{"_id":"5db1dfc88ebc3e93c02b20cd","slug":"vivek-chikara-wore-gold-medal-without-national-anthem","type":"story","status":"publish","title_hn":"राष्ट्रगान के बिना मेरठ के विवेक ने पहना गोल्ड मेडल","category":{"title":"Other Sports","title_hn":"अन्य खेल","slug":"other-sports"}}
राष्ट्रगान के बिना मेरठ के विवेक ने पहना गोल्ड मेडल
Fri, 25 Oct 2019 03:59 PM IST
मुकेश कुमार झा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Fri, 25 Oct 2019 03:59 PM IST
सार
-एशियाई पैरा तीरंदाजी में पहली बार पदक मिले पर देश के लिए नहीं वर्ल्ड आर्चरी के झंडे तले
-व्यतिगत में स्वर्ण जीतने के बाद विवेक ने टीम स्पर्धा में जीता कांसा
विज्ञापन
विवेक चिकारा
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरठ के विवेक चिकारा ने गुरुवार को बैंकाक में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला स्वर्ण पदक जीता। लेकिन उन्हें न तो कोई खुशी थी और न कोई उत्साह। कारण गोल्ड मेडल पहनते वक्त न तो राष्ट्रगान की धुन थी और न ही तिरंगा फहरा रहा था। तिरंगे की जगह वर्ल्ड आर्चरी का झंडा ऊंचाइयां छू रहा था।
विज्ञापन
विवेक ने चीन के वांग को फाइनल में 7-1 से हराया। विवेक ने हरविंदर और राजेश के साथ मिलकर मलयेशिया को हराकर टीम का कांस्य भी जीता। श्यामसुंदर और ज्योति को मिक्स इवेंट के फाइनल में चीन के हाथों 144-152 से हारकर रजत से संतोष करना पड़ा। एशियाई पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पहली बार भारतीय तीरंदाजों ने एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांसा जीता। ये सभी पदक भारत के लिए नहीं बल्कि वर्ल्ड आर्चरी के लिए थे। यह सब खेल संघों में व्याप्त राजनीति के चलते भारतीय तीरंदाजी संघ को प्रतिबंधित करने के कारण हुआ।
विज्ञापन
एमबीए विवेक ने पैर गंवाने के बाद दो साल पहले शुरू की आर्चरी
एमबीए करने वाले 29 वर्षीय विवेक ने दो साल पहले सड़क दुर्घटना में अपना पैर गंवा दिया था। जिस कंपनी में काम करते थे उसने भी निकाल दिया। यही नहीं शादी की जहां बात चल रही थी वह रिश्ता भी टूट गया। पिता उन्हें मेरठ के गुरुकुल लेकर आए। 2004 के ओलंपियन और ध्यानचंद अवार्डी कोच सत्यदेव बताते हैं जहां भी वह गए विवेक उनके साथ हो लिए। वह दिल्ली आए तो विवेक ने वहां कमरा ले लिया अब वह सोनीपत में हैं तो वह वहां भी किराए पर आ गए। यह उसका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है।
विज्ञापन
भारतीय जर्सी पहनने से रोका
वर्ल्ड आर्चरी ने पहले ही बता दिया था कि भारतीय तीरंदाजों को उनके झंडे तले खेलना है। टूर्नामेंट में कहीं भी भारत का नाम नहीं लिया गया। तीरंदाज अपने साथ देश के झंडे और देश के नाम की जर्सी भी लेकर गए थे। तीरंदाजों ने पहले दिन इंडिया लिखी जर्सी पहनी, लेकिन वर्ल्ड आर्चरी ने उन्हें इसे पहनने से रोक दिया। उनसे कहा गया कि वे वर्ल्ड आर्चरी के लोगो वाली जर्सी पहनकर खेलें।
विवेक चिकारा ने कहा, 'यह अजीब से क्षण थे। मुझे खुशी नहीं थी। राष्ट्रगान बज रहा होता और देश का झंडा सामने होता तो यह गौरव की बात होती।'