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मौत को मात नहीं दे पाए ये नायक

Mon, 22 Oct 2012 11:29 AM IST
नई दिल्ली/सौरभ गुप्ता
नई दिल्ली/सौरभ गुप्ता Updated Mon, 22 Oct 2012 11:29 AM IST
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players who could not win battle of life on racing tracks

दुनिया के सबसे खतरनाक खेलों में शुमार एफ-1 में ड्राइवर अपनी जान हथेली पर लेकर ट्रैक पर उतरता है। हवा से बातें करती कारें जब ट्रैक पर दौड़ती हैं तो दर्शकों की सांस अटक जाती है। लेकिन ऐसे में ड्राइवर की एक छोटी सी चूक जानलेवा साबित होती है। एफ-1 ने भले ही दुनिया को रोमांच की सौगात दी है लेकिन इस खेल ने कई दिग्गज ड्राइवरों की जिंदगी भी छीनी है। ये वे दिग्गज थे जो जिए भी एफ-1 के लिए और मरे भी एफ-1 के लिए।

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धीरे-धीरे बढ़े सुरक्षा के उपाय
1950 : से 1960 तक एफ-1 में ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं थे।
1960 : के बाद से एफ-1 में ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए हेलमेट और ड्राइविंग सूट अनिवार्य हुआ।
1970 : में कॉकपिट का इस्तेमाल शुरू हुआ जिससे किसी हादसे के बाद ड्राइवर को तुरंत वहां बचाया जा सके।
1980 : में एफ-1 कार का बाहरी ढांचा एलम्यूनियम के बजाय कार्बन फाइबर का बनने लगा।
1994 : आर्यटन सेना की मौत के बाद एफ-1 में तेजी से कई सुरक्षा उपाय शुरू किए गए।
1998 : से रेसिंग सिल्क टायर के स्थान पर ग्रुव्ड टायर का उपयोग शुरू हुआ।

रेसिंग में गई जान
49 : ड्राइवर एफ-1 के 1952 से अभी तक दुर्घटना में मौत का शिकार हुए हैं।
32 : ड्राइवर ने वर्ल्ड चैंपियनशिप ग्रां प्री के दौरान अभी तक दुर्घटना में अपनी जान गंवाई।
14 : ड्राइवर सर्वाधिक 1950 में दुर्घटना के दौरान का मौत के मुंह में गए।

1994 के बाद बदली तस्वीर
ब्राजील ड्राइवर आर्यटन सेना की 1994 में हुई मौत के बाद एफआईए ने सुरक्षा की दिशा में तेजी से कई कदम उठाए। इसी का नतीजा है कि 1994 के बाद से अभी तक ट्रैक पर कोई ड्राइवर मौत के मुंह में नहीं गया।
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इन चैंपियनों की ट्रैक पर खत्म हुई जिंदगी
02 : चैंपियनों ने एफ-1 के इतिहास में अभी तक अपनी जान गंवाई है।

-आर्यटन सेना (ब्राजील)
1984 से 1994
चैंपियनशिप : 03
रेस जीती : 41
ब्राजील के आर्यटन सेना की ट्रैक पर दुर्घटना में हुई मौत एफ-1 इतिहास की सबसे दुखद मौत है। तीन बार के चैंपियन आर्यटन एफ-1 के अभी तक के सबसे बेहतरीन ड्राइवर माने जाते हैं। 32 साल की उम्र में आर्यटन 1994 सेन मारिनो ग्रांप्री के दौरान कार का एक्सीडेंट हो जाने पर अपनी जान गंवा बैठे। सातवें लैप के दौरान उनकी कार टैमबुरेलो कॉर्नर से टर्न लेने के दौरान करीब 135 किमी प्रति घंटे की स्पीड से कंक्रीट की दीवार से टकरा गई। दुर्घटना से सिर्फ दो मिनट के अंदर प्रोफेसर सिड वाटकिंस और मेडिकल टीम ने उन्हें कार से निकाल लिया। अस्पताल पहुंचने के एक घंटे बाद सेना को मृत घोषित कर दिया गया।  उनकी लोकप्रियता का अंदाज इसी बात से लगता है कि उनकी अंतिम यात्रा में करीब तीन मिलियन लोग शामिल हुए थे और ब्राजील सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया था।
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-जोचेन रिंड् (आस्ट्रिया)
1964 से 1970
चैंपियनशिप : 01
रेस जीती : 06
आस्ट्रिया के 28 वर्षीय जोचेन रिंड् का कार 1970 इटालियन ग्रां प्री के दौरान अभ्यास करते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गई। एफ-1 इतिहास के वह एकमात्र ऐसे ड्राइवर हैं जिन्होंने मरणोपरांत वर्ल्ड चैंपियनशिप (1970) का खिताब मिला। उस दिन जोचेन ने अपनी कार की सर्वश्रेष्ठ स्पीड 205 किमी प्रति घंटे से ज्यादा बढ़ाने के लिए उसमें हाई गियर रेटियो फिट किया था। फाइनल प्रैक्टिस सेशन के पांचवें लैप के दौरान जोचेन की कार थोड़ी डगमगाई और फिर  किनारे पर लगे बैरियर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। अस्पताल पहुंचने पर जोचेन को मृत घोषित कर दिया गया।  


कैमरून थे जान गंवाने वाले पहले ड्राइवर
29 वर्षीय ब्रिटिश कैमरून अर्ल इंग्लिश रेसिंग ऑटोमोबाइल टीम के तकनीकी सलाहकार थे। 18 जून 1952 को वारविकशायर स्थित न्यूनेटन ट्रैक पर उनकी कार पलट गई। अस्पताल ले जाने पर स्कल फ्रैंक्चर के कारण उनकी मौत हो गई।

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