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खिलाड़ियों के शरीर पर बना ये लाल निशान क्या है?

Tue, 09 Aug 2016 03:00 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Tue, 09 Aug 2016 03:00 PM IST
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why olympians have big red circles all over the skin
- फोटो : bbc
रियो ओलंपिक में भाग लेने वाले बहुत से खिलाड़ियों के शरीर पर लाल चकत्ते दिख रहे हैं। ओलंपिक में अब तक कुल 19 स्वर्ण पदक जीतने वाले तैराक माइकल फलेप्स के शरीर पर लाल चकत्ते वाली तस्वीरें सामने आई हैं। आइए जानते हैं कि ये लाल चकत्ते हैं क्या और कैसे बने हैं खिलाड़ियों के शरीर पर।
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दरअसल ये निशान पुरानी चिकित्सा पद्धति एक्यूपंचर के ही एक प्रकार 'कपिंग' की वजह से पड़े हैं। इसमें गर्म कप को त्वचा पर रखकर दर्द का इलाज किया जाता है। कपिंग में ज्वलनशील पदार्थ को शीशे के एक कप में जलाया जाता है। लौ के बुझने के बाद तापमान कम होने से पैदा हुए खिंचाव से त्वचा खींच कर शीशे के कप से चिपक जाती है।
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इस खिंचाव से त्वचा शीरर से अलग खींच जाती है। इससे खून का बहाव बढ़ जाता है और वहां लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। ये निशान आमतौर पर तीन-चार दिन में खत्म हो जाते हैं।खिलाड़ियों का कहना है कि वो इस चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल दर्द मिटाने और लगातार प्रशिक्षण और खेलने से पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए करते हैं।
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इसने मुझे अत्यधिक दर्द से बचाया

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दर्द मिटाने की बहुत सी और तकनीक हैं जैसे, मालिश, सुना, आइस बाथ और खास तरह के कपड़े शामिल हैं। लेकिन अमरीकी जिमनास्ट एलेक्स नाडूर ने अमरीकी अखबार 'यूएसए टुडे' से कहा कि कपिंग उनमें से बेहतर है, जिनपर मैंने अबतक पैसे खर्च किए हैं। उन्होंने कहा, ''इस पूरे साल में मैंने खुद को स्वस्थ्य रखने के लिए यह किया। इसने मुझे अत्यधिक दर्द से बचाया।''

उनकी टीम के कप्तान क्रिस ब्रूक्स ने कहा कि उनकी टीम के कई सदस्यों ने खुद ही कपिंग करना शुरू कर दिया है। इसके लिए वो ज्वलनशील पदार्थ के अलावा चूसने वाले पंप का सहारा ले रहे हैं।

रविवार को जब फ्लेप्स ने चार गुणा सौ मीटर की फ्रीस्टाइल जीती तो उनके शरीर पर ये लाल चकत्ते साफ नजर आ रहे थे। इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए।

कुछ लोगों का अनुमान था कि यह किसी रंगीन बाल से खेलने की वजह से हुआ है या किसी बड़े ऑक्टोपस के हमले की वजह से हुआ है। केवल खिलाड़ी ही इस तकनीक का प्रयोग नहीं करते हैं, बल्कि बेहतर इलाज की तलाश कर रहे बड़े अभिनेता-अभिनेत्रियों में भी लोकप्रिय है।

साल 2004 में ग्येनेथ पाल्ट्रो एक फिल्म के प्रिमियर में अपनी पीठ पर कपिंग के निशान के साथ पहुची थीं। जस्टिन बीबर, विक्टोरिया बैखहम, जेनिफर एनिस्टान की कपिंग के निशान की तस्वीरें सामने आईं हैं।

 कपिंग की शुरुआत करीब तीन हजार साल पहले चीन में हुई थी

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ब्यूटी पार्लर और स्पा में यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह पारंपरिक चीनी मेडिकल स्टोर में आमतौर पर उपलब्ध रहता है। दी ब्रिटिश एक्यूपंचर काउंसिल का कहना है कि कपिंग से दर्द नहीं होता है। खून के अनियमित बहाव और छोटी कोशिकाओं के टूटने से शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। वहीं कुछ खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा की हैं, इनसे पता चलता है कि कपिंस से उन्हें दर्द हो रहा है।

अमरीकी तैराक नाटाली कफलिन ने अपने सीने पर लगे कप की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा कि हंस इसलिए रहा हूं कि यह बहुत बुरी तरह दुख रहा है। बेलारूस के तैराक पावेल सानकोविच ने भी एक तस्वीर साझा की है, जिसपर उनके पैर में दर्जनों कप लगे हैं।

दी ब्रिटिश एक्यूपंचर काउंसिल ने चेतावनी दी है कि शीशे के गर्म कपों से त्वचा जल भी सकती है। संस्था ने लोगों से किसी कुशल चिकित्सक से करवाने की सलाह दी है। कपिंग की शुरुआत करीब तीन हजार साल पहले चीन में हुई थी। यह मिस्र, मध्य-पूर्व और दुनिया के अन्य हिस्सों में मशहूर है।
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