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अभिनव बिंद्रा: 12 साल पहले आज ही के दिन देश को मिला था 'गोल्डन ब्वॉय'
Tue, 11 Aug 2020 07:01 AM IST
योगेश साहू
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 11 Aug 2020 07:01 AM IST
सार
- निशानेबाज बिंद्रा 2008 में ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले बने थे पहले भारतीय
- 1920 के एंटवर्प खेलों में भारत ने पहली बार आधिकारिक तौर पर लिया था इन खेलों में भाग
- 06 सर्वाधिक पदक लंदन ओलंपिक 2012 में भारतीय खिलाड़ियों ने जीते थे
- 07 खेलों (हॉकी, निशानेबाजी, कुश्ती, टेनिस, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग) में ही अभी तक जीते हैं पदक
- 15 व्यक्तिगत पदकों में से सर्वाधिक पांच कुश्ती और चार निशानेबाजी में जीते हैं
- 26 पदक (9 स्वर्ण, 5 रजत, 12 कांस्य ) ही जीते भारत ने अब तक ओलंपिक में। इनमें से आठ स्वर्ण सहित रिकॉर्ड 11 पदक अकेले हॉकी से मिले
- पहलवान केडी जाधव व्यक्तिगत पदक (1952, हेलसिंकी) जीतने वाले पहले भारतीय थे
- कर्णम मल्लेश्वरी (2000 सिडनी) ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थी
- 23 जुलाई से 8 अगस्त 2021 तक होंगे टोक्यो ओलंपिक। पहले यह इसी साल 24 जुलाई में नौ अगस्त के बीच होने थे
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अभिनव बिंद्रा
- फोटो : ट्विटर
विस्तार
एक खिलाड़ी के रूप में मैंने हमेशा अपना सौ फीसदी दिया। मेरे निशाने पर हमेशा मछली की आंख रही है। खेल के दौरान मैंने हमेशा अपनी प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया और शायद ही ट्रेनिंग और टूर्नामेंट के इतर मैंने कुछ और सोचा हो। इसका फल भी मुझे मिला।
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यह कहना है देश के एकमात्र व्यक्तिगत ओलंपिक चैंपियन निशानेबाज अभिनव बिंद्रा का। बारह साल पहले आज ही के दिन (11 अगस्त, 2008) बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों की दस मीटर एयर राइफल स्पर्धा में सोने पर निशाना साध न सिर्फ अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करवाया बल्कि देश का वर्षों का पीले तमगे का सूखा भी खत्म किया। वह किसी भी खेल में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले भारतीय बने थे।
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वहीं 1980 मास्को ओलंपिक खेलों के बाद यह देश का पहला स्वर्ण पदक था। मास्को में हॉकी टीम ने पीला तमगा जीता था। बिंद्रा के अलावा पहलवान सुशील कुमार ने और मुक्केबाज विजेेंद्र सिंह ने कांस्य जीते थे। देश को सौ साल में सिर्फ एक ओलंपिक चैंपियन मिला।
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जल्द मिलेगा दूसरा चैंपियन
37 वर्षीय इस निशानेबाज ने कहा कि देश को दूसरा ओलंपिक चैंपियन जल्द मिलेगा। युवा खिलाड़ी बहुत अच्छा कर रहे हैं। सिर्फ शूटिंग में ही नहीं अन्य खेलों में भी। मुझे नहीं लगता कि हम एक और स्वर्ण पदक से बहुत दूर हैं।
2028 में शीर्ष दस में आना संभव
बिंद्रा को भी उम्मीद है कि भारत 2028 ओलंपिक में शीर्ष दस में शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह संभव है। लेकिन ऐसा करने के लिए अभी से काम शुरू हो जाना चाहिए।
एथलीटों को सर्वोत्तम सुविधाओं के साथ ही विशेषज्ञ कोचों का मार्गदर्शन मिलना शुरू हो गया है। अपनी फाउंडेशन के माध्यम से मैंने भी यह प्रक्रिया शुरू की है। जहां विभिन्न खेलों के 50 से अधिक एथलीटों को स्टीम छात्रवृत्ति के तहत देश में ही बेहतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पास पहुंच चूक गए विजय और सिंधु
बिंद्रा के चार साल बाद शूटर विजय कुमार लंदन ओलंपिक (2012) में शटलर पीवी सिंधु रियो ओलंपिक (2016) में चैंपियन बनने के करीब पहुंचे थे, लेकिन चूक गए। इन दोनों को रजत मिला।
1900 में पिचार्ड ने जीता था पहला पदक
हालांकि 1900 के पेरिस ओलंपिक में ब्रिटिश शासन वाले भारत की ओर से पहली बार नार्मन पिचार्ड गेम्स में शामिल हुए थे। उन्होंने 200 मीटर दौड़ और 200 मी. बाधा दौड़ में दो रजत पदक जीते थे। कई इतिहासकार इस पदक को भारत के खाते में नहीं गिनते, क्योंकि पिचार्ड ब्रिटिश मूल के थे। जबकि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) इसे भारत के खाते में गिनती है।