेंटल ट्रेनरों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खिलाड़ियों को मानसिक दबाव और एकाग्रता की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने में इन विशेषज्ञों की भूमिका अहम है। खेल मंत्री ने महासंघों से अधिक प्रतियोगिताएं आयोजित करने, खिलाड़ियों की तैयारी मजबूत करने और प्रदर्शन के साथ-साथ प्रशासनिक कमियों का भी ईमानदारी से आकलन करने की अपील की।
मुक्केबाजी में ऐतिहासिक प्रदर्शन, तीन स्वर्ण पदक
जहां एथलेटिक्स और बैडमिंटन ने निराश किया, वहीं मुक्केबाजी में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएआई) ने तीन स्वर्ण पदक जीतने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि निरंतर संस्थागत सहयोग मिलने पर भविष्य में भी बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। हालांकि, बीएफआई के अध्यक्ष अजय सिंह और सचिव प्रमोद कुमार के बीच जारी आंतरिक विवाद का मुद्दा समीक्षा बैठक में नहीं उठा। दोनों पदाधिकारियों ने एक-दूसरे को निलंबित किया है और इसके लिए विभिन्न नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया है।
जहां एथलेटिक्स और बैडमिंटन ने निराश किया, वहीं मुक्केबाजी में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएआई) ने तीन स्वर्ण पदक जीतने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि निरंतर संस्थागत सहयोग मिलने पर भविष्य में भी बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। हालांकि, बीएफआई के अध्यक्ष अजय सिंह और सचिव प्रमोद कुमार के बीच जारी आंतरिक विवाद का मुद्दा समीक्षा बैठक में नहीं उठा। दोनों पदाधिकारियों ने एक-दूसरे को निलंबित किया है और इसके लिए विभिन्न नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया है।
शूटिंग में भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं
शूटिंग में, खासकर पिस्टल स्पर्धाओं में, भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी इस बार पदक जीतने में नाकाम रहीं। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ की ओर से बैठक में उसके सचिव पवनकुमार सिंह शामिल हुए।
शूटिंग में, खासकर पिस्टल स्पर्धाओं में, भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी इस बार पदक जीतने में नाकाम रहीं। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ की ओर से बैठक में उसके सचिव पवनकुमार सिंह शामिल हुए।
बैडमिंटन में सिर्फ एक कांस्य, सात्विक-चिराग का बाहर होना बड़ा झटका
बैडमिंटन में भारत को केवल पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य पदक मिला। पुरुष युगल में मौजूदा चैंपियन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का पहले ही दौर में बाहर हो जाना सबसे बड़ी निराशाओं में शामिल रहा। इस प्रदर्शन के पीछे खिलाड़ियों का व्यस्त कार्यक्रम भी एक वजह बताया गया। कार्यक्रम के दबाव के कारण कुछ खिलाड़ियों को 24 घंटे से भी कम समय के अंतराल में एक से अधिक मुकाबले खेलने पड़े। इसके विपरीत, तीरंदाजी, पुरुष और महिला हॉकी टीमों, मुक्केबाजी तथा महिला गोल्फ में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। भारत के 21 में से 11 स्वर्ण पदक प्रतियोगिता के आखिरी दो दिनों में आए।
तैयारी पर खर्च हुए 700 करोड़ रुपये से अधिक
खेल मंत्रालय ने एशियाई खेलों से पहले बताया था कि तीन साल के तैयारी चक्र में भारतीय खिलाड़ियों पर 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। भारत ने प्रतियोगिता में 501 खिलाड़ियों का बड़ा दल भेजा था। इतने बड़े निवेश और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराए गए संसाधनों के बावजूद पदकों की संख्या में आई गिरावट ने प्रशिक्षण, फिटनेस प्रबंधन, प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम और महासंघों की जवाबदेही पर नए सवाल खड़े किए हैं।
बैडमिंटन में भारत को केवल पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य पदक मिला। पुरुष युगल में मौजूदा चैंपियन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का पहले ही दौर में बाहर हो जाना सबसे बड़ी निराशाओं में शामिल रहा। इस प्रदर्शन के पीछे खिलाड़ियों का व्यस्त कार्यक्रम भी एक वजह बताया गया। कार्यक्रम के दबाव के कारण कुछ खिलाड़ियों को 24 घंटे से भी कम समय के अंतराल में एक से अधिक मुकाबले खेलने पड़े। इसके विपरीत, तीरंदाजी, पुरुष और महिला हॉकी टीमों, मुक्केबाजी तथा महिला गोल्फ में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। भारत के 21 में से 11 स्वर्ण पदक प्रतियोगिता के आखिरी दो दिनों में आए।
तैयारी पर खर्च हुए 700 करोड़ रुपये से अधिक
खेल मंत्रालय ने एशियाई खेलों से पहले बताया था कि तीन साल के तैयारी चक्र में भारतीय खिलाड़ियों पर 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। भारत ने प्रतियोगिता में 501 खिलाड़ियों का बड़ा दल भेजा था। इतने बड़े निवेश और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराए गए संसाधनों के बावजूद पदकों की संख्या में आई गिरावट ने प्रशिक्षण, फिटनेस प्रबंधन, प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम और महासंघों की जवाबदेही पर नए सवाल खड़े किए हैं।
एशियन गेम्स 2026
- फोटो : Ani
2030 एशियन गेम्स में शीर्ष तीन में आने का लक्ष्य
खेल सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि भारत को 2030 में दोहा में होने वाले एशियाड में शीर्ष तीन देशों में जगह बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों को भी भारत के लिए बड़ी राष्ट्रीय चुनौती बताया। अहमदाबाद में प्रस्तावित इन खेलों की मेजबानी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों से अभी से तैयारी शुरू करने और प्रतियोगिता को गंभीरता से लेने का आह्वान किया।
खेल सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि भारत को 2030 में दोहा में होने वाले एशियाड में शीर्ष तीन देशों में जगह बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों को भी भारत के लिए बड़ी राष्ट्रीय चुनौती बताया। अहमदाबाद में प्रस्तावित इन खेलों की मेजबानी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों से अभी से तैयारी शुरू करने और प्रतियोगिता को गंभीरता से लेने का आह्वान किया।