अदालत से लड़ाई जीती पर फेडरेशन की राजनीति और आईओए की लापरवाही से हारे
जकार्ता एशियाई खेलों के लिए ताईक्वांडो खिलाड़ियों ने अदालती लड़ाई तो जीत ली, लेकिन जटिल तंत्र के आगे उन्हें हारना पड़ा है। एशियाई खेलों की आयोजन समिति ने तीन ताईक्वांडो खिलाड़ियों की एंट्री स्वीकार करने से इंकार कर दिया है, जिसके चलते इतने संघर्ष के बावजूद कशिश मलिक, नवजीत मान और अक्षय कुमार का इन खेलों में भाग लेने का सपना पूरा नहीं होने जा रहा है।
खेल मंत्रालय के सचिव राहुल भटनागर की जांच रिपोर्ट पर आईओए ने तीनों खिलाड़ियों की एंट्री आयोजन समिति को भेज दी थी, लेकिन देरी हो जाने के कारण इसे स्वीकारा नहीं गया है। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि योग्यता होने के बावजूद इन खिलाडिय़ों का टीम में चयन नहीं किया गया है।
पहले ताईक्वांडो फेडरेशन ने प्रारंभिक सूची में नवजीत और अक्षय का नाम नहीं डलवाया वहीं आईओए ने चयन की जिम्मेदारी होने के बावजूद एडहॉक कमेटी के संरक्षण में न ट्रायल कराए और न ही तय दिशा निर्देशों के मुताबिक खिलाड़ियों को एशियाई खेलों के दल में शामिल किया।
सूत्रों की मानें तो एशियाई खेलों के लिए आईओए की ओर से जारी प्रारंभिक सूची में पुरुष हैंडबॉल टीम का नहीं था, लेकिन इस टीम की एंट्री पहले ही कराई जा चुकी थी। जब अदालत का आदेश आया कि पुरुष हैंडबॉल टीम को जकार्ता भेजा तो उनकी एंट्री में झमेला ही नहीं पड़ा। ताईक्वांडों के केस में सिर्फ कशिश मलिक का ही नाम प्रारंभिक सूची में था, लेकिन आयोजन समिति ने उनकी भी एंट्री नहीं स्वीकारी है।
शॉटपुटर इंदरजीत ने प्रतिबंध के खिलाफ की अपील
रियो ओलंपिक से पहले डोप में फंसे शॉटपुटर इंदरजीत सिंह ने नाडा हियरिंग पैनल की ओर से लगाए गए चार साल के प्रतिबंध को चुनौती दे दी है। उन्होंने नाडा अपील पैनल के समक्ष इस प्रतिबंध के खिलाफ अपील दाखिल की है।
वहीं भारत में नेगेटिव घोषित किए जाने के बाद वाडा लैब में डोप पॉजिटिव करार दिए गए यूथ ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट डिस्कस थ्रोअर अर्जुन ने प्रतिबंध के खिलाफ अपील दाखिल कर दी है। उन पर भी नाडा हियरिंग पैनल ने चार साल का प्रतिबंध लगाया था।
बड़े खिलाड़ियों को प्रतिबंधित किए जाने के बाद उनकी ओर से अपील पहले भी दाखिल की जाती रही है। मंदीप कौर, अश्वनी अकुंजी, जोना मुर्मू, प्रियंका पंवार, रिचा मिश्रा, जितिन पॉल, गीता रानी जैसे खिलाड़ियों ने प्रतिबंध को अपील पैनल में चुनौती दी है।
अब इसी परंपरा को इंदरजीत ने भी आगे बढ़ाया है। इंदरजीत ने उनके ऊपर लगाए गए चार साल के प्रतिबंध को गलत ठहाराया है। उनके मामले में सुनवाई के दौरान नाडा की ओर से कुछ खामियां सामने आई थीं।